Trump administration: 28 हजार कमर्शियल लाइसेंस रद्द और 9,500 ड्राइविंग स्कूल ब्लैकलिस्ट
प्रवासी ड्राइवरों पर सख्ती, भारतीयों पर असर; पूर्व सैनिकों को ट्रकिंग में प्राथमिकता
Trump administration: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने देश की इमिग्रेशन और सड़क सुरक्षा नीतियों के तहत एक अत्यंत कड़ा कदम उठाते हुए 28 हजार से अधिक प्रवासी ट्रक ड्राइवरों के कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस (CDL) रद्द कर दिए हैं। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने इस फैसले की आधिकारिक पुष्टि करते हुए स्पष्ट किया कि सरकार उन ड्राइवरों पर शिकंजा कस रही है जो अमेरिकी परिवहन मानकों पर खरे नहीं उतरते हैं। संघीय आंकड़ों के अनुसार, रद्द किए गए लाइसेंसों में से लगभग 24 हजार ड्राइवर ऐसे पाए गए जो बुनियादी अंग्रेजी बोलने या पढ़ने में असमर्थ थे। इसके साथ ही, प्रशासन ने नियमों का उल्लंघन करने और अनधिकृत तरीके से लाइसेंस जारी करवाने में मदद करने वाले 9,500 ड्राइविंग स्कूलों को भी संघीय रजिस्ट्री से हटाकर बंद कर दिया है। सरकार का तर्क है कि यह फैसला न केवल अमेरिकी सड़कों को सुरक्षित बनाएगा, बल्कि घरेलू कार्यबल और स्थानीय नागरिकों को रोजगार के बेहतर अवसर भी प्रदान करेगा।
Trump administration: अवैध ड्राइविंग के खिलाफ सख्त कार्रवाई और अंग्रेजी भाषा की अनिवार्यता
ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी राज्यों के परिवहन विभागों के साथ मिलकर एक व्यापक अभियान चलाया, जिसके तहत गैर-डोमिसाइल्ड कमर्शियल ड्राइवर लाइसेंसों की गहन समीक्षा की गई। संघीय नियमों के मुताबिक, अमेरिका में 80 हजार पाउंड वजनी भारी कमर्शियल वाहन या ट्रक चलाने के लिए अंग्रेजी भाषा में पर्याप्त दक्षता होना अनिवार्य शर्त है ताकि ड्राइवर सड़क के संकेतों, निर्देशों और आपातकालीन नियमों को समझ सकें। जांच में पाया गया कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान हजारों गैर-नागरिकों को इस शर्त का पालन किए बिना अवैध रूप से लाइसेंस जारी कर दिए गए थे। अमेरिकी परिवहन सचिव सीन डफी ने इस संदर्भ में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि जो प्रवासी कानून के दायरे में नहीं आते और भाषा की अनिवार्यता को पूरा नहीं करते, उन्हें इतने विशाल ट्रकों के पहिए के पीछे बैठने का कोई अधिकार नहीं है। इस कार्रवाई से पूरे देश के ट्रकिंग उद्योग में हड़कंप मच गया है।
‘फ्रीडम हॉलर्स’ पहल: अमेरिकी पूर्व सैनिकों को ट्रकिंग सेक्टर में मिलेगी प्राथमिकता
प्रवासी ड्राइवरों के हटने से पैदा होने वाली चालकों की कमी को पूरा करने के लिए ट्रंप प्रशासन ने ‘फ्रीडम हॉलर्स’ (Freedom Haulers) नामक एक नया और महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय कार्यक्रम शुरू किया है। इस योजना के अंतर्गत अमेरिकी सेना, नौसेना और वायु सेना से सेवानिवृत्त हुए पूर्व सैनिकों को व्यावसायिक ट्रक ड्राइवर के रूप में भर्ती किया जाएगा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और परिवहन सचिव सीन डफी ने व्हाइट हाउस में पूर्व सैनिकों के साथ एक विशेष कार्यक्रम आयोजित कर इस पहल का उद्घाटन किया। प्रशासन का कहना है कि सैन्य सेवा के दौरान भारी वाहन चलाने का अनुभव रखने वाले पूर्व सैनिकों को व्यावहारिक कौशल परीक्षाओं से छूट दी जाएगी, जिससे वे बहुत कम समय में लाइसेंस प्राप्त कर सकेंगे। अधिकारियों के अनुसार, पूर्व सैनिकों में पहले से ही उच्च स्तर का अनुशासन, जिम्मेदारी और ड्राइविंग कौशल होता है, जो अमेरिकी माल ढुलाई व्यवस्था को मजबूत और सुरक्षित बनाने के लिए सर्वथा उपयुक्त है।
भारतीय प्रवासियों विशेषकर पंजाब और हरियाणा के ड्राइवरों पर पड़ेगा व्यापक असर
अमेरिकी ट्रकिंग उद्योग में भारतीय मूल के लोगों, विशेष रूप से पंजाब और हरियाणा से गए प्रवासियों की बहुत बड़ी भागीदारी रही है। ‘नॉर्थ अमेरिकन पंजाबी ट्रकर्स एसोसिएशन’ (NAPTA) के आंकड़ों के मुताबिक, वर्तमान में करीब 1.3 लाख से 1.5 लाख भारतीय ट्रक ड्राइवर सीधे तौर पर अमेरिका के ट्रांसपोर्टेशन और सप्लाई चेन क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। अमेरिका में लंबे समय से माल ढुलाई कर रहे इन भारतीय प्रवासियों के जीवन और आजीविका पर इस फैसले का सीधा और प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है। इनमें से कई ड्राइवर वर्क परमिट या अस्थायी वीजा श्रेणियों पर काम कर रहे थे और उनके लाइसेंस गैर-डोमिसाइल्ड श्रेणी के अंतर्गत आते थे। लाइसेंस रद्द होने और नियमों के कठोर होने के कारण हजारों भारतीय परिवारों के सामने वित्तीय संकट और रोजगार का खतरा खड़ा हो गया है।
फ्लोरिडा सड़क हादसे के बाद शुरू हुई देशव्यापी जांच और कानूनी सख्ती
प्रवासी ट्रक ड्राइवरों के खिलाफ इस आक्रामक कार्रवाई की शुरुआत अगस्त 2025 में फ्लोरिडा राजमार्ग पर हुए एक भीषण सड़क हादसे के बाद हुई थी। उस दुर्घटना में भारतीय मूल के एक ट्रक ड्राइवर द्वारा हाईवे पर अवैध यू-टर्न लिए जाने के कारण तीन निर्दोष लोगों की जान चली गई थी। जांच के दौरान पाया गया कि संबंधित ड्राइवर अंग्रेजी नियमों को समझने में असमर्थ था और उसे गलत तरीके से लाइसेंस जारी किया गया था। परिवहन सचिव सीन डफी ने उस घटना का जिक्र करते हुए स्पष्ट किया था कि ऐसे चालकों को कभी भी सड़कों पर उतरने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए थी। उस भयावह हादसे के बाद से अमेरिकी परिवहन विभाग ने देश भर में जांच अभियान तेज कर दिया और ऑन-रोड इंस्पेक्शन के दौरान अंग्रेजी भाषा में अयोग्य पाए जाने वाले ड्राइवरों को तत्काल प्रभाव से ‘आउट ऑफ सर्विस’ घोषित करना शुरू कर दिया।
वीजा शर्तों में कड़ाई और राज्यों पर संघीय फंड रोकने की चेतावनी
ट्रंप प्रशासन ने न केवल भाषा परीक्षण को कड़ा किया है, बल्कि गैर-डोमिसाइल्ड सीडीएल लाइसेंस प्राप्त करने के लिए वीजा और निवास शर्तों को भी अत्यधिक सीमित कर दिया है। अब केवल चुनिंदा कानूनी वीजा धारक ही कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा, केंद्र सरकार ने उन अमेरिकी राज्यों को कड़ा अल्टीमेटम दिया है जो अवैध या अयोग्य प्रवासियों को लाइसेंस जारी कर रहे थे। कैलिफोर्निया और न्यूयॉर्क जैसे राज्यों पर आरोप लगाया गया है कि वे संघीय दिशानिर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं कर रहे हैं, जिसके चलते प्रशासन ने उनके राजमार्ग निर्माण फंड में कटौती करने की चेतावनी दी है। यह मामला अब न्यायिक समीक्षा के अधीन भी पहुंच चुका है, लेकिन प्रशासन ने साफ कर दिया है कि सुरक्षा मानकों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
Trump administration: अमेरिकी ट्रकिंग उद्योग, अर्थव्यवस्था और भारतीय समुदाय के सामने भावी चुनौतियां
अमेरिकी अर्थव्यवस्था में ट्रकिंग सेक्टर को रीढ़ की हड्डी माना जाता है, क्योंकि देश का लगभग 70 प्रतिशत से अधिक माल ट्रकों के माध्यम से ही एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाया जाता है। उद्योग में पहले से ही ड्राइवरों की भारी कमी थी, और 28 हजार से अधिक लाइसेंस रद्द होने से सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ सकता है। पंजाबी और भारतीय प्रवासी समुदाय के विभिन्न संगठन इस स्थिति से निपटने के लिए कानूनी विकल्पों की तलाश कर रहे हैं और प्रभावित ड्राइवरों की मदद के प्रयास जारी हैं। हालांकि, सख्त संघीय कानूनों और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कड़े रुख को देखते हुए राहत मिलना काफी कठिन लग रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में ट्रकिंग उद्योग में स्थानीय अमेरिकी नागरिकों और पूर्व सैनिकों की भागीदारी बढ़ेगी, जबकि कानूनी दस्तावेजों और भाषा ज्ञान की कमी का सामना कर रहे प्रवासी ड्राइवरों को इस क्षेत्र से बाहर होना पड़ेगा।
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