RBI Policy 2026: आरबीआई ने रेपो रेट 5.25% पर रखा बरकरार, होम लोन EMI पर नहीं मिली राहत, महंगाई घटी तो GDP ग्रोथ बढ़ी; गवर्नर संजय मल्होत्रा ने दिए अहम संकेत

रेपो रेट यथावत, महंगाई अनुमान घटा, GDP ग्रोथ बढ़ी; RBI ने न्यूट्रल रुख रखा

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RBI Policy 2026: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने अपनी द्विमासिक समीक्षा बैठक के बाद नीतिगत रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखने का सर्वसम्मत फैसला सुनाया है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इस फैसले की जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि समिति के सभी छह सदस्यों ने सर्वसम्मति से दरों को स्थिर रखने के पक्ष में मतदान किया। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने अपना नीतिगत रुख ‘तटस्थ’ (Neutral) बनाए रखा है। इस निर्णय का प्रत्यक्ष असर देश के करोड़ों आम कर्जधारकों पर पड़ेगा, क्योंकि होम लोन, ऑटो लोन और अन्य पर्सनल कर्जों की मासिक किस्त यानी ईएमआई (EMI) में फिलहाल कोई बदलाव या राहत देखने को नहीं मिलेगी। यद्यपि आम जनता और बाजार विश्लेषकों को ब्याज दरों में हल्की कटौती की उम्मीद थी, लेकिन वैश्विक वित्तीय अनिश्चितताओं और घरेलू खाद्य महंगाई के जोखिमों को देखते हुए रिजर्व बैंक ने सतर्कता और सावधानी का रास्ता चुना।

RBI Policy 2026: दिसंबर 2025 के बाद लगातार चौथी बार दरों में स्थिरता

यह लगातार चौथा मौका है जब रिजर्व बैंक ने अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। इससे पहले दिसंबर 2025 में केंद्रीय बैंक ने दरों में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती की थी, जिसके बाद से रेपो रेट 5.25 प्रतिशत के स्तर पर ही स्थिर बना हुआ है। इसके अलावा स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) दर को 5.00 प्रतिशत पर और मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) तथा बैंक रेट को 5.50 प्रतिशत पर बरकरार रखा गया है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि भले ही भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद काफी मजबूत और लचीली है, लेकिन पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अनिश्चितता और अल नीनो जैसी मानसून संबंधी चुनौतियों के कारण भविष्य का मार्ग पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है।

आम कर्जधारकों और लोन ईएमआई पर सीधा प्रभाव

रेपो रेट में कोई बदलाव न होने से उन लाखों भारतीय परिवारों की उम्मीदों को झटका लगा है जो फ्लोटिंग रेट पर होम लोन या ऑटो लोन लेकर ईएमआई में कटौती का इंतजार कर रहे थे। चूंकि अधिकांश व्यावसायिक बैंक अपने लोन की ब्याज दरों को सीधे आरबीआई के रेपो रेट से जोड़कर तय करते हैं, इसलिए फिलहाल आम जनता की ईएमआई पूर्ववत बनी रहेगी। यही स्थिति सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) द्वारा लिए गए व्यावसायिक कर्जों पर भी लागू होगी। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आगामी महीनों में महंगाई दर पूरी तरह से नियंत्रण में रहती है और देश की विकास दर मजबूत बनी रहती है, तो रिजर्व बैंक अपनी आगामी बैठकों में ब्याज दरों में कटौती का रास्ता साफ कर सकता है। फिलहाल केंद्रीय बैंक ने डेटा-संचालित (Data-Dependent) रणनीति अपनाने का संकेत दिया है।

महंगाई का अनुमान घटकर 5 प्रतिशत हुआ, लेकिन तीसरी तिमाही में उछाल की आशंका

रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर आधारित मुख्य महंगाई दर के अनुमान को 10 बेसिस पॉइंट घटाकर 5.0 प्रतिशत कर दिया है। तिमाहीवार अनुमानों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में महंगाई 5.3 प्रतिशत, दूसरी तिमाही में 4.7 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 5.9 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 5.5 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है। गवर्नर ने आगाह किया कि निकट भविष्य में खाद्य पदार्थों और ईंधन की कीमतों में तेजी के कारण वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में मुख्य महंगाई दर अपने उच्चतम स्तर तक पहुंच सकती है। हालांकि, तीसरी तिमाही के बाद इसमें गिरावट आने की उम्मीद जताई गई है। कीमती धातुओं को यदि छोड़ दिया जाए तो कोर इन्फ्लेशन यानी मूल महंगाई दर वर्तमान में पूरी तरह नियंत्रण में है और केंद्रीय बैंक के अनुमानों के अनुरूप बनी हुई है।

जीडीपी विकास दर के अनुमान में 10 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी

महंगाई दर के अनुमान में राहत देने के साथ-साथ रिजर्व बैंक ने देश की आर्थिक वृद्धि दर यानी वास्तविक जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को भी संशोधित किया है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जीडीपी विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया गया है, जो कि पिछले अनुमान से 10 बेसिस पॉइंट अधिक है। गवर्नर संजय मल्होत्रा के अनुसार, पहली तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था ने अनुमान से बेहतर और सकारात्मक प्रदर्शन किया है। तिमाहीवार आंकड़ों पर नजर डालें तो पहली तिमाही में 7.0 प्रतिशत, दूसरी तिमाही में 6.4 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 6.5 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 6.8 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान व्यक्त किया गया है। देश में मजबूत घरेलू मांग, सेवा क्षेत्र में निरंतर विस्तार और निवेश गतिविधियों में आई तेजी से विकास दर को टिकाऊ सहारा मिलने की पूरी संभावना है।

वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और वित्तीय बाजारों में अस्थिरता

गवर्नर संजय मल्होत्रा ने अपने संबोधन में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी पश्चिम एशिया संघर्ष का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्रीय तनाव के कारण वैश्विक व्यापार मार्ग बाधित हो रहे हैं, जिससे लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ रही है और वैश्विक वित्तीय बाजारों में भारी अनिश्चितता का माहौल पैदा हो रहा है। इसके साथ ही अमेरिकी डॉलर की मजबूती, ऊंची बॉन्ड यील्ड और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के कड़े रुख ने विकासशील देशों की मुद्राओं और बाजारों पर दबाव बनाया हुआ है। हालांकि, इन तमाम अंतरराष्ट्रीय प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने खुद को बेहद मजबूत और आत्म-निर्भर साबित किया है, जहाँ घरेलू उपभोग और मांग विकास का मुख्य स्तंभ बनी हुई है।

तटस्थ रुख का अर्थ और भविष्य की मौद्रिक नीति की दिशा

मौद्रिक नीति समिति द्वारा अपने रुख को ‘तटस्थ’ बनाए रखने का बहुत गहरा आर्थिक अर्थ है। इसका तात्पर्य यह है कि केंद्रीय बैंक ने आने वाले समय के लिए अपने सभी विकल्प खुले रखे हैं। यदि महंगाई दर नियंत्रण में रहती है और वैश्विक स्थितियां अनुकूल होती हैं, तो दरों में कटौती की जा सकती है। इसके विपरीत, यदि खाद्य व ईंधन की कीमतों के कारण महंगाई फिर से बेकाबू होती है, तो दरों को बढ़ाने का विकल्प भी मौजूद रहेगा। समिति ने स्पष्ट किया है कि जब तक महंगाई के पथ, उसकी संरचना और उभरते हुए वैश्विक जोखिमों पर पूरी तरह से स्पष्टता नहीं आ जाती, तब तक किसी भी दिशा में आक्रामक नीतिगत कदम उठाना जल्दबाजी होगी।

शेयर बाजार, बैंकिंग और आम निवेशकों पर असर

आरबीआई के इस फैसले से शेयर बाजार को अनिश्चितता खत्म होने के कारण कुछ राहत मिली है। ब्याज दरों में स्थिरता रहने से बैंकिंग, ऑटो और रियल एस्टेट जैसे ब्याज-संवेदनशील क्षेत्रों को प्रत्यक्ष सहारा मिलने की उम्मीद है। आम निवेशकों के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और बचत खातों पर ब्याज दरें फिलहाल मौजूदा स्तरों पर ही स्थिर रहेंगी, जिससे आय की निश्चितता बनी रहेगी। विश्लेषकों का मानना है कि रिजर्व बैंक ने इस नीति के माध्यम से आर्थिक वृद्धि को गति देने और महंगाई को थामने के बीच एक बेहद सूक्ष्म और संतुलित संतुलन साधने का प्रयास किया है।

RBI Policy 2026: निष्कर्ष और आगामी राह

आरबीआई की यह मौद्रिक नीति समीक्षा वैश्विक अनिश्चितता के दौर में भारतीय अर्थव्यवस्था के अनुशासन और सतर्कता को रेखांकित करती है। यद्यपि होम लोन की ईएमआई पर तत्काल राहत न मिलने से आम उपभोक्ताओं को थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा, लेकिन स्थिर ब्याज दरों का यह दौर देश में समग्र आर्थिक गतिविधियों को बिना किसी रुकावट के चलाने में सहायक सिद्ध होगा। आने वाले समय में अल नीनो का प्रभाव, मानसून की प्रगति, कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें और वैश्विक भू-राजनीतिक समीकरण ही यह तय करेंगे कि रिजर्व बैंक अपनी अगली बैठकों में आम जनता को दरों में कटौती का तोहफा देता है या नहीं।

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