Jharkhand recruitment protest: झारखंड भर्ती आंदोलन बना कांग्रेस के लिए सियासी सिरदर्द, हेमंत सोरेन सरकार पर बढ़ा दबाव, जांच की मांग से गठबंधन में बढ़ी बेचैनी
भर्ती घोटाले की जांच की मांग तेज, हेमंत सरकार और कांग्रेस पर बढ़ा राजनीतिक दबाव
Jharkhand recruitment protest: झारखंड की राजधानी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में सरकारी भर्ती परीक्षाओं (JPSC और JSSC) में कथित अनियमितताओं व पेपर लीक के खिलाफ अभ्यर्थियों का अनिश्चितकालीन धरना जारी है। शुरुआत में जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं की जांच सीबीआई (CBI) से कराने की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांग और तेज कर दी है। अभ्यर्थियों की मांग है कि जांच सीबीआई के बजाय झारखंड से बाहर के सेवानिवृत्त हाईकोर्ट न्यायाधीशों के एक स्वतंत्र पैनल से कराई जाए।
यह आंदोलन ऐसे समय में तेज हुआ है जब कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर पर पेपर लीक और भर्ती धांधली के मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार पर हमलावर है। संसद में विरोध और दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई को कांग्रेस प्रमुख मुद्दा बना रही है, जिससे रांची के इस आंदोलन ने पार्टी के लिए धर्मसंकट की स्थिति पैदा कर दी है।
कांग्रेस का आंतरिक दबाव और प्रतिनिधिमंडल की भूमिका
कांग्रेस आलाकमान इस बात को लेकर चिंतित है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के ढुलमुल रवैये से पार्टी की ‘युवा समर्थक’ छवि को नुकसान न पहुंचे। इसी दबाव के तहत एआईसीसी (AICC) के झारखंड प्रभारी के. राजू के नेतृत्व में कांग्रेस नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री से मुलाकात करने वाला है। इस प्रतिनिधिमंडल में सरकार में शामिल कांग्रेस के मंत्री भी शामिल होंगे, जो अभ्यर्थियों की जायज चिंताओं के समाधान के लिए ठोस कदम उठाने की मांग करेंगे।
कांग्रेस नेतृत्व ने यूथ कांग्रेस और एनएसयूआई (NSUI) के पदाधिकारियों को भी प्रदर्शन स्थल पहुंचकर अभ्यर्थियों का समर्थन करने के निर्देश दिए हैं। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी लगातार पेपर लीक का मुद्दा उठा रहे हैं, ऐसे में अगर कांग्रेस रांची में युवाओं के साथ खड़ी नहीं दिखती है, तो इससे राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी के राजनीतिक रुख पर सवाल उठने का खतरा है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की प्रतिक्रिया और सीआईडी जांच
आंदोलन के बढ़ते दबाव के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपनी पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया में कहा है कि सरकार अभ्यर्थियों की चिंताओं को पूरी गंभीरता से ले रही है। मांगों की गहन समीक्षा की जा रही है और जल्द ही उपयुक्त समाधान की घोषणा की जाएगी।
वर्तमान में राज्य सरकार की ओर से सीआईडी (CID) मामले की जांच कर रही है और कई आरोपियों की गिरफ्तारियां भी हुई हैं। हालांकि, अभ्यर्थी सीआईडी जांच से असंतुष्ट हैं और परीक्षा रद्द करने के साथ-साथ एक स्वतंत्र जांच एजेंसी या न्यायिक पैनल से जांच कराने की मांग पर अड़े हुए हैं।
जेएमएम और कांग्रेस के रिश्तों में तनाव
झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और कांग्रेस के रिश्तों में (Jharkhand recruitment protest) पहले से ही तल्खी बनी हुई है। आगामी बिहार विधानसभा चुनावों के संदर्भ में जेएमएम ने सहयोगी दलों पर सीटों से वंचित करने का आरोप लगाया था। हाल ही में हुए राज्यसभा चुनावों में भी कांग्रेस द्वारा जेएमएम की सहमति के बिना प्रत्याशी उतारने और क्रॉस वोटिंग में उस उम्मीदवार की हार के बाद दोनों दलों के बीच दूरी और बढ़ गई थी।
अब भर्ती आंदोलन गठबंधन के इन मतभेदों को और गहरा कर सकता है। अगर कांग्रेस खुलकर युवाओं के समर्थन में उतरती है तो जेएमएम इसे गठबंधन के अंदर दबाव बनाने की रणनीति मान सकती है। वहीं, अगर कांग्रेस खामोश रहती है तो राहुल गांधी के राष्ट्रीय अभियानों के साथ उसका तालमेल बिगड़ता है।
Jharkhand recruitment protest: राजनीतिक संदेश और भविष्य की चुनौतियां
यह भर्ती आंदोलन कांग्रेस के लिए एक दोधारी तलवार साबित हो रहा है। एक तरफ पार्टी के पास राज्य के युवाओं का भरोसा हासिल करने का मौका है, तो दूसरी तरफ गठबंधन सरकार की स्थिरता और सहयोगी दल के साथ रिश्तों पर असर पड़ने का जोखिम है। भूख हड़ताल, कैंडल मार्च और विधानसभा घेराव जैसी चेतावनियों के बीच अगर सरकार जल्द ही कोई ठोस फैसला नहीं लेती, तो यह आंदोलन और अधिक विकराल रूप ले सकता है।
झारखंड का यह भर्ती आंदोलन अब केवल परीक्षाओं में सुधार या धांधली की जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह राज्य के सत्ताधारी गठबंधन के आंतरिक समीकरणों और कांग्रेस के राजनीतिक रुख की भी कड़ी परीक्षा ले रहा है।
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