Supreme Court NEET: NEET-UG परीक्षा में बड़े बदलाव की तैयारी, सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा- जेईई की तर्ज पर टू-स्टेज और कंप्यूटर बेस्ड एग्जाम पर हो रहा विचार
सुप्रीम कोर्ट में सरकार का हलफनामा, टास्क फोर्स की सिफारिशों के बाद होगा अंतिम फैसला
Supreme Court NEET: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर बताया है कि नीट यूजी परीक्षा को जेईई की तर्ज पर दो चरणों में कराने और कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट यानी सीबीटी मोड में बदलने पर सक्रिय रूप से विचार किया जा रहा है। यह कदम नीट यूजी 2026 में हुए पेपर लीक विवाद के बाद उठाया गया है। सरकार ने साफ किया कि अंतिम फैसला नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता वाली हाई पावर्ड टास्क फोर्स की सिफारिशों के बाद ही लिया जाएगा।
नीट यूजी देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा है जिसमें हर साल 22 लाख से ज्यादा छात्र शामिल होते हैं। पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों छात्रों की मेहनत पर पानी फेर दिया था। अब सरकार परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव की तैयारी में है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
Supreme Court NEET: सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में क्या कहा
4 अगस्त 2026 को दायर हलफनामे में सरकार ने बताया कि एनटीए की आठ बड़ी परीक्षाओं में से सात पहले ही कंप्यूटर बेस्ड हो चुकी हैं। जेईई मेन, सीयूईटी यूजी, सीयूईटी पीजी, यूजीसी नेट और सीएसआईआर नेट जैसी परीक्षाएं सीबीटी मोड में सफलतापूर्वक संपन्न हो रही हैं। सिर्फ नीट यूजी अभी भी पेन-पेपर मोड में है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि नीट को बदलना आसान नहीं है क्योंकि इसमें ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में छात्र आते हैं। ज्यादातर उम्मीदवार महिलाएं होती हैं और यह एमबीबीएस, बीडीएस, आयुष, वेटरनरी और नर्सिंग जैसे कई कोर्सों का प्रवेश द्वार है। इसलिए किसी भी बदलाव से पहले सभी पहलुओं पर विचार किया जाएगा।
टू-स्टेज फॉर्मूला कैसे काम करेगा
प्रस्तावित मॉडल में नीट यूजी को दो चरणों में बांटा जाएगा। पहला चरण नीट मेन के रूप में स्क्रीनिंग टेस्ट होगा जिसमें बड़ी संख्या में छात्र शामिल होंगे। यह कंप्यूटर बेस्ड होगा और इसके अंकों के आधार पर छात्र दूसरे चरण के लिए क्वालीफाई करेंगे।
दूसरा चरण नीट एडवांस्ड होगा जिसमें सीमित संख्या में छात्र होंगे। यह ज्यादा सुरक्षित और कड़ी निगरानी में आयोजित होगा। अंतिम मेरिट इसी चरण के आधार पर बनेगी। इस व्यवस्था से पेपर लीक की संभावना काफी हद तक कम हो सकती है क्योंकि दूसरे चरण में छात्रों की संख्या कम होने से पेपर की छपाई और सुरक्षा आसान हो जाएगी।
पेपर लीक रोकने में कैसे मदद मिलेगी
टू-स्टेज मॉडल और सीबीटी मोड से कई फायदे हो सकते हैं। दूसरे चरण में कम छात्र होने से पेपर के पन्ने कम छपेंगे जिससे लीक होने की संभावना घटेगी। अगर पहले चरण का पेपर लीक भी हो जाए तो उसका वजन कम होगा और दूसरे चरण का पेपर ज्यादा सुरक्षित रहेगा।
कंप्यूटर बेस्ड परीक्षा में पेन-पेपर की तुलना में लीक की आशंका बहुत कम होती है। हर छात्र को अलग सेट मिल सकता है जिससे एक पेपर लीक होने पर पूरी परीक्षा प्रभावित नहीं होती। जेईई में यह मॉडल काफी हद तक सफल रहा है और वहां पेपर लीक के मामले बहुत कम आए हैं।
सरकार के सुरक्षा इंतजाम
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह पहले ही कई सुरक्षा उपाय लागू कर चुकी है। पूर्व इसरो चीफ डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक समिति ने नीट के लिए सुरक्षा ढांचा तैयार किया है। पब्लिक एग्जामिनेशन प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स अमेंडमेंट एक्ट 2026 लाया गया है जिसमें पेपर लीक पर सख्त सजा और फास्ट ट्रैक कोर्ट का प्रावधान है।
नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में हाई पावर्ड टास्क फोर्स गठित की गई है। इसमें पूर्व इसरो चीफ एस. सोमनाथ, पूर्व आईबी चीफ तपन डेका, आईआईटी मद्रास के डायरेक्टर और पूर्व शिक्षा सचिव जैसे अनुभवी लोग शामिल हैं। पेपर हाई सिक्योरिटी लोकेशन पर बनाए जाते हैं जहां इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस पर पाबंदी है। पेपर क्यूआर कोडेड और टैम्पर प्रूफ बॉक्स में पैक किए जाते हैं। जीपीएस टैग्ड स्टील ट्रंक में सीएपीएफ एस्कॉर्ट के साथ ले जाए जाते हैं। परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक, फेशियल रिकॉग्निशन और मेटल डिटेक्टर से जांच होती है।
चुनौतियां और सीमाएं
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह सही दिशा में बड़ा कदम है लेकिन जादुई छड़ी नहीं है। नीट में 22 लाख से ज्यादा छात्र हैं। इतनी बड़ी परीक्षा को सीबीटी में बदलना बुनियादी ढांचे की चुनौती पेश करता है। ग्रामीण इलाकों के छात्रों के पास कंप्यूटर और स्थिर इंटरनेट की सुविधा सीमित हो सकती है। साइबर अटैक और हैकिंग का खतरा भी बढ़ सकता है।
जब तक सोशल मीडिया और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म से पेपर लीक को पूरी तरह नहीं रोका जाता तब तक जोखिम बना रहेगा। सजा का प्रावधान सख्त होना चाहिए और एनटीए पर छात्रों का भरोसा बहाल करना जरूरी है।
Supreme Court NEET: आगे की राह
अंतिम फैसला टास्क फोर्स की रिपोर्ट के बाद लिया जाएगा। छात्रों को पर्याप्त समय दिया जाएगा ताकि वे नई व्यवस्था के अनुकूल हो सकें। सरकार का जोर पारदर्शिता, सुरक्षा और निष्पक्षता पर है। नीट जैसी परीक्षा में किसी भी बदलाव का असर लाखों युवाओं के भविष्य पर पड़ता है इसलिए सतर्कता जरूरी है।
पेपर लीक की घटनाओं ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को चुनौती दी थी। सरकार के इस प्रस्ताव से उम्मीद जताई जा रही है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर लगाम लग सकेगी। लेकिन सफलता तभी मिलेगी जब तकनीकी बदलाव के साथ-साथ प्रशासनिक इच्छाशक्ति और सख्त निगरानी भी सुनिश्चित की जाए। सुप्रीम कोर्ट में दिए गए बयान के बाद अब टास्क फोर्स की सिफारिशों का इंतजार है जो परीक्षा सुधार की दिशा तय करेंगी।
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