JPSC Chairman Arrested: JPSC महाघोटाले में बड़ी कार्रवाई, पूर्व चेयरमैन एल खियांग्ते गिरफ्तार; ओएमआर हेराफेरी और ठेका आवंटन को लेकर जांच तेज
CID ने पूर्व चेयरमैन को गिरफ्तार किया, ओएमआर हेराफेरी और ठेका मामले में जांच तेज
JPSC Chairman Arrested: झारखंड की राजधानी रांची में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में धांधली को लेकर अभ्यर्थियों का आक्रोश अपने चरम पर है। 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में हुई व्यापक अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कर रही अपराध अनुसंधान विभाग (CID) की विशेष टीम ने सोमवार को एक बड़ी और ऐतिहासिक कार्रवाई को अंजाम दिया। सीआईडी ने जेपीएससी के पूर्व चेयरमैन एल खियांग्ते को गिरफ्तार कर लिया है। जांच एजेंसी के अधिकारियों का कहना है कि पूर्व चेयरमैन के खिलाफ आर्थिक लेनदेन, पद के दुरुपयोग और दागी कंपनी को ठेका देने से संबंधित ठोस और पुख्ता सबूत मिलने के बाद ही यह कदम उठाया गया है।
इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब तक लगभग बीस से अधिक आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिसमें आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर निजी कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हैं। यह गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है जब हजारों अभ्यर्थी रांची की सड़कों पर उतरकर राज्य विधानसभा घेराव की कोशिश कर रहे थे। पिछले कई दिनों से जारी व्यापक छात्र आंदोलन और उग्र होते विरोध प्रदर्शनों के बीच पूर्व चेयरमैन की गिरफ्तारी ने पूरे भर्ती घोटाले की जांच को एक नया और बेहद महत्वपूर्ण मोड़ दे दिया है।
JPSC Chairman Arrested: लंबी पूछताछ, डिजिटल साक्ष्य और पूर्व चेयरमैन की गिरफ्तारी का घटनाक्रम
सीआईडी की विशेष जांच टीम पिछले कई हफ्तों से 14वीं सिविल सेवा परीक्षा में हुई धांधली के डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्यों की बारीकी से पड़ताल कर रही थी। जांच की इसी कड़ी में पूर्व चेयरमैन एल खियांग्ते को सीआईडी मुख्यालय समन भेजकर लगातार पूछताछ के लिए बुलाया जा रहा था। सीआईडी अधिकारियों ने उनसे कई दौर की गहन पूछताछ की, जो कई बार आठ से नौ घंटे तक चली। इस दौरान जांचकर्ताओं ने आयोग के जब्त दस्तावेजों, ओएमआर शीट के डिजिटल रिकॉर्ड और मामले में पहले से गिरफ्तार किए गए अन्य सह-आरोपियों के बयानों का आमने-सामने मिलान कराया।
सोमवार को पूछताछ के अंतिम दौर में जब सीआईडी के पास पूर्व चेयरमैन के खिलाफ अपराध में संलिप्तता के पर्याप्त और अकाट्य प्रमाण जमा हो गए, तो उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के तुरंत बाद सीआईडी की टीम उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच अपने मुख्यालय ले गई, जहां कानूनी कागजी कार्रवाई पूरी की गई। सीआईडी अब उन्हें विशेष अदालत में पेश कर रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है ताकि घोटाले की परतों को और गहराई से उघाड़ा जा सके। इससे पूर्व इस मामले में परीक्षा का संचालन करने वाली एजेंसी के अधिकारियों और आयोग के उप परीक्षा नियंत्रक जैसे प्रमुख पदों पर तैनात लोगों को पहले ही जेल भेजा जा चुका है।
काली सूची में दर्ज टीडीपीएल कंपनी को ठेका देने और भारी कमीशन का आरोप
इस पूरे जेपीएससी घोटाले की जांच का मुख्य केंद्र बिंदु टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) नामक एक निजी डेटा प्रोसेसिंग कंपनी रही है। सीआईडी की जांच रिपोर्ट में यह तथ्य उजागर हुआ है कि टीडीपीएल कंपनी पहले से ही देश के अन्य राज्यों में आयोजित भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी और धांधली के आरोपों के चलते ब्लैकलिस्टेड (काली सूची में दर्ज) थी। इसके बावजूद नियमों और गोपनीयता के मानकों को दरकिनार करते हुए जेपीएससी की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा का गोपनीय काम इसी विवादित कंपनी को सौंप दिया गया था।
जांच एजेंसी के सूत्रों के मुताबिक, पूर्व चेयरमैन पर इस दागी कंपनी को टेंडर आवंटित करने के बदले अनुचित लाभ और आर्थिक लेनदेन करने के गंभीर आरोप लगे हैं। मामले में गिरफ्तार किए गए एक मुख्य आरोपी के इकबालिया बयान में यह दावा किया गया था कि परीक्षा का ठेका दिलाने के एवज में दो करोड़ रुपये की अग्रिम राशि और बाद में कुल भुगतान पर बीस प्रतिशत कमीशन तय किया गया था। यद्यपि ये आरोप वर्तमान में न्यायिक प्रक्रिया और जांच के अधीन हैं, लेकिन सीआईडी द्वारा टीडीपीएल के कार्यालयों से जब्त की गई ओएमआर शीट्स, सर्वर डेटा और डिजिटल टेम्परिंग के सबूतों ने आरोपों को भारी बल दिया है। इसी दबाव के चलते एल खियांग्ते ने जुलाई माह में अपने पद से त्यागपत्र दे दिया था।
इस्तीफे से लेकर पासपोर्ट जब्ती और प्रशासनिक हलकों में मचा हड़कंप
एल खियांग्ते ने 22 जुलाई 2026 को जेपीएससी के चेयरमैन पद से इस्तीफा सौंप दिया था। उस समय उन्होंने अपने बयान में कहा था कि वे निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच का मार्ग प्रशस्त करने के लिए नैतिक आधार पर अपना पद छोड़ रहे हैं। हालांकि, पद छोड़ने के बाद भी सीआईडी ने जांच की रफ्तार धीमी नहीं पड़ने दी। जांच एजेंसी ने उनके विदेश भागने की आशंका को देखते हुए उनका पासपोर्ट तुरंत जब्त कर लिया था और उनके पिछले कुछ वर्षों के वित्तीय लेनदेन व विदेश यात्राओं के खर्च का पूरा ब्योरा तलब किया था।
उल्लेखनीय है कि एल खियांग्ते झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव जैसे सर्वोच्च प्रशासनिक पद पर रह चुके हैं। वे राज्य के बेहद वरिष्ठ और प्रभावशाली पूर्व आईएएस अधिकारी रहे हैं, जिन्होंने मार्च 2025 में जेपीएससी के अध्यक्ष का पदभार ग्रहण किया था। राज्य के प्रशासनिक इतिहास में इतने ऊंचे पद और अनुभव वाले अधिकारी की आपराधिक मामले में गिरफ्तारी होने से नौकरशाही और राजनीतिक हलकों में जबरदस्त हड़कंप मच गया है।
सड़कों पर उतरा आक्रोश: अभ्यर्थियों का विधानसभा कूच और सीबीआई जांच की मांग
पूर्व चेयरमैन की गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है जब जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं में हुई कथित धांधली के खिलाफ छात्रों का गुस्सा उफान पर है। अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर पिछले सत्रह दिनों से राजधानी रांची में अनवरत आंदोलन कर रहे हैं। सोमवार को हजारों की संख्या में छात्रों ने एकजुट होकर राज्य विधानसभा की ओर मार्च किया। पुलिस द्वारा लगाए गए कई स्तरों के सुरक्षा घेरे और बैरिकेडिंग को तोड़ने की कोशिश के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़पें भी देखने को मिलीं।
राज्य सरकार का दावा है कि उसने वार्ता के जरिए छात्रों की नब्बे प्रतिशत से अधिक मांगें मान ली हैं और तीन प्रमुख संदेहास्पद परीक्षाओं को रद्द कर दिया है। हालांकि, छात्र संगठनों का कहना है कि वे केवल तीन परीक्षाओं को रद्द करने के फैसले से संतुष्ट नहीं हैं, बल्कि धांधली की शिकार हुई सभी तेरह भर्ती परीक्षाओं को पूरी तरह रद्द करने की मांग पर अड़े हैं। इसके अतिरिक्त, अभ्यर्थी राज्य सीआईडी जांच के बजाय पूरे मामले की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से जांच कराने या फिर राज्य के बाहर स्थित किसी उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित स्वतंत्र समिति से जांच कराने की जिद पर अड़े हुए हैं।
प्रवर्तन निदेशालय की प्रवेश और मनी लॉन्ड्रिंग की समानांतर जांच
इस हाई-प्रोफाइल भर्ती घोटाले में अब केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी समानांतर कार्रवाई शुरू कर दी है। सीआईडी द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी (FIR) और प्रकाश में आए करोड़ों रुपये के संदेहास्पद लेन-देन के आधार पर ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत मामला दर्ज कर लिया है। राज्य सरकार की ओर से औपचारिक अनुशंसा न मिलने के बावजूद ईडी द्वारा स्वतः संज्ञान लेकर की गई इस कार्रवाई ने मामले की गंभीरता को कई गुना बढ़ा दिया है।
ईडी अब इस बात की जांच कर रही है कि परीक्षा में धांधली और ठेका आवंटन के जरिए जुटाए गए अवैध धन को किन-किन माध्यमों से शेल कंपनियों और बेनामी संपत्तियों में खपाया गया। इस आर्थिक पहलू की जांच से कई बड़े नौकरशाहों, राजनेताओं और बिचौलियों के बेनकाब होने की संभावना बढ़ गई है।
ओएमआर हेराफेरी, डेटा टेम्परिंग और भर्ती तंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल
सीआईडी द्वारा अब तक की गई जांच में यह बात साफ हो चुकी है कि परीक्षा प्रक्रिया में गोपनीयता का पूरी तरह से उल्लंघन किया गया था। ओएमआर शीट्स में टेम्परिंग, उत्तर पुस्तिकाओं को बाद में भरने, सर्वर में अंकों के फेरबदल और अनुचित साधनों का प्रयोग करके अयोग्य अभ्यर्थियों को पास कराने के साक्ष्य मिले हैं। इस संगठित अपराध में शामिल आयोग के तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक, टीडीपीएल के निदेशक, मार्केटिंग मैनेजर, कंप्यूटर ऑपरेटर और अवैध लाभ उठाने वाले कई फर्जी अभ्यर्थियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
इस बड़े पैमाने पर उजागर हुए भ्रष्टाचार ने राज्य की संपूर्ण प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली और प्रशासनिक व्यवस्था की साख पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्षों तक कड़ी मेहनत और आर्थिक तंगी झेलकर तैयारी करने वाले लाखों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ होने से प्रदेश के छात्रों का सरकारी भर्ती तंत्र से भरोसा उठ चुका है। छात्र आंदोलनों के पीछे यही गहरा असंतोष और आक्रोश मुख्य वजह बना हुआ है।
JPSC Chairman Arrested: भावी कानूनी कार्रवाई और राज्य में आगे के हालात
पूर्व चेयरमैन की गिरफ्तारी के बाद अब यह मामला पूरी तरह अदालती कार्रवाई के चरण में प्रवेश कर चुका है। सीआईडी आरोपी एल खियांग्ते को सक्षम अदालत में पेश कर पुलिस हिरासत (रिमांड) की मांग करेगी ताकि आमने-सामने बैठाकर अन्य अभियुक्तों से पूछताछ की जा सके। वहीं दूसरी ओर, ईडी द्वारा भी जल्द ही समन जारी कर आरोपियों से पूछताछ किए जाने के कयास लगाए जा रहे हैं।
राज्य सरकार भले ही सीआईडी की इस त्वरित कार्रवाई को अपनी निष्पक्षता का प्रमाण बता रही हो, लेकिन छात्र संगठन और विपक्षी दल जांच के दायरे को देखते हुए स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी की मांग पर कायम हैं। जब तक छात्रों की सभी मुख्य मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक रांची में तनावपूर्ण स्थिति बने रहने की संभावना है। आने वाले दिनों में अदालत के फैसले, ईडी के अगले कदम और सीआईडी की चार्जशीट से यह तय होगा कि झारखंड के लाखों युवाओं को न्याय मिल पाता है या नहीं।
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