Maharashtra ST Bus Accident: महाराष्ट्र में बड़ा हादसा टला, 150 फीट गहरी खाई के मुहाने पर लटकी ST बस; 49 यात्रियों ने खिड़कियों से कूदकर बचाई जान
स्टीयरिंग रॉड टूटने से बेकाबू हुई बस, पेड़ और सुरक्षा दीवार ने बचाई 49 यात्रियों की जान
Maharashtra ST Bus Accident: महाराष्ट्र के जलगांव जिले से रविवार को एक रोंगटे खड़े कर देने वाला सड़क हादसा सामने आया है, जहां एक सरकारी यात्री बस अनियंत्रित होकर 150 फीट गहरी खाई के बिल्कुल मुहाने पर जाकर लटक गई। छत्रपति संभाजीनगर से गुजरात के सूरत जा रही महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (MSRTC) की इस बस में लगभग 49 यात्री सवार थे। घाट के बेहद खतरनाक और संकरे मोड़ पर अचानक बस का स्टीयरिंग रॉड टूटने के कारण वाहन का संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया था।
चालक की सूझबूझ, सड़क किनारे बनी कंक्रीट की सुरक्षा दीवार और वहां खड़े एक मजबूत पेड़ के सहारे बस खाई में गिरने से ऐन वक्त पर रुक गई। बस के खाई के किनारे लटकते ही भीतर सवार यात्रियों में चीख-पुकार मच गई और लोगों ने खिड़कियां खोलकर व फांदकर बाहर कूदते हुए अपनी जान बचाई। स्थानीय नागरिकों, पुलिस और बचाव दल की त्वरित सहायता से सभी 49 यात्रियों को सकुशल बाहर निकाल लिया गया, जिससे एक भीषण मानवीय त्रासदी होने से टल गई।
Maharashtra ST Bus Accident: कन्नड़ घाट के खतरनाक मोड़ पर अचानक टूटा स्टीयरिंग रॉड
यह घटना जलगांव और छत्रपति संभाजीनगर की सीमा पर स्थित चालीसगांव तहसील के अंतर्गत आने वाले कुख्यात कन्नड़ घाट (आटम घाट) क्षेत्र में घटी। राज्य परिवहन की यह बस दोपहर के समय छत्रपति संभाजीनगर के केंद्रीय बस डिपो से रवाना होकर धुले और नवापुर के रास्ते सूरत की ओर जा रही थी। जैसे ही बस कन्नड़ घाट के घुमावदार ढलान से गुजर रही थी, अचानक एक तीव्र मोड़ पर बस के पहियों को दिशा देने वाली मुख्य स्टीयरिंग रॉड बीच से टूट गई।
बस चालक प्रहलाद के अनुसार, वाहन सामान्य गति से आगे बढ़ रहा था, किंतु अचानक स्टीयरिंग व्हील ने काम करना बंद कर दिया और वह पूरी तरह फ्री हो गया। चालक ने तुरंत खतरे को भांप लिया कि बस सीधे 150 फीट गहरी खाई की दिशा में बढ़ रही है। चालक ने बिना घबराए पूरी ताकत से आपातकालीन ब्रेक दबाए और बस को खाई की तरफ जाने से रोकने के लिए बाईं ओर बनी सुरक्षा दीवार की तरफ रगड़ते हुए मोड़ने का भरसक प्रयास किया।
सुरक्षा दीवार और पेड़ बने ढाल: खाई के किनारे लटकी आधी बस
चालक के आपातकालीन प्रयास के चलते बस सुरक्षा दीवार से टकराई और दीवार के पास खड़े एक विशाल पेड़ के तने से जा टकराकर वहीं अटक गई। टक्कर का प्रभाव इतना जोरदार था कि सुरक्षा दीवार का एक हिस्सा टूट गया और बस का अगला पहिया व बोनट हवा में 150 फीट गहरी खाई के ऊपर लटक गया। यदि बस की गति थोड़ी सी भी अधिक होती अथवा पेड़ का सहारा न मिलता, तो पूरी बस 49 यात्रियों समेत सीधे सैकड़ों फीट नीचे पथरीली खाई में समा जाती।
बस के रुकते ही अंदर बैठे यात्रियों के बीच भयानक अफरा-तफरी मच गई। नीचे गहरी खाई को देखकर यात्री घबराकर चिल्लाने लगे। यात्रियों ने समझ लिया कि मुख्य दरवाजे की ओर से हिलने-डुलने पर बस का संतुलन बिगड़ सकता है और वह खाई में पलट सकती है। ऐसे में यात्रियों ने तुरंत आपातकालीन खिड़कियों और साइड ग्लासेज को खोलना शुरू किया और एक-एक करके खिड़कियों से बाहर सुरक्षित जमीन पर कूदना शुरू कर दिया।
स्थानीय ग्रामीणों का अदम्य साहस और युद्धस्तर पर रेस्क्यू
हादसे की जोरदार आवाज और यात्रियों की चीख-पुकार सुनकर घाट के पास मौजूद स्थानीय ढाबा संचालक, राहगीर और ग्रामीण बिना अपनी जान की परवाह किए तुरंत खाई के मुहाने पर पहुंचे। स्थानीय युवाओं ने चालक के केबिन और खिड़कियों के पास मानव श्रृंखला बनाकर बच्चों, महिलाओं और बुजुर्ग यात्रियों को एक-एक कर सुरक्षित बाहर खींचना शुरू किया।
सूचना मिलते ही चालीसगांव ग्रामीण पुलिस थाने की टीम और हाईवे पेट्रोलिंग वैन मौके पर पहुंच गई। बचाव दल ने सभी यात्रियों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। इस घटना में कुछ यात्रियों को कूदने और झटके के कारण हाथ-पैर में मामूली खरोंचें और मोच आई, जिन्हें तुरंत प्राथमिक उपचार दिया गया। सौभाग्य से किसी भी यात्री को गंभीर चोट नहीं आई और सभी की स्थिति सामान्य है। यात्रियों ने इस चमत्कारिक बचाव के लिए बस चालक प्रहलाद और स्थानीय मददगारों के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया।
राज्य परिवहन की बसों की तकनीकी फिटनेस और मेंटेनेंस पर गंभीर सवाल
इस रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना ने एक बार फिर महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (एसटी) की बसों के रख-रखाव, यांत्रिक जांच और फिटनेस ऑडिट पर बेहद गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कन्नड़ घाट, कसारा घाट और वरंधा घाट जैसे दुर्गम पहाड़ी रास्तों पर चलने वाली लंबी दूरी की बसों में तकनीकी खराबी आना सीधे तौर पर सैकड़ों यात्रियों की जान जोखिम में डालने जैसा है।
ऑटोमोबाइल और सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि स्टीयरिंग रॉड या सस्पेंशन का अचानक टूट जाना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि डिपो स्तर पर बस के नियमित निरीक्षण और मेंटेनेंस में भारी कोताही बरती गई थी। किसी भी भारी वाहन को घाटी वाले रास्तों पर भेजने से पहले उसके ब्रेकिंग सिस्टम, स्टीयरिंग लिंकेज और टायरों की गहन तकनीकी जांच अनिवार्य रूप से होनी चाहिए। स्थानीय नागरिकों और यात्री संगठनों ने मांग की है कि संबंधित डिपो मैनेजर और मैकेनिकल टीम की जवाबदेही तय करते हुए इस मामले की उच्चस्तरीय विभागीय जांच कराई जाए।
Maharashtra ST Bus Accident: पहाड़ी घाटों पर सुरक्षा दीवार और आधुनिक क्रैश बैरियर की अनिवार्यता
कन्नड़ घाट महाराष्ट्र के सबसे व्यस्त और संवेदनशील पहाड़ी मार्गों में से एक है, जहां प्रतिदिन हजारों भारी वाहन, बसें और निजी गाड़ियां गुजरती हैं। इस घटना ने यह भी साबित कर दिया है कि घाटों पर मजबूत कंक्रीट की सुरक्षा दीवारें और डब्ल्यू-बीम क्रैश बैरियर कितने जीवन-रक्षक साबित हो सकते हैं।
यदि उस विशेष मोड़ पर सुरक्षा दीवार और पेड़ मौजूद न होता, तो यह देश के सबसे दर्दनाक सड़क हादसों में बदल सकता था। लोक निर्माण विभाग (PWD) और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को चाहिए कि वे इस पूरे घाट सेक्शन का सेफ्टी ऑडिट कराएं और जहां भी सुरक्षा दीवारें टूटी या कमजोर हैं, वहां तुरंत सुदृढ़ मेटल क्रैश बैरियर और एंटी-स्किड संकेतक स्थापित करें ताकि भविष्य में तकनीकी खराबी की स्थिति में भी गाड़ियों को खाई में गिरने से रोका जा सके।
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