LPG Subsidy: 1 अक्टूबर से पहले करा लें आधार बायोमेट्रिक, वरना नहीं मिलेगी सब्सिडी

27.43 करोड़ उपभोक्ता करा चुके हैं सत्यापन, जानें मोबाइल ऐप, डिलीवरी और गैस एजेंसी से e-KYC का तरीका

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LPG Subsidy: देशभर के करोड़ों घरेलू रसोई गैस उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण विनियामक निर्देश जारी किया है। एक अक्टूबर 2026 से सब्सिडी युक्त घरेलू एलपीजी सिलेंडर प्राप्त करने के लिए उपभोक्ताओं का आधार बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि जो उपभोक्ता निर्धारित समय सीमा के भीतर यह सत्यापन प्रक्रिया पूरी नहीं कराएंगे, उन्हें नियंत्रित खुदरा दरों पर मिलने वाली सब्सिडी का वित्तीय लाभ मिलना बंद हो जाएगा। ऐसे उपभोक्ता बाजार भाव पर गैस सिलेंडर की खरीद तो जारी रख सकेंगे, किंतु सरकारी सब्सिडी की राशि उनके बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से हस्तांतरित नहीं की जाएगी।

उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 19 सितंबर 2026 तक देश में कुल 30 करोड़ 51 लाख पंजीकृत सक्रिय घरेलू एलपीजी उपभोक्ता मौजूद हैं। इनमें से 27 करोड़ 43 लाख यानी लगभग 89.9 प्रतिशत उपभोक्ता अपनी बायोमेट्रिक ई-केवाईसी प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूर्ण करा चुके हैं। शेष बचे 3 करोड़ से अधिक उपभोक्ताओं के लिए समय सीमा बेहद सीमित है, जिसके चलते उन्हें 1 अक्टूबर से पूर्व अपनी पहचान का डिजिटल सत्यापन कराना अनिवार्य होगा।

LPG Subsidy: क्यों जरूरी हुआ बायोमेट्रिक सत्यापन

सरकार द्वारा इस व्यवस्था को अनिवार्य बनाने का प्राथमिक उद्देश्य कल्याणकारी योजनाओं के दुरुपयोग पर अंकुश लगाना और सब्सिडी को शत-प्रतिशत केवल वास्तविक व पात्र परिवारों तक पहुंचाना है। पूर्व के वर्षों में एक ही नाम पर एकाधिक अवैध कनेक्शन संचालित होने, वाणिज्यिक कार्यों में घरेलू सिलेंडरों के उपयोग और सब्सिडी की लीकेज के कई मामले सामने आते रहे हैं। आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन लागू होने से प्रत्येक एलपीजी उपभोक्ता आईडी एक विशिष्ट और जीवित नागरिक की पहचान से सुरक्षित रूप से संबद्ध हो जाती है।

वर्तमान में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू सिलेंडर पर सरकार की ओर से लगभग 210 रुपये प्रति रिफिल की प्रभावी अप्रत्यक्ष वित्तीय राहत दी जा रही है। यदि कोई उपभोक्ता ई-केवाईसी नहीं कराता है, तो उसे प्रतिमाह इस आर्थिक छूट से हाथ धोना पड़ेगा। सरकार ने पहले 30 जून की समयसीमा तय की थी, जिसे उपभोक्ताओं की सुविधा को देखते हुए चरणबद्ध रूप से आगे बढ़ाया गया था। अब 1 अक्टूबर को अंतिम सीमा रेखा निर्धारित की गई है। जिन उपभोक्ताओं ने पूर्व में ही अपनी बायोमेट्रिक प्रक्रिया पूरी कर ली है, उन्हें दोबारा सत्यापन कराने की कोई आवश्यकता नहीं है; उनका नियमित गैस कोटा पूर्ववत जारी रहेगा।

प्रमाणीकरण न कराने पर क्या होगा: नॉन-केवाईसी श्रेणी में जाएंगे कनेक्शन

एक अक्टूबर के उपरांत जिन गैस कनेक्शनों का आधार बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण लंबित रहेगा, उन्हें तेल विपणन कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) के केंद्रीय डेटाबेस में ‘नॉन-केवाईसी’ (Non-KYC) श्रेणी में वर्गीकृत कर दिया जाएगा।

ऐसे उपभोक्ताओं के कनेक्शन विधिक रूप से रद्द नहीं किए जाएंगे और न ही उनके घरों में गैस आपूर्ति रोकी जाएगी। वे सामान्य बाजार दर यानी बिना सब्सिडी वाले गैर-रियायती मूल्य पर रिफिल प्राप्त करते रहेंगे। कुछ मामलों में सुरक्षा और नियामक कारणों से ऐसे खातों पर केवल 5 किलो अथवा 10 किलो के छोटे सिलेंडरों का ही विकल्प मिल सकता है। सरकार ने आश्वस्त किया है कि किसी भी वैध परिवार को ईंधन संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा, किंतु राजकोषीय राहत का हस्तांतरण केवल प्रमाणित उपयोगकर्ताओं के बैंक खातों में ही सुनिश्चित होगा।

स्मार्टफोन से घर बैठे कैसे करें आधार फेस ऑथेंटिकेशन

डिजिटल तकनीक की सहायता से उपभोक्ता बिना किसी दफ्तर या एजेंसी का चक्कर लगाए घर बैठे कुछ ही मिनटों में यह प्रक्रिया पूर्ण कर सकते हैं। इसके लिए उपभोक्ता को अपने स्मार्टफोन में अपनी संबंधित तेल कंपनी का आधिकारिक मोबाइल एप्लिकेशन और यूआईडीएआई (UIDAI) का ‘आधार फेस आरडी’ (Aadhaar FaceRD) ऐप गूगल प्ले स्टोर अथवा एप्पल ऐप स्टोर से इंस्टॉल करना होगा।

इंडेन के उपभोक्ता ‘इंडियनऑयल वन’ (IndianOil ONE), भारत गैस के ग्राहक ‘हेलो बीपीसीएल’ (Hello BPCL) और एचपी गैस के उपभोक्ता ‘एचपी पे’ (HP Pay) ऐप का उपयोग कर सकते हैं। आधार फेस आरडी ऐप बैकग्राउंड में सुरक्षित फेशियल रिकॉग्निशन इंजन के रूप में कार्य करता है।

मोबाइल ऐप खोलकर अपने गैस कनेक्शन में पंजीकृत मोबाइल नंबर के माध्यम से लॉगिन करें। इसके पश्चात मेन्यू में जाकर ‘प्रोफाइल’ अथवा ‘सर्विस’ विकल्प के अंतर्गत ‘आधार ई-केवाईसी’ या ‘बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन’ का चयन करें। स्क्रीन पर कैमरा सक्रिय होने पर चेहरे को पर्याप्त रोशनी के समक्ष रखें और ऑन-स्क्रीन निर्देशों के अनुसार पलकें झपकाएं। चेहरा सफलतापूर्वक स्कैन होते ही यूआईडीएआई प्रणाली पहचान का मिलान कर लेगी। इसके उपरांत पंजीकृत मोबाइल पर प्राप्त ओटीपी दर्ज करके सबमिट करते ही ई-केवाईसी की प्रक्रिया निःशुल्क संपन्न हो जाएगी।

माईएलपीजी वेब पोर्टल से सत्यापन का विकल्प

जो उपभोक्ता कंप्यूटर अथवा लैपटॉप का उपयोग करना चाहते हैं, उनके लिए एकीकृत आधिकारिक वेब पोर्टल ‘माईएलपीजी डॉट इन’ (myLPG.in) पर भी यह सुविधा उपलब्ध कराई गई है। पोर्टल पर पहुंचकर अपने संबंधित गैस वितरक (इंडेन, भारत गैस अथवा एचपी) के आइकन पर क्लिक करें।

इसके पश्चात 17 अंकों की एलपीजी कंज्यूमर आईडी और पंजीकृत मोबाइल नंबर के जरिए पोर्टल के यूजर डैशबोर्ड में प्रवेश करें। वहां ‘आधार सत्यापन’ अथवा ‘ई-केवाईसी सबमिशन’ अनुभाग को खोलकर अपने आवश्यक विवरणों की पुष्टि करें और ओटीपी प्रक्रिया के माध्यम से सत्यापन पूरा करें। यदि किसी उपभोक्ता के आधार रिकॉर्ड में पुराना मोबाइल नंबर दर्ज है अथवा फिंगरप्रिंट व डेमोग्राफिक डेटा मेल नहीं खा रहा है, तो ऑनलाइन प्रक्रिया में त्रुटि आ सकती है। ऐसी स्थिति में उपभोक्ता को ऑफलाइन विकल्प चुनना होगा।

सिलेंडर डिलीवरी के समय अथवा गैस एजेंसी जाकर कराएं ऑफलाइन प्रमाणीकरण

जो उपभोक्ता स्मार्टफोन या कंप्यूटर के संचालन में सहज नहीं हैं अथवा जिनका ऑनलाइन फेस ऑथेंटिकेशन किसी तकनीकी कारण से विफल हो रहा है, उनके लिए सरकार और तेल कंपनियों ने दो अत्यंत सुगम जमीनी विकल्प सुनिश्चित किए हैं।

सर्वप्रथम, जब डिलीवरी कर्मी आपके घर पर एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति करने पहुंचे, तो उपभोक्ता मौके पर ही उससे बायोमेट्रिक सत्यापन कराने का अनुरोध कर सकता है। सभी अधिकृत डिलीवरी प्रतिनिधियों को कंपनी के विशेष सॉफ्टवेयर से लैस स्मार्टफोन अथवा बायोमेट्रिक पीओएस (PoS) मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं, जहां फिंगरप्रिंट या फेस स्कैन के जरिए मौके पर ही चंद सेकंडों में सत्यापन पूरा हो जाता है। इसके अतिरिक्त उपभोक्ता अपने क्षेत्र की स्थानीय गैस एजेंसी के डिस्ट्रीब्यूटर शोरूम पर जाकर भी अपने आवश्यक दस्तावेजों के साथ फिंगरप्रिंट स्कैनर पर अंगूठा लगाकर निःशुल्क बायोमेट्रिक ई-केवाईसी दर्ज करा सकते हैं।

निष्कर्ष

घरेलू एलपीजी सब्सिडी के लिए आधार बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण को अनिवार्य बनाना सरकार के ऊर्जा क्षेत्र में पारदर्शिता और सुशासन स्थापित करने की दिशा में एक ठोस कदम है। वैश्विक स्तर पर ऊर्जा कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव और सरकारी खजाने पर बढ़ते दबाव के बीच लक्षित सब्सिडी का संरक्षण देश की आर्थिक स्थिरता के लिए अनिवार्य है। एक अक्टूबर 2026 की अंतिम समय सीमा को ध्यान में रखते हुए सभी शेष उपभोक्ताओं को विलंब किए बिना मोबाइल ऐप, डिलीवरी प्रतिनिधि अथवा स्थानीय वितरक के माध्यम से अपनी सत्यापन प्रक्रिया पूर्ण कर लेनी चाहिए, ताकि उनकी नियमित रसोई गैस आपूर्ति और सब्सिडी का निर्बाध प्रवाह बना रहे।

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