Kanpur News: 40 साल से फरार सजायाफ्ता गिरफ्तार, पहचान बदलकर ‘पागलदास बाबा’ बन जंगल में काट रहा था फरारी

10 साल की सजा पाने के बाद फरार था रामप्रकाश, बरेली के जंगल में 'पागलदास बाबा' बनकर रह रहा था

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Kanpur News: कानपुर पुलिस कमिश्नरेट ने कानून और पुलिस को चार दशकों तक चकमा देने वाले एक बेहद शातिर सजायाफ्ता अपराधी को दबोचने में बड़ी सफलता हासिल की है। लूट और जानलेवा हमले के संगीन मामले में 10 साल के कठोर कारावास की सजा पाने वाला अपराधी रामप्रकाश पिछले 40 वर्षों से फरार चल रहा था। अपनी असली पहचान छिपाकर वह बरेली के एक सुदूर गांव के बाहर घने जंगल में कुटी बनाकर ‘पागलदास बाबा’ के नाम से रह रहा था। स्थानीय स्तर पर वह बाबा के वेश में लोगों के बीच पैठ बना चुका था, लेकिन पुलिस की लंबी तकनीकी व जमीनी पड़ताल के बाद रविवार को उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

Kanpur News: 1984 का लूट व जानलेवा हमला कांड और 10 साल की सजा

इस पूरे मामले की जड़ें वर्ष 1984 में दर्ज एक गंभीर वारदात से जुड़ी हैं। कानपुर के फजलगंज थाना क्षेत्र में लूट और हत्या के प्रयास का एक मुकदमा दर्ज हुआ था, जिसमें तत्कालीन काकादेव क्षेत्र के पते पर रहने वाले रामप्रकाश को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा था। फजलगंज थाने में उसके खिलाफ आपराधिक इतिहास से जुड़े दो अन्य मुकदमे भी दर्ज थे।
मामले की सुनवाई के बाद वर्ष 1986 में सेशन कोर्ट ने रामप्रकाश को दोषी करार देते हुए 10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी। सजा सुनाए जाने के बाद अभियुक्त ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, जहां से उसे अपील लंबित रहने के दौरान अंतरिम जमानत मिल गई। जेल से रिहा होते ही उसने ऐसा भूमिगत होने का रास्ता चुना कि अगले चार दशकों तक पुलिस उसकी परछाई तक नहीं पहुंच सकी।

फर्जी पते और झूठे जमानतदारों के सहारे पुलिस को दिया चकमा

जमानत मिलने के बाद रामप्रकाश ने कानून से बचने के लिए बेहद सुनियोजित चाल चली थी। जांच में सामने आया कि उसने अदालत में जमानत के कागजात दाखिल करते समय अपना आवासीय पता फर्जी दर्ज कराया था। इतना ही नहीं, उसके पक्ष में खड़े होने वाले जमानतदारों के नाम और पते भी पूरी तरह फर्जी पाए गए।
जब उच्च न्यायालय में उसकी अपील खारिज हुई और उसे शेष सजा काटने के लिए आत्मसमर्पण करने का आदेश जारी हुआ, तो वह कभी वापस नहीं लौटा। जब-जब पुलिस उसके दिए गए पते पर वारंट तामील कराने पहुंची, वहां उसका कोई नामोनिशान नहीं मिला। जमानतदारों के पते भी फर्जी होने के कारण पुलिस के हाथ पूरी तरह खाली रह जाते थे।

हाई कोर्ट की सख्ती के बाद कन्नौज से लेकर बरेली तक खाक छानी

करीब छह महीने पहले उच्च न्यायालय ने दशकों पुराने इस लंबित मामले में फरार सजायाफ्ता को हर हाल में गिरफ्तार करने के कड़े निर्देश जारी किए। इसके बाद कानपुर पुलिस की विशेष टीम ने पुराने अभिलेखों की धूल झाड़ते हुए नए सिरे से सुराग तलाशना शुरू किया।
पड़ताल के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि रामप्रकाश मूल रूप से कन्नौज जनपद के गुरसहायगंज क्षेत्र का रहने वाला था। पुलिस टीम ने गुरसहायगंज के गांवों में करीब दो महीने तक सादे कपड़ों में रहकर जानकारियां जुटाईं। इसी बीच एक पूर्व ग्राम प्रधान से अहम सुराग मिला कि कई दशक पहले गांव छोड़कर भागा रामप्रकाश साधु का चोला पहन चुका है और बरेली के जंगलों में कहीं डेरा जमाए हुए है।

जंगल की कुटी में ‘पागलदास बाबा’ बनकर बना चुका था प्रभाव

सुराग मिलते ही पुलिस ने उसके दूर के परिजनों और परिचितों के मोबाइल नेटवर्क को सर्विलांस पर लिया। इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और मुखबिर तंत्र की मदद से पुलिस की लोकेशन बरेली के गजनेरा गांव के बाहरी जंगलों में केंद्रित हुई। जब पुलिस टीम ने वहां जाल बिछाया, तो पता चला कि 70 वर्षीय बुजुर्ग रामप्रकाश जंगल के किनारे बनी एक कुटी में ‘पागलदास बाबा’ के नाम से रह रहा था।
आसपास के ग्रामीणों के बीच वह लंबे समय से धार्मिक अनुष्ठान और बाबा की भूमिका में था और किसी को भी उसके आपराधिक अतीत की भनक तक नहीं थी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपी कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से भी ग्रसित पाया गया है। रविवार को घेराबंदी कर पुलिस ने उसे दबोच लिया।

Kanpur News: चार दशक बाद आखिरकार कानून के शिकंजे में आया मुजरिम

वर्ष 1984 से 2026 तक यानी 40 वर्षों से अधिक समय तक कानून की आंखों में धूल झोंकने वाला रामप्रकाश आखिरकार पुलिस की गिरफ्त में आ गया। कागजों में मरा मान लिया गया या लापता समझा जाने वाला यह सजायाफ्ता अब अपनी बची हुई सजा काटने के लिए सलाखों के पीछे भेजा जाएगा। कानपुर पुलिस ने विधिक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उसे अदालत में पेश कर जेल भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

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