Rahul Gandhi Protest: राहुल गांधी के धरने पर जेपी नड्डा का तीखा हमला, बोले- न्याय से कोई वास्ता नहीं, यह सिर्फ ‘कैमरा-सेंट्रिक ड्रामा’ है

Rahul Gandhi Protest: राहुल गांधी के धरने पर जेपी नड्डा का तीखा हमला, बोले- न्याय से कोई वास्ता नहीं, यह सिर्फ ‘कैमरा-सेंट्रिक ड्रामा’ है

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Rahul Gandhi Protest: भारतीय राजनीति में एक बार फिर तीखी बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है। केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता जेपी नड्डा ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी द्वारा संसद मार्ग थाने के बाहर दिए गए धरने को लेकर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने इस प्रदर्शन को ‘कैमरा-सेंट्रिक ड्रामा’ करार देते हुए कहा कि इसका वास्तविकता में न्याय की मांग या किसी जनहित के मुद्दे से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है। नड्डा का यह बयान ऐसे समय में आया है जब राजधानी दिल्ली में राजनीतिक हलचल काफी तेज है और दोनों दलों के बीच लगातार जुबानी जंग जारी है।
राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि जब देश की सर्वोच्च अदालत पहले ही इस मामले का संज्ञान ले चुकी है और जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति भी गठित कर चुकी है, तब इस तरह के प्रदर्शनों का क्या औचित्य रह जाता है। सत्ता पक्ष लगातार यह आरोप लगा रहा है कि विपक्ष गंभीर मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय केवल मीडिया की सुर्खियों में बने रहने के लिए प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शनों का सहारा ले रहा है।

Rahul Gandhi Protest: न्यायिक प्रक्रिया के बीच सड़क पर प्रदर्शन का औचित्य क्या है?

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने राहुल गांधी के विरोध प्रदर्शन पर सवाल उठाते हुए मुख्य रूप से इस बात पर जोर दिया कि जब एक निश्चित घटना को लेकर सुप्रीम कोर्ट खुद सक्रिय हो चुका है, तो इस तरह सड़कों पर उतरने का क्या मतलब है। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि संबंधित घटना का संज्ञान लेते हुए अदालत ने एक पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय हाई-पावर्ड कमेटी का गठन किया है, जो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर रही है।
जब देश की सबसे बड़ी अदालत के स्तर पर न्याय की प्रक्रिया पूरी गंभीरता से आगे बढ़ रही है, ऐसे में पुलिस थाने के बाहर कैमरों के सामने बैठकर विरोध जताना न्यायपालिका की कार्यप्रणाली पर अप्रत्यक्ष सवालिया निशान खड़े करता है। जेपी नड्डा ने सीधे तौर पर यह सवाल उठाया कि क्या विपक्ष के इन बड़े नेताओं को देश की न्यायपालिका और उसकी जांच समितियों पर भरोसा नहीं है?

राजनीतिक हताशा और सुर्खियों में बने रहने की कोशिश

अपने तीखे हमले को जारी रखते हुए जेपी नड्डा ने इसे कांग्रेस पार्टी की राजनीतिक हताशा का स्पष्ट प्रमाण बताया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह पूरा आयोजन न तो किसी छात्र हित के लिए है और न ही आम जनता के अधिकारों की रक्षा से जुड़ा है। इसका एकमात्र उद्देश्य राहुल गांधी को लगातार मीडिया की सुर्खियों में बनाए रखना और राजनीतिक जमीन तलाशना है।
भाजपा नेताओं का यह भी मानना है कि कांग्रेस पार्टी अपनी आंतरिक राजनीतिक असहजताओं को छिपाने के लिए ऐसे ड्रामे रचती है। जब भी पार्टी किसी बड़े वैचारिक या राजनीतिक संकट से घिरती है, तो जनता का ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के हथकंडों का इस्तेमाल किया जाता है। जनता अब इन राजनीतिक तौर-तरीकों को अच्छी तरह समझने लगी है और इस तरह के प्रदर्शनों से जमीन पर कोई बड़ा बदलाव आने वाला नहीं है।

Rahul Gandhi Protest: वंदे मातरम् विवाद और अन्य मुद्दों से ध्यान भटकाने की रणनीति

इस पूरे घटनाक्रम के पीछे एक अन्य बड़े विवाद का भी जिक्र किया जा रहा है। जेपी नड्डा ने राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ और तिरंगे के कथित अपमान से जुड़े मामलों का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी इन दिनों देश भर में तीखी आलोचनाओं का सामना कर रही है। उनका दावा है कि इन गंभीर विषयों पर जनता के तीखे सवालों से बचने और अपनी किरकिरी को छुपाने के लिए ही यह नया राजनीतिक नौटंकी शुरू की गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का भी यह मानना है कि जब मुख्यधारा के मुद्दों पर विपक्षी दल घिर जाते हैं, तो वे अक्सर ऐसे प्रतीकात्मक धरने-प्रदर्शनों का सहारा लेते हैं ताकि मीडिया का फोकस बदल सके। हालांकि, इस तरह की रणनीतियों से राजनीतिक दलों को कितना फायदा मिलता है, यह तो आने वाला वक्त ही तय करेगा, लेकिन फिलहाल सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच का यह संघर्ष और अधिक तीव्र होता नजर आ रहा है।
देश की राजनीति में विरोध प्रदर्शन करना विपक्ष का लोकतांत्रिक अधिकार माना जाता है, लेकिन जब मामला न्यायिक जांच के दायरे में हो, तो परिपक्व राजनीति की मांग यही होती है कि कानून अपना काम करे। जेपी नड्डा के इन बयानों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि आने वाले दिनों में संसद से लेकर सड़क तक सियासी पारा और अधिक चढ़ने वाला है। जनता और राजनीतिक दलों के बीच चल रही यह खींचतान भारतीय लोकतंत्र के वर्तमान परिदृश्य को गहराई से प्रभावित कर रही है। मामले की आगे की राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और घटनाक्रम अभी सामने आने बाकी हैं, जिन पर हर किसी की पैनी नजर बनी हुई है।

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