Indian Samosa History: आपका फेवरेट समोसा निकला विदेशी, मध्य पूर्व से भारत तक का सफर है बेहद दिलचस्प

Indian Samosa History: आपका फेवरेट समोसा निकला विदेशी! मध्य पूर्व से भारत तक का सफर है बेहद दिलचस्प

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Indian Samosa History: शाम की चाय और उसके साथ गरमा-गरम समोसा, यह मेल भारतीयों के लिए किसी उत्सव से कम नहीं है। बारिश का मौसम हो या दफ्तर की छोटी सी पार्टी, समोसे की मौजूदगी माहौल को खुशनुमा बना देती है। हरी चटनी और मीठी सौंठ के साथ परोसा गया यह तिकोना स्नैक आज हमारी संस्कृति का अहम हिस्सा बन चुका है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस समोसे को हम पूरी तरह से देसी मानते हैं, वह असल में भारतीय मूल का है ही नहीं? इसका इतिहास सदियों पुराना है और यह हजारों मील दूर मध्य पूर्व के देशों से चलकर भारत पहुंचा है।

Indian Samosa History: समोसे का जन्मस्थान और प्राचीन इतिहास

इतिहासकारों और खानपान के जानकारों की मानें तो समोसे का सबसे पहला जिक्र 11वीं शताब्दी के फारसी साहित्य में मिलता है। उस दौर में इसे समोसा नहीं बल्कि ‘संबुसक’ कहा जाता था। इसका जन्म ईरान, इराक या मिस्र जैसे मध्य पूर्व के इलाकों में हुआ था। शुरुआत में इसका आकार आज के समोसे जैसा ही तिकोना था, लेकिन इसके अंदर की सामग्री आज से बिल्कुल अलग थी। फारस के शाही दरबारों में इसे बेहद खास स्नैक माना जाता था। उस समय मैदे की पतली परत के भीतर कीमा, ड्राई फ्रूट्स, प्याज और विभिन्न मसालों का मिश्रण भरा जाता था और फिर इसे ओवन या आग पर बेक किया जाता था।

समोसे की एक बड़ी खूबी यह थी कि यह जल्दी खराब नहीं होता था। यही कारण था कि सिल्क रूट से गुजरने वाले व्यापारी अपने लंबे सफर के दौरान इसे अपने साथ पोटली में रखकर ले जाते थे। यही वे व्यापारी थे जिन्होंने समोसे को दुनिया के अलग-अलग कोनों तक पहुंचाया और इसी प्रक्रिया में समोसा हिंदुस्तान की सरजमीं पर भी पहुंचा।

हिंदुस्तान में समोसे का आगमन

भारत में समोसे का आगमन 13वीं और 14वीं शताब्दी के आसपास माना जाता है। उस दौर में मध्य एशिया के व्यापारी, सूफी संत और सुल्तान सिल्क रूट के माध्यम से भारत आए थे। मशहूर इतिहासकार और कवि अमीर खुसरो की रचनाओं में इस बात का जिक्र मिलता है कि दिल्ली के सुल्तानों के दरबार में समोसा परोसा जाता था। इब्न बतूता के यात्रा वृत्तांतों में भी शाही दावतों में परोसे जाने वाले इस स्नैक का उल्लेख है। उस समय तक भारत में भी यह कीमा, मसाले और ड्राई फ्रूट्स भरकर ही बनाया जाता था और इसे काफी शाही भोजन माना जाता था।

Indian Samosa History: जब आलू ने समोसे को दिया नया रूप

अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर समोसे के अंदर आलू कैसे आया, जो आज इसकी पहचान बन चुका है? दरअसल, आलू भी मूल रूप से भारतीय नहीं है। 17वीं शताब्दी में पुर्तगाली व्यापारी जब भारत आए, तो वे अपने साथ आलू की फसल लेकर आए थे। हालांकि, आलू का व्यापक उपयोग और हमारे भोजन में इसका शामिल होना ब्रिटिश शासन के दौरान शुरू हुआ।

जब आलू भारत के हर रसोई घर का हिस्सा बन गया, तब समोसे की रेसिपी में भी बड़ा बदलाव आया। कीमा की जगह उबले हुए आलू, मटर और देसी मसालों ने ले ली। भारतीयों ने अपनी पसंद के अनुसार इसमें तड़का लगाया और इसे डीप फ्राई करना शुरू किया। इस तरह समोसा एक ऐसे रूप में ढल गया जो हर भारतीय को अपना सा लगने लगा। आज जो आलू वाला समोसा हम नुक्कड़ की दुकानों पर देखते हैं, वह इसी सांस्कृतिक मिलन का परिणाम है।

Indian Samosa History: बदलते दौर में समोसे की लोकप्रियता

समोसा केवल एक नाश्ता नहीं बल्कि भारत की विविधता का प्रतीक बन चुका है। आज उत्तर भारत में जहां यह आलू के मसाले के साथ मशहूर है, वहीं देश के अलग-अलग हिस्सों में इसके कई रूप मिलते हैं। कहीं इसमें पनीर भरा जाता है, तो कहीं नूडल्स या मशरूम। समोसे की सबसे बड़ी ताकत उसकी लचीलापन है। यह हर स्वाद के साथ ढल जाता है।

आज के समय में चाहे मॉल हो या कोई महंगा रेस्टोरेंट, समोसे का जलवा बरकरार है। विदेशी मूल का होने के बावजूद इसने जिस तरह से भारत के जन-जीवन में अपनी जगह बनाई है, वह अपने आप में एक मिसाल है। यह कहानी हमें सिखाती है कि कैसे अलग-अलग संस्कृतियों का संगम नई चीजों को जन्म देता है, जो वक्त के साथ और भी बेहतर होती जाती हैं। तो अगली बार जब आप समोसे का लुत्फ उठाएं, तो याद रखें कि आप सिर्फ एक स्नैक नहीं, बल्कि इतिहास का एक छोटा सा हिस्सा खा रहे हैं।

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