Overtime Pay Rules 2026: 8 घंटे से ज्यादा काम करने पर क्या मिलेगा दोगुना पैसा? सरकार ने साफ किया पूरा नियम

Overtime Pay Rules 2026: 8 घंटे से ज्यादा काम करने पर क्या मिलेगा दोगुना पैसा? सरकार ने साफ किया पूरा नियम

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Overtime Pay Rules 2026: केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बीच इन दिनों Overtime Pay Rules 2026 को लेकर तमाम तरह की चर्चाएं चल रही हैं, खासकर जब से नए लेबर कानूनों में अतिरिक्त काम के लिए दोगुनी दर का प्रावधान सामने आया है। नए Code on Wages के तहत सामान्य काम के घंटों से अधिक कार्य करने पर कम से कम सामान्य वेतन की दोगुनी दर से भुगतान का नियम तय किया गया है। इस प्रावधान के सामने आने के बाद कई केंद्रीय कर्मचारियों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या अब उन्हें भी अपनी अतिरिक्त ड्यूटी के लिए दोगुना पैसा मिलना शुरू हो जाएगा। हालांकि, हाल ही में लोकसभा में सरकार द्वारा दिए गए आधिकारिक जवाब ने इस पर स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि कानून में प्रावधान होने के बावजूद केंद्रीय कर्मचारियों का Overtime Allowance अपने आप दोगुना नहीं हो गया है और इसके लिए मौजूदा सेवा नियमों का पालन करना अनिवार्य है।

Overtime Pay Rules 2026: क्या कहता है नया Code on Wages और ओवरटाइम का प्रावधान

श्रम कानूनों में किए गए बदलावों के तहत Code on Wages की धारा 14 में यह स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि यदि किसी कर्मचारी से निर्धारित सामान्य घंटों से अधिक काम कराया जाता है, तो उसे कम से कम सामान्य मजदूरी की दोगुनी दर से भुगतान मिलना चाहिए। लेबर मिनिस्ट्री की कंप्लायंस हैंडबुक में भी काम के घंटे और अतिरिक्त परिश्रम से जुड़े इन नियमों को प्रमुखता से शामिल किया गया है। लेकिन, इस सामान्य कानूनी प्रावधान को सीधे तौर पर केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के मौजूदा वेतन ढांचे या भत्तों में बदलाव के रूप में नहीं देखा जा सकता। केंद्रीय कर्मचारियों के लिए भत्ते और अन्य वित्तीय लाभ सीधे तौर पर अलग-अलग सेवा नियमों, प्रशासनिक आदेशों और वेतन आयोग की सिफारिशों के दायरे में आते हैं। यही कारण है कि कानून में दोगुनी दर होने के बावजूद कर्मचारियों को मिलने वाला Overtime Allowance अपने आप संशोधित नहीं हुआ है।

लोकसभा में सरकार ने क्या दी है आधिकारिक जानकारी

संसद के सत्र के दौरान लोकसभा में केंद्र सरकार से यह सवाल पूछा गया था कि क्या नए लेबर कोड के लागू होने के बाद केंद्रीय कर्मचारियों के Overtime Allowance में किसी प्रकार का बदलाव किया गया है। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट करने को कहा गया था कि क्या वर्तमान व्यवस्था में इस लाभ से बाहर रखे गए राजपत्रित अधिकारियों को भी इसका दायरा बढ़ाया जा सकता है। सरकार की तरफ से लिखित जवाब देते हुए यह साफ कर दिया गया कि पात्र नॉन-गजेटेड केंद्रीय कर्मचारियों के लिए मिलने वाला यह भत्ता अभी भी पुराने और निर्धारित प्रशासनिक आदेशों के अनुसार ही संचालित होता है। इसका मतलब यह है कि केवल कानून बन जाने मात्र से कर्मचारियों को मिलने वाले भत्तों में रातोरात कोई स्वतः बढ़ोतरी नहीं हो जाती है, जब तक कि इसके लिए अलग से कोई आधिकारिक सरकारी आदेश जारी न किया जाए।

पुराने सरकारी आदेशों और नियमों से तय होती है पात्रता

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए प्रति घंटे मिलने वाले इस भत्ते की दरों का मौजूदा ढांचा काफी पुराना है और यह मुख्य रूप से 19 मार्च 1991 को जारी किए गए एक महत्वपूर्ण कार्यालय ज्ञापन पर आधारित है। उस समय तय किए गए नियमों के अनुसार ही कर्मचारियों को अतिरिक्त कार्य के बदले भुगतान या कुछ विशेष परिस्थितियों में प्रतिकर अवकाश यानी कंपनसेटरी लीव का प्रावधान मिलता है। सरकारी व्यवस्थाओं में इस तरह के भत्तों को सामान्य कार्य संस्कृति का हिस्सा बनाने के बजाय केवल आपातकालीन या वास्तविक कार्य आवश्यकता के समय ही उपयोग करने की सलाह दी जाती है। इसके लिए सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति होना भी अनिवार्य होता है, जिसका अर्थ यह है कि केवल कार्यालय में अधिक देर तक रुक जाने भर से किसी भी कर्मचारी का इस भत्ते पर कानूनी अधिकार स्वतः नहीं बन जाता है।

Overtime Pay Rules 2026: नॉन-गजेटेड कर्मचारियों के लिए क्या है वर्तमान स्थिति

देश के विभिन्न विभागों में सेवारत पात्र नॉन-गजेटेड केंद्रीय कर्मचारियों को यह समझना होगा कि नए लेबर कोड के आने के बावजूद उनके वित्तीय लाभों में कोई स्वचालित बदलाव नहीं हुआ है। यदि कोई कर्मचारी ऐसे पद पर कार्य कर रहा है जो प्रशासनिक नियमों के तहत इस भत्ते की पात्रता सूची में आता है, तो उसे भुगतान मौजूदा सेवा शर्तों के आधार पर ही मिलेगा। कर्मचारी को सबसे पहले यह सुनिश्चित करना होता है कि उसका विशिष्ट पद इस सुविधा के दायरे में आता है या नहीं, और क्या उस अतिरिक्त कार्य के लिए उचित माध्यम से अनुमति ली गई थी या नहीं। इसलिए किसी भी प्रकार की भ्रामक खबरों या सोशल मीडिया संदेशों पर भरोसा करने के बजाय प्रशासनिक नियमों का पालन करना ही एकमात्र सही मार्ग है।

Overtime Pay Rules 2026: गजेटेड कर्मचारियों के दायरे में बदलाव को लेकर स्थिति साफ

पारंपरिक प्रशासनिक व्यवस्था के तहत गजेटेड यानी राजपत्रित अधिकारियों को इस प्रकार के भत्तों के दायरे से बाहर रखा गया है। संसद में जब यह सवाल उठाया गया कि क्या इन अधिकारियों को भी अतिरिक्त काम के बदले यह वित्तीय लाभ दिया जाना चाहिए, तो सरकार की तरफ से ऐसा कोई नया निर्णय घोषित नहीं किया गया। इसका मतलब यह है कि राजपत्रित श्रेणी के अधिकारी केवल वैधानिक धाराओं का हवाला देकर इस भत्ते की मांग नहीं कर सकते हैं। यदि भविष्य में सरकार इन नियमों में कोई व्यापक संशोधन करती है या नए वर्गों को इसके भीतर शामिल करती है, तो उसके लिए एक अलग और स्पष्ट सरकारी अधिसूचना जारी करनी होगी, तभी उसका क्रियान्वयन संभव हो पाएगा।

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