IIP August 2026: अगस्त में औद्योगिक उत्पादन की रफ्तार बढ़ी, 8% पर पहुंची ग्रोथ

अगस्त में मैन्युफैक्चरिंग 9% और बिजली क्षेत्र 12.3% बढ़ा, कैपिटल गुड्स में भी तेज वृद्धि

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IIP August 2026: चालू वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था और औद्योगिक जगत के लिए उत्साहजनक समाचार सामने आया है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा सोमवार को जारी त्वरित अनुमानों (Quick Estimates) के अनुसार, अगस्त 2026 में देश का औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (Index of Industrial Production – IIP) सालाना आधार पर 8 प्रतिशत की मजबूत दर से बढ़ा। इससे पूर्व जुलाई माह में औद्योगिक उत्पादन की संशोधित वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत दर्ज की गई थी। इस प्रकार अगस्त में देश के कल-कारखानों और बुनियादी उद्योगों की गतिविधियों में जुलाई की तुलना में और अधिक गतिशीलता देखने को मिली है।

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2026 में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक 123.3 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि ठीक एक वर्ष पूर्व अगस्त 2025 में यह 114.2 पर था। चालू वित्त वर्ष की संचयी स्थिति पर दृष्टि डालें तो अप्रैल से अगस्त 2026 के पांच महीनों में कुल औद्योगिक वृद्धि 6.7 प्रतिशत रही है, जो पिछले वित्त वर्ष की इसी समान अवधि के 4.2 प्रतिशत के मुकाबले काफी मजबूत आधार प्रस्तुत करती है।

IIP August 2026: 23 में से 18 उद्योग समूहों में बढ़त

आईआईपी बास्केट में लगभग 76 प्रतिशत का विशाल भारांक (Weightage) रखने वाले विनिर्माण (Manufacturing) क्षेत्र ने अगस्त माह में शानदार प्रदर्शन किया। विनिर्माण उत्पादन में सालाना आधार पर 9 प्रतिशत की जोरदार वृद्धि दर्ज की गई, जो जुलाई की 8.2 प्रतिशत की वृद्धि से अधिक है। यह लगातार तीसरा ऐसा महीना रहा जब देश के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने 8 प्रतिशत या उससे अधिक की वार्षिक विस्तार दर हासिल की है।

आंकड़ों की सूक्ष्म पड़ताल से स्पष्ट होता है कि यह वृद्धि कुछ गिने-चुने क्षेत्रों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसका दायरा व्यापक रहा। मंत्रालय द्वारा ट्रैक किए जाने वाले 23 प्रमुख विनिर्माण उद्योग समूहों में से 18 समूहों ने पिछले वर्ष के समान माह की तुलना में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की। इस व्यापक सुधार ने यह सिद्ध किया है कि घरेलू खपत और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की मांग ने फैक्ट्रियों में उत्पादन चक्र को सक्रिय बनाए रखा है।

इलेक्ट्रिकल उपकरण और ऑटो सेक्टर की रिकॉर्ड छलांग

अगस्त माह के दौरान विनिर्माण क्षेत्र के भीतर सर्वाधिक तीव्र गति से बढ़ने वाले क्षेत्रों में इलेक्ट्रिकल उपकरण (Electrical Equipment) उद्योग सबसे आगे रहा। इस श्रेणी में सालाना आधार पर 30.9 प्रतिशत का भारी उछाल दर्ज किया गया, जिसमें सर्किट ब्रेकर, स्विचगियर, कंट्रोल पैनल, अनइंटरप्टिबल पावर सप्लाई (UPS), सॉलिड-स्टेट ड्राइव्स (SSD) और ऑप्टिकल फाइबर केबलों के उत्पादन ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।

इसके साथ ही ऑटोमोबाइल और परिवहन क्षेत्र ने भी अपनी तेज रफ्तार बरकरार रखी। मोटर वाहन, ट्रेलर और सेमी-ट्रेलर्स के उत्पादन में 25.2 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जबकि अन्य परिवहन उपकरणों के उत्पादन में 25.3 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि हुई। आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए यात्री कारों, वाणिज्यिक वाहनों और ऑटो कंपोनेंट निर्माताओं द्वारा डीलरों को भेजी जाने वाली इन्वेंट्री और असेंबली लाइनों के विस्तार ने इस वृद्धि को ठोस आधार प्रदान किया।

रबर, इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक्सटाइल में भी बेहतर प्रदर्शन

अन्य प्रमुख औद्योगिक श्रेणियों में भी अगस्त के आंकड़े सकारात्मक रहे। रबर और प्लास्टिक उत्पादों के निर्माण में 21.4 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई, जबकि कंप्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑप्टिकल उत्पादों की श्रेणी में 19.3 प्रतिशत का सुधार दर्ज हुआ। इसके अतिरिक्त फैब्रिकेटेड मेटल उत्पादों में 16.9 प्रतिशत, पेय पदार्थ (Beverages) उद्योग में 18.3 प्रतिशत, टेक्सटाइल निर्माण में 13.1 प्रतिशत और मशीनरी व उपकरण खंड में 10.3 प्रतिशत का विस्तार हुआ।

फर्नीचर उत्पादन में 9.4 प्रतिशत और चमड़ा उत्पादों में 8.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, सभी क्षेत्रों में परिस्थितियां एक जैसी नहीं रहीं। 23 में से 5 उद्योग समूहों में उत्पादन में संकुचन देखा गया। तंबाकू उत्पादों में 8 प्रतिशत, परिधान (Wearing Apparel) में 7.4 प्रतिशत, फार्मास्युटिकल उत्पादों में 1.6 प्रतिशत, कोक व रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों में 0.6 प्रतिशत और केमिकल्स में 0.5 प्रतिशत की मामूली गिरावट दर्ज की गई।

बिजली उत्पादन में 12.3% का उछाल, लेकिन खनन क्षेत्र फिसला

अगस्त के औद्योगिक आंकड़ों का दूसरा सबसे मजबूत स्तंभ बिजली और गैस आपूर्ति क्षेत्र रहा। इस खंड ने सालाना आधार पर 12.3 प्रतिशत की दोहरे अंकों की वृद्धि दर्ज की, जबकि जुलाई में यह आंकड़ा 8.7 प्रतिशत था। बिजली उत्पादन में कुल 13.3 प्रतिशत का विस्तार हुआ, जिसमें हरित ऊर्जा यानी नवीकरणीय स्रोतों (सौर और पवन ऊर्जा) से विद्युत उत्पादन में 15.4 प्रतिशत तथा पारंपरिक स्रोतों से उत्पादन में 12.3 प्रतिशत का उछाल आया। गैस आपूर्ति में 2.4 प्रतिशत की सुस्ती के बावजूद कुल बिजली उत्पादन ने इस पूरे क्षेत्र के प्रदर्शन को नई ऊंचाई दी।

इसके विपरीत, खनन एवं उत्खनन (Mining & Quarrying) क्षेत्र अगस्त माह के औद्योगिक आंकड़ों का सबसे कमजोर पहलू साबित हुआ। अगस्त में खनन उत्पादन में सालाना आधार पर 5.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि जुलाई में इसमें 0.9 प्रतिशत की कमी आई थी। भारी मानसूनी वर्षा के कारण खदानों में जलभराव से ईंधन खनिजों के खनन में 5.7 प्रतिशत और गैर-धात्विक खनिजों में 12.8 प्रतिशत का संकुचन हुआ, यद्यपि धात्विक खनिजों के उत्पादन में 5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

उपयोग आधारित वर्गीकरण: कैपिटल गुड्स और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स मजबूत

औद्योगिक उत्पादन के उपयोग-आधारित वर्गीकरण (Use-based Classification) के आंकड़े भी निवेश और मांग की एक सकारात्मक तस्वीर प्रस्तुत करते हैं। नई उत्पादन क्षमता और औद्योगिक मशीनरी में निवेश का पैमाना माने जाने वाले ‘कैपिटल गुड्स’ (पूंजीगत वस्तुएं) के उत्पादन में अगस्त माह में 16.9 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई। वहीं विनिर्माण प्रक्रियाओं में कच्चे माल के रूप में काम आने वाली ‘इंटरमीडिएट गुड्स’ में 13.7 प्रतिशत का विस्तार हुआ, जो जुलाई के 10.4 प्रतिशत से कहीं अधिक है।

टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं यानी ‘कंज्यूमर ड्यूरेबल्स’ (जैसे रेफ्रिजरेटर, टीवी, वाशिंग मशीन आदि) के उत्पादन में 11.1 प्रतिशत की दोहरे अंक की वृद्धि दर्ज की गई, जो शहरी उपभोक्ताओं की मजबूत खरीद क्षमता को दर्शाती है। हालांकि, दैनिक उपभोग की वस्तुओं यानी ‘कंज्यूमर नॉन-ड्यूरेबल्स’ (एफएमसीजी उत्पाद) में उत्पादन वृद्धि मात्र 2.1 प्रतिशत पर सिमटी रही, जो ग्रामीण व गैर-टिकाऊ मांग में अपेक्षाकृत सुस्त सुधार की ओर इशारा करती है। इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन गुड्स में 6.4 प्रतिशत तथा प्राइमरी गुड्स में 3.5 प्रतिशत का विस्तार दर्ज हुआ।

IIP August 2026: त्योहारी मांग तय करेगी भावी औद्योगिक दिशा

अगस्त 2026 के IIP आंकड़े यह स्पष्ट रूप से रेखांकित करते हैं कि देश का विनिर्माण ढांचा और बुनियादी ढांचा विस्तार मजबूत गति पकड़ चुका है। अप्रैल से अगस्त तक की 6.7 प्रतिशत की संचयी वृद्धि चालू वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की मजबूत वृद्धि का स्पष्ट आधार तैयार कर रही है।

आगामी महीनों में दुर्गा पूजा, दशहरा और दीपावली जैसे प्रमुख त्योहारों के आगमन से खुदरा मांग में भारी उछाल आने की संभावना है। यदि ग्रामीण मांग में सुधार के चलते कंज्यूमर नॉन-ड्यूरेबल्स में तेजी लौटती है और मानसून की विदाई के बाद खनन गतिविधियों में सुधार होता है, तो चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में भारतीय औद्योगिक उत्पादन नए रिकॉर्ड स्तरों को छूने में सक्षम होगा।

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