RERA Act: RERA के पास कितनी ताकत? बिल्डरों के खिलाफ क्या कर सकता है और क्या नहीं, जानें पूरी डिटेल

बिल्डरों पर जुर्माना, प्रोजेक्ट रद्द और खरीदारों को राहत, लेकिन कुछ मामलों में सीमित अधिकार

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RERA Act: रियल एस्टेट सेक्टर में घर खरीदारों की सुरक्षा के लिए 2017 में रेरा (RERA) कानून लागू किया गया था। Real Estate Regulatory Authority का गठन मुख्य रूप से पारदर्शिता लाने और बिल्डरों की मनमानी को रोकने के उद्देश्य से हुआ था। लेकिन आज के समय में कई बार यह गंभीर सवाल उठता है कि रेरा के पास असल में कितनी ताकत है और इसकी कानूनी सीमाएं क्या हैं। रेरा नियम तोड़ने वाले बिल्डरों पर भारी जुर्माना लगा सकता है, प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन रद्द कर सकता है और परेशान खरीदारों को उचित मुआवजा दिला सकता है। लेकिन इसके प्रशासनिक अधिकार कई मामलों में सीमित भी हैं, जैसे कि छोटे प्रोजेक्ट्स में यह दखल नहीं दे सकता, सीधे तौर पर गिरफ्तारी नहीं कर सकता और लोकल अथॉरिटी के काम में हस्तक्षेप करने की शक्ति इसके पास नहीं है।

RERA क्या-क्या कर सकता है, जांच के अधिकार और एस्क्रो अकाउंट की पूरी निगरानी

रेरा के पास नियमों के किसी भी प्रकार के उल्लंघन पर स्वत: संज्ञान लेकर या शिकायत के आधार पर व्यापक जांच शुरू करने का पूरा कानूनी अधिकार है। प्राधिकरण दोषी पाए जाने पर बिल्डर के प्रोजेक्ट की मार्केटिंग, विज्ञापन या बुकिंग बिक्री पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा सकता है। इसके अलावा रेरा को संबंधित प्रोजेक्ट की कुल अनुमानित लागत का 5 से लेकर 10 प्रतिशत तक का भारी वित्तीय जुर्माना लगाने की विशेष शक्ति प्राप्त है। यदि किसी प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन रद्द किया जाता है, तो रेरा उस अधूरे प्रोजेक्ट को पूरा कराने के लिए किसी नई एजेंसी को काम सौंप सकता है। यह प्राधिकरण एस्क्रो (Escrow) अकाउंट में रखे जाने वाले 70 प्रतिशत पैसे की कड़ी निगरानी करता है ताकि फंड का डाइवर्जन न हो सके और समय पर कब्जा न देने की स्थिति में खरीदार को ब्याज समेत पूरी रकम वापस दिला सकता है।

RERA की सीमाएं, सीधे तौर पर गिरफ्तारी की कमी और अपीलीय ट्रिब्यूनल का रास्ता

तमाम शक्तियों के बावजूद रेरा के पास किसी दोषी बिल्डर को सीधे गिरफ्तार करने या जेल भेजने का अधिकार नहीं है। इसके आदेशों का पालन कराने या गिरफ्तारी के लिए प्राधिकरण को अंततः स्थानीय पुलिस या दीवानी कोर्ट का सहारा लेना पड़ता है। रेरा द्वारा दिए गए किसी भी फैसले के खिलाफ पीड़ित पक्ष अपीलीय ट्रिब्यूनल, हाईकोर्ट और अंत में सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर कर सकता है, जिससे कई बार मामलों के निपटारे में लंबा समय लग जाता है।

छोटे प्रोजेक्ट्स की कानूनी सीमा और लोकल अथॉरिटीज के कामकाज में दखल न देने का नियम

रेरा कानून के मुताबिक 500 स्क्वायर मीटर से छोटे भूखंड वाले प्रोजेक्ट या 8 से कम यूनिट वाले आवासीय प्रोजेक्ट्स के मामलों में यह प्राधिकरण कानूनी रूप से दखल नहीं दे सकता है, जिससे छोटे स्तर के खरीदार इसके दायरे से बाहर रह जाते हैं। इसके साथ ही रेरा किसी भी लोकल अथॉरिटी जैसे कि नगर निगम, विकास प्राधिकरण या जल बोर्ड के प्रशासनिक कामकाज में सीधा हस्तक्षेप नहीं कर सकता है। यह प्राधिकरण नक्शा पास कराने, ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) जारी करने या अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) में तेजी लाने के लिए स्थानीय सरकारी निकायों को कोई सीधा आदेश जारी नहीं कर सकता है।

RERA का गठन, इसका मुख्य उद्देश्य और विभिन्न राज्यों में इसकी कार्यप्रणाली

रेरा मूल रूप से साल 2016 में भारतीय संसद द्वारा पास किया गया एक ऐतिहासिक कानून है जो 2017 से पूरे देश में प्रभावी रूप से लागू है। इसका मुख्य मकसद रियल एस्टेट ट्रांजेक्शन्स में जवाबदेही तय करना, पारदर्शिता लाना और घर खरीदारों के हितों को पूरी तरह सुरक्षित करना है। देश के हर राज्य में अलग रेरा अथॉरिटी का गठन किया गया है, जिसके तहत सभी बिल्डर्स के लिए अपने नए और चालू प्रोजेक्ट्स को आधिकारिक पोर्टल पर रजिस्टर कराना पूरी तरह अनिवार्य बना दिया गया है।

घर खरीदारों को मिलने वाले व्यावहारिक फायदे और डिफ़ॉल्टर बिल्डरों पर अनुशासनात्मक असर

रेरा के अस्तित्व में आने के बाद से खरीदारों को एक ऐसा मंच मिला है जहाँ वे बिल्डर के खिलाफ सीधे ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकते हैं। इसके माध्यम से पजेशन में देरी होने पर मासिक मुआवजा, निर्माण कार्य में क्वालिटी इश्यू होने पर मुफ्त सुधार और प्रोजेक्ट के स्वीकृत नक्शे की पूरी जानकारी पारदर्शी तरीके से मिलती है। इस कानून ने देश भर के बिल्डरों को काफी हद तक अनुशासित किया है, जिससे अब उन्हें समय पर प्रोजेक्ट की डिलीवरी देने, पैसों का साफ-सुथरा हिसाब रखने और विनियामक नियमों का कड़ाई से पालन करने की आदत पड़ी है।

RERA Act: प्रशासनिक चुनौतियां, क्रियान्वयन में होने वाली देरी और संसाधनों का अभाव

यद्यपि रेरा की कागजी शक्तियां पर्याप्त दिखती हैं, लेकिन व्यावहारिक धरातल पर इसके आदेशों के क्रियान्वयन में होने वाली अत्यधिक देरी और तकनीकी संसाधनों की भारी कमी आज भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। देश के कई राज्यों में रेरा के प्रशासनिक कार्यालय और ट्रिब्यूनल पूरी तरह से सक्रिय या स्टाफ से सुसज्जित नहीं हैं, जिसके कारण मामलों का बैकलॉग लगातार बढ़ता जा रहा है। इस स्थिति को सुधारने के लिए घर खरीदारों को भी कानूनी रूप से अपनी जागरूकता बढ़ानी होगी।

निष्कर्ष: रेरा निश्चित रूप से देश के आम घर खरीदारों (RERA Act) के लिए एक बेहद मजबूत और विश्वसनीय ढाल साबित हुआ है, लेकिन इसके पूर्ण क्रियान्वयन के लिए इसकी प्रशासनिक सीमाओं को समझना भी उतना ही आवश्यक है। यदि इस कानून का सही और समयबद्ध उपयोग किया जाए, तो भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर पूरी तरह से स्वस्थ और पारदर्शी बन सकता है। सभी खरीदारों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी प्रोजेक्ट में निवेश करने से पहले संबंधित राज्य के रेरा पोर्टल पर जाकर प्रोजेक्ट की वैधता और उसके पास्ट ट्रैक रिकॉर्ड की अच्छी तरह से जांच कर लें।

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