Harley Davidson Jet Turbine Bike: यूट्यूबर ने बाइक के इंजन की जगह लगाईं दो माइक्रो टर्बाइन, 97 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ी
Harley Davidson Jet Turbine Bike: यूट्यूबर बाइक्स एंड बियर्ड्स ने खराब हार्ले-डेविडसन में दो जेट टर्बाइन लगाईं। 336 न्यूटन थ्रस्ट वाली यह बाइक 97 किमी/घंटे की रफ्तार से दौड़ी।
Harley Davidson Jet Turbine Bike: बाइक की आत्मा उसका इंजन मानी जाती है, लेकिन एक यूट्यूबर ने इंजन की जगह ही जेट टर्बाइन लगा दी। यूट्यूब चैनल बाइक्स एंड बियर्ड्स ने एक हार्ले-डेविडसन में पारंपरिक इंजन हटाकर छोटे जेट टर्बाइन फिट किए हैं। जेट इंजन वाली बाइक टेस्टिंग के दौरान 97 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार तक दौड़ी। इसका वीडियो चैनल पर अपलोड किया गया है।
इस प्रोजेक्ट के लिए एक ऐसी हार्ले चुनी गई, जिसका इंजन पूरी तरह खराब हो चुका था और ठीक नहीं हो सकता था। पिछले पहिये के दोनों ओर दो माइक्रो टर्बाइन लगाई गईं, जिनसे करीब 336 न्यूटन थ्रस्ट पैदा होता है। बाइक को बदलने में 400 घंटे से ज्यादा लगे। हालांकि इसे सामान्य सड़क पर चलाना मुश्किल है और इसे स्पेशल प्रोजेक्ट के रूप में देखा जा रहा है।
Harley Davidson Jet Turbine Bike: खराब इंजन वाली हार्ले बनी प्रोजेक्ट की बुनियाद
बाइक्स एंड बियर्ड्स ने इस प्रोजेक्ट के लिए हार्ले-डेविडसन को चुना। यह बाइक चलने लायक नहीं थी, क्योंकि उसका ओरिजिनल इंजन पूरी तरह खराब हो चुका था। रिपोर्ट के मुताबिक उसकी मरम्मत संभव नहीं थी।
इसी वजह से यूट्यूबर ने उसे प्रयोग के लिए चुना। इंजन हटाने के बाद उसकी जगह दो छोटे जेट टर्बाइन लगाए गए। बाइक कौन-से साल या मॉडल की है, इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं है।
दो माइक्रो टर्बाइन से मिलता है 336 न्यूटन थ्रस्ट
पुरानी बाइक से इंजन निकालने के बाद पिछले पहिये के दोनों तरफ एक-एक माइक्रो टर्बाइन लगाई गई। दोनों मिलकर लगभग 336 न्यूटन का थ्रस्ट पैदा करती हैं। सामान्य बाइक को चलाने के लिए इंजन और चेन की जरूरत होती है, जबकि इस कस्टम बाइक में टर्बाइन का इस्तेमाल हुआ है।
टर्बाइन से बनने वाले थ्रस्ट के दम पर बाइक आगे बढ़ती है। यानी पहियों को घुमाने वाली पारंपरिक व्यवस्था यहां नहीं है। टर्बाइन के मॉडल और ईंधन के बारे में उपलब्ध जानकारी में कोई ब्योरा नहीं है।
400 घंटे से ज्यादा लगा बदलाव में
इस बाइक को मॉडिफाई करने में 400 घंटे से ज्यादा का समय लगा। स्विचगियर और डिस्प्ले को पहले जैसा ही रखा गया है। नए सिस्टम के हिसाब से उनमें कुछ बदलाव जरूर किए गए हैं।
यानी बाहर से बाइक का नियंत्रण पहले जैसा दिखता है, लेकिन अंदर की तकनीक पूरी तरह बदल चुकी है। इस काम पर कुल कितना खर्च आया, यह जानकारी सामने नहीं आई है।
97 किमी प्रति घंटे तक पहुंची रफ्तार
वीडियो के मुताबिक बाइक का वजन 159 किलोग्राम है। टेस्टिंग के दौरान इसे 97 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलाया गया। हालांकि इसकी अधिकतम रफ्तार कितनी है, इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
इसलिए 97 किमी प्रति घंटे को टेस्टिंग में दर्ज रफ्तार के रूप में ही देखना चाहिए, इसे बाइक की सीमा नहीं माना जा सकता। टेस्ट कहां और किन हालात में हुआ, इसका ब्योरा उपलब्ध नहीं है।
न गियर बदलने की जरूरत, न वाइब्रेशन
इस बाइक को चलाने के लिए गियर बदलने की जरूरत नहीं पड़ती। यह सिर्फ थ्रस्ट के दम पर चलती है। इसे किसी ऑटोमेटिक स्कूटर की तरह समझा जा सकता है।
वीडियो में यह भी बताया गया है कि बाइक चलाते समय वाइब्रेशन महसूस नहीं होती। यह सामान्य इंजन वाली बाइकों से अलग अनुभव है। हालांकि यह दावा वीडियो में किया गया है और स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
सेफ्टी की चुनौतियां
टर्बाइन के इस्तेमाल से सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां भी सामने आती हैं। वीडियो में बताया गया है कि टर्बाइन फेल होने पर उसके टुकड़ों को फैलने से रोकने के लिए सेफ्टी कवर की जरूरत पड़ेगी।
साथ ही टर्बाइन से काफी गर्मी निकलती है। इसलिए बाइक चलाते समय विशेष सावधानी जरूरी है। ऐसे सेफ्टी कवर फिलहाल लगाए गए हैं या नहीं, इस बारे में उपलब्ध जानकारी में स्पष्ट उल्लेख नहीं है।
Harley Davidson Jet Turbine Bike: स्पेशल प्रोजेक्ट, सड़क के लिए नहीं
इन बदलावों की वजह से बाइक को सामान्य सड़क पर चलाना मुश्किल है। इसे एक स्पेशल प्रोजेक्ट के तौर पर देखा जा सकता है। यह बाजार में मिलने वाली दूसरी बाइकों से अलग है।
इस तरह के प्रयोग तकनीकी रचनात्मकता को दिखाते हैं, लेकिन इन्हें आम इस्तेमाल के लिए नहीं बनाया गया है। बाइक के भविष्य में बिकने या दोबारा बनने की कोई जानकारी सामने नहीं आई है।
बाइक्स एंड बियर्ड्स ने खराब हो चुकी हार्ले-डेविडसन के इंजन की जगह पिछले पहिये के दोनों ओर दो माइक्रो जेट टर्बाइन लगाईं, जिनसे करीब 336 न्यूटन थ्रस्ट मिलता है। 159 किलोग्राम वजनी यह बाइक टेस्टिंग में 97 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चली। इसे बनाने में 400 घंटे से ज्यादा लगे। यह बिना गियर के चलती है और वाइब्रेशन नहीं होती, लेकिन टर्बाइन की गर्मी और टुकड़े बिखरने का खतरा सुरक्षा चुनौती है। इसलिए इसे सड़क के बजाय स्पेशल प्रोजेक्ट माना जा रहा है।
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