Gold-Silver Price 6 September 2026: सोने-चांदी के भाव में फिर आई जोरदार तेजी, 24 कैरेट गोल्ड ₹1.55 लाख के पार; चांदी ₹2.50 लाख के करीब

24 कैरेट सोना ₹1.55 लाख के पार, चांदी ₹2.50 लाख के करीब; जानें ताजा भाव

0

Gold-Silver Price 6 September 2026: भारतीय सर्राफा बाजार में सितंबर के पहले सप्ताह के दौरान कीमती धातुओं की कीमतों में भारी हलचल और मजबूती का दौर देखा जा रहा है। पिछले कुछ कारोबारी सत्रों में वैश्विक और घरेलू स्तर पर आए उतार-चढ़ाव के बाद 4 सितंबर को सोने और चांदी की कीमतों ने एक बार फिर नया उछाल दर्ज किया। इसके चलते 24 कैरेट शुद्ध सोने का भाव 1.55 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया, जबकि औद्योगिक और निवेश मांग के बल पर चांदी की कीमत 2.50 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के करीब पहुंच गई।

रविवार, 6 सितंबर 2026 को देश भर के अधिकांश प्रमुख भौतिक सर्राफा बाजारों में नियमित साप्ताहिक अवकाश रहता है। ऐसे में आज के दिन खुदरा खरीदारी करने वाले उपभोक्ताओं के लिए 4 और 5 सितंबर के आधिकारिक क्लोजिंग रेट ही सबसे नजदीकी और प्रामाणिक संदर्भ माने जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीतियों को लेकर बनी अनिश्चितता, डॉलर इंडेक्स की चाल और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव ने घरेलू स्तर पर सोने-चांदी के भावों को मजबूत सहारा दिया है।

Gold-Silver Price 6 September 2026: 24 कैरेट और 22 कैरेट सोने की कीमतों में ताजा उछाल

घरेलू स्तर पर उपलब्ध नवीनतम आंकड़ों के अनुसार 24 कैरेट शुद्ध सोने की कीमत लगभग 1,55,390 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर दर्ज की गई। पूर्व कारोबारी दिवस के मुकाबले इसमें करीब 810 रुपये प्रति 10 ग्राम की सीधी बढ़ोतरी दर्ज हुई। दिल्ली के स्थानीय बुलियन हाजिर बाजार में 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने के सौदे मांग में तेजी के चलते 1,59,500 रुपये प्रति 10 ग्राम तक के स्तर पर भी देखे गए।

दूसरी ओर आभूषण निर्माण में सर्वाधिक प्रयुक्त होने वाले 22 कैरेट जेवराती सोने का भाव 1,42,441 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास स्थिर रहा। 24 कैरेट और 22 कैरेट के भाव में यह बड़ा अंतर धातुओं के शुद्धता अनुपात के कारण होता है। 24 कैरेट सोना 99.9 प्रतिशत शुद्ध होने के कारण काफी नरम होता है जिससे जटिल आभूषण नहीं गढ़े जा सकते, जबकि 22 कैरेट में लगभग 91.6 प्रतिशत सोना और शेष हिस्सा तांबे या चांदी जैसी मिश्र धातुओं का होता है जो आभूषणों को आवश्यक मजबूती प्रदान करता है।

चांदी की चमक बढ़ी: ₹2.50 लाख प्रति किलोग्राम के आंकड़े को छूने को बेताब

सोने के साथ-साथ सफेद धातु यानी चांदी की कीमतों में भी तेज उछाल दर्ज किया गया है। 4 सितंबर के कारोबारी सत्र में चांदी के भाव बढ़कर लगभग 2,50,010 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर तक पहुंच गए। यद्यपि दिल्ली के थोक हाजिर बाजार में 999 फाइन चांदी की कुछ श्रेणियों का भाव 2,40,500 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास भी कोट किया गया, किंतु खुदरा बाजारों में प्रीमियम और स्थानीय शुल्कों के जुड़ने के बाद यह ढाई लाख रुपये प्रति किलो की ऐतिहासिक सीमा पर कारोबार कर रही है।

चांदी की कीमतों में सोने की तुलना में कहीं अधिक अस्थिरता और तेजी देखने को मिल रही है। इसका मुख्य कारण यह है कि चांदी केवल आभूषण या निवेश तक सीमित संपत्ति नहीं है, बल्कि सौर ऊर्जा क्षेत्र में सोलर पीवी सेल्स (Solar PV Cells), आधुनिक इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) के इलेक्ट्रॉनिक घटकों और सेमीकंडक्टर निर्माण में इसका भारी औद्योगिक उपभोग हो रहा है। औद्योगिक मांग में आए निरंतर विस्तार ने चांदी की आपूर्ति पर दबाव बनाया है, जिससे घरेलू वायदा और हाजिर दोनों बाजारों में इसके दाम लगातार चढ़ रहे हैं।

महानगरों में सोने का हाल: दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता में दरें

देश के प्रमुख महानगरों में स्थानीय टैक्स, ढुलाई शुल्क और ज्वैलर्स एसोसिएशन के दिशानिर्देशों के कारण सोने की खुदरा कीमतों में थोड़ा-बहुत अंतर बना रहता है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में जहां 24 कैरेट सोने का खुदरा भाव लगभग 1,55,510 रुपये और 22 कैरेट का भाव 1,42,560 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज हुआ, वहीं मुंबई के जवेरी बाजार में भी दरें 1.55 लाख रुपये के दायरे में मजबूत बनी रहीं।

चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु और पुणे के बाजारों में भी शादी-विवाह के आगामी त्योहारी सीजन की अग्रिम मांग के कारण भाव ऊंचे स्तरों पर टिके हुए हैं। दक्षिण भारतीय बाजारों में पारंपरिक भारी आभूषणों की निरंतर मांग के चलते 22 कैरेट सोने की खुदरा बिक्री में तेजी बनी हुई है। हालांकि अलग-अलग शहरों में स्थानीय बिक्री कर और प्रीमियम के चलते कुछ सौ रुपये का फासला सामान्य रूप से देखा जा रहा है।

वैश्विक कारक: अमेरिकी फेड रिजर्व, ब्याज दरें और भू-राजनीतिक अस्थिरता

सर्राफा बाजार के विश्लेषकों का मानना है कि घरेलू बाजार में सोने की मौजूदा तेजी अंतरराष्ट्रीय आर्थिक और कूटनीतिक परिस्थितियों से सीधे तौर पर संचालित हो रही है। वैश्विक स्तर पर जब भी भू-राजनीतिक तनाव या युद्ध जैसी परिस्थितियां गहराती हैं, तब दुनिया भर के संस्थागत निवेशक, हेज फंड्स और केंद्रीय बैंक जोखिम वाली संपत्तियों से पूंजी निकालकर सोने में सुरक्षित निवेश (Safe-Haven Inflows) करने लगते हैं।

इसके अतिरिक्त अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की आगामी बैठकों में ब्याज दरों के संभावित रुख को लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में गहरी हलचल है। यदि अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति के दबाव कम होते हैं और ब्याज दरों में कटौती की संभावना बलवती होती है, तो बिना ब्याज वाली धातु जैसे सोने की चमक और बढ़ जाती है। विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की विनिमय दर भी घरेलू आयात लागत को प्रभावित कर रही है, जिससे भारतीय बाजारों में सोना लगातार महंगे स्तरों पर बना हुआ है।

आभूषण खरीदते समय केवल बेस रेट न देखें: मेकिंग चार्ज और हॉलमार्किंग अनिवार्य

रविवार को ज्वेलरी खरीदने का मन बना रहे ग्राहकों के लिए यह समझना जरूरी है कि अखबारों या ऑनलाइन पोर्टलों पर प्रदर्शित होने वाला प्रति 10 ग्राम का भाव केवल बुलियन का बेस रेट होता है। जब कोई ग्राहक दुकान से तैयार जेवर खरीदता है, तो अंतिम बिलिंग में सोने के मूल वजन के साथ-साथ मेकिंग चार्ज (आभूषण गढ़ाई का शुल्क) और 3 प्रतिशत वस्तु एवं सेवा कर (GST) भी जुड़ता है।

ज्वैलर्स अपनी डिजाइनिंग, कारीगरी और ब्रांड के आधार पर 8 प्रतिशत से लेकर 25 प्रतिशत तक मेकिंग चार्ज वसूलते हैं। इसके अलावा आभूषण की शुद्धता को प्रमाणित करने के लिए भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा जारी 6 अंकों का अल्फ़ान्यूमेरिक ‘HUID’ (हॉलमार्क यूनिक आइडेंटिफिकेशन) कोड होना अनिवार्य है। ग्राहकों को हमेशा पक्का बिल मांगना चाहिए, जिसमें सोने का शुद्ध वजन, कैरेट, मेकिंग चार्ज और जीएसटी की अलग-अलग स्पष्ट प्रविष्टि हो।

Gold-Silver Price 6 September 2026: क्या मौजूदा ऐतिहासिक स्तरों पर सोना-चांदी खरीदना सही रणनीति है?

वर्तमान समय में जब सोना 1.55 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 2.50 लाख रुपये प्रति किलो के उच्च स्तरों पर ट्रेड कर रही है, तो आम निवेशकों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या अभी खरीदारी करना लाभदायक रहेगा। बाजार जानकारों का स्पष्ट कहना है कि यदि खरीदारी शादी या पारिवारिक आवश्यकता के लिए है, तो बाजार के नीचे गिरने का अनिश्चित इंतजार करने के बजाय जरूरत के अनुसार खरीदारी कर लेनी चाहिए।

किंतु यदि खरीदारी का एकमात्र उद्देश्य वित्तीय निवेश और रिटर्न कमाना है, तो एकमुश्त भारी पूंजी लगाने के बजाय गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF), सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड अथवा सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए धीरे-धीरे पूंजी लगाना एक समझदारी भरा कदम हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में किसी भी समय तेज मुनाफावसूली आने पर कीमतों में अचानक तकनीकी सुधार (गिरावट) भी संभव है, इसलिए मौजूदा रिकॉर्ड उच्च स्तरों पर जोखिम प्रबंधन का ध्यान रखना प्रत्येक खरीदार के लिए आवश्यक है।

Read More Here

आपको यह भी पसंद आ सकता है
Leave A Reply

Your email address will not be published.