US Federal Reserve: यूएस फेड बैठक से पहले सोना-चांदी में बड़ी गिरावट, जानें एक्सपर्ट की राय और निवेशकों के लिए आगे की रणनीति
यूएस फेड के फैसले से पहले दबाव में गोल्ड-सिल्वर, एक्सपर्ट ने बताई निवेश की रणनीति
US Federal Reserve: अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की बेहद महत्वपूर्ण नीतिगत बैठक से ठीक पहले वैश्विक और भारतीय कमोडिटी बाजारों में सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार गिरावट दर्ज की गई है। मंगलवार को कारोबारी सत्र के दौरान दोनों कीमती धातुओं के भाव धड़ाम से नीचे गिर गए, जिससे सर्राफा बाजार से लेकर वायदा बाजार तक हड़कंप मच गया। अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और निवेशकों के सतर्क रुख के कारण बाजार में मुनाफावसूली हावी रही। बाजार विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि फेड के फैसले के बाद सोने-चांदी में दोनों तरफ तेज और उथल-पुथल भरी चाल देखने को मिल सकती है, इसलिए निवेशकों को फिलहाल नए सौदों में जल्दबाजी करने से बचना चाहिए।
वैश्विक और भारतीय वायदा बाजार में भाव का स्तर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की स्पॉट कीमतें 1.30 प्रतिशत से अधिक की बड़ी गिरावट के साथ 4022 डॉलर प्रति औंस के करीब कारोबार कर रही थीं। वहीं चांदी के तेवर भी ढीले पड़े और इसमें 2.60 प्रतिशत से ज्यादा की टूट दर्ज की गई, जिससे यह 57 डॉलर प्रति औंस के आसपास ट्रेड कर रही थी। भारतीय बाजार की बात करें तो मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर अगस्त डिलीवरी वाला सोना 1911 रुपये की भारी गिरावट के साथ 1,41,152 रुपये प्रति 10 ग्राम के दिनभर के निचले स्तर तक चला गया, हालांकि बाद में यह मामूली सुधार के साथ 1,41,500 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। इसी तरह चांदी की कीमतों में 6324 रुपये की बड़ी गिरावट आई और यह 2,14,849 रुपये प्रति किलोग्राम के निचले स्तर को छूने के बाद 2,15,295 रुपये पर स्थिर हुई।
US Federal Reserve: गिरावट के मुख्य कारण और बॉन्ड यील्ड का आकर्षण
कीमतों में इस तेज गिरावट की सबसे बड़ी और सीधी वजह 29 जुलाई को होने वाली फेडरल रिजर्व की बैठक को माना जा रहा है। ऐतिहासिक रूप से जब भी फेड की बैठक नजदीक आती है, तो संस्थागत निवेशक जोखिम भरे सौदों और कीमती धातुओं से दूरी बना लेते हैं। इस बार सोने में पारंपरिक रूप से दिखने वाली ‘सेफ हेवन’ (सुरक्षित निवेश) खरीदारी कमजोर पड़ गई है, क्योंकि निवेशकों को अमेरिकी बॉन्ड मार्केट में अधिक सुरक्षित और बेहतर फिक्स्ड रिटर्न मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पैसा गोल्ड और सिल्वर से निकलकर तेजी से अमेरिकी सरकारी बॉन्ड्स में शिफ्ट हो रहा है, जिसने सर्राफा बाजार पर अतिरिक्त दबाव बना दिया है।
ब्याज दरों पर फैसले और रेट कट की संभावना पर विशेषज्ञ की राय
सेबी रजिस्टर्ड मार्केट और कमोडिटी एक्सपर्ट अमित सुरेश जैन का कहना है कि फेड मीटिंग से पहले बाजार में अनिश्चितता का माहौल बनना स्वाभाविक है। मौजूदा वैश्विक आर्थिक परिदृश्य, मजबूत अमेरिकी डॉलर, लगातार बनी हुई महंगाई और भू-राजनीतिक तनावों को देखते हुए इस बात की संभावना बेहद कम है कि फेड रिजर्व ब्याज दरों में कोई कटौती करेगा। ज्यादा संभावना इस बात की है कि दरें यथावत रखी जाएंगी या जरूरत पड़ने पर बढ़ाई भी जा सकती हैं। अमित जैन के अनुसार, यदि किसी स्थिति में दरें बढ़ाई जाती हैं, तो सोने-चांदी पर अतिरिक्त बिकवाली का दबाव आएगा और बाजार को दोबारा रिकवर होने में एक साल तक का समय लग सकता है।
पुराने पैटर्न में बदलाव और आम निवेशकों के लिए सटीक रणनीति
बाजार का गणित अब पूरी तरह बदल चुका है। पहले युद्ध या कूटनीतिक तनाव के दौरान सोना-चांदी सुरक्षित पनाहगाह के तौर पर चमकने लगते थे, लेकिन अब मजबूत बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की वजह से बढ़ती महंगाई के कारण पैसा सीधे बॉन्ड्स में जा रहा है। ऐसे में पुराने पैटर्न पर भरोसा करना रिटेल निवेशकों के लिए नुकसानदेह हो सकता है। एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि आम निवेशकों को फिलहाल जल्दबाजी में खरीदारी (FOMO) से बचना चाहिए और फेड के फैसले का इंतजार करना चाहिए। बाजार में फिलहाल ‘टाइम करेक्शन’ चल रहा है, इसलिए गिरावट आने पर किस्तों (SIP फॉर्मेट) में धीरे-धीरे निवेश करना ही सबसे समझदारी भरा और जोखिम-रहित कदम होगा।
लॉन्ग टर्म आउटलुक और कंसोलिडेशन का दौर
अल्पकालिक (शॉर्ट टर्म) और मध्यकालिक (मीडियम टर्म) यानी अगले एक से चार सालों के लिए सोने और चांदी में कंसोलिडेशन और सीमित दायरे का कारोबार देखने को मिल सकता है। हालांकि, लंबी अवधि यानी पांच से दस साल के नजरिये से देखा जाए तो सोना और चांदी आज भी दुनिया के सबसे भरोसेमंद और मजबूत एसेट क्लास बने हुए हैं। निचले स्तरों पर समझदारी से की गई सिस्टमैटिक खरीदारी निवेशकों को लंबी अवधि में शानदार और सुरक्षित रिटर्न दे सकती है, बशर्ते वे बाजार के तेज उतार-चढ़ाव में घबराकर अपने सौदे न काटें।
Read More Here
Toyota Hilux 2026 आज होगी लॉन्च: नए डिजाइन, 48V माइल्ड-हाइब्रिड इंजन, ADAS और संभावित कीमत पर एक नजर