नीदरलैंड्स से पीएम मोदी का नया भारत का शानदार विजन – ‘ग्लोबल ग्रोथ इंजन’ बना भारत, ओलंपिक मेजबानी से 2047 तक विकसित राष्ट्र का संकल्प
भारत को ग्लोबल ग्रोथ इंजन बताते हुए पीएम मोदी ने स्टार्टअप, डिजिटल क्रांति, चंद्रयान और ओलंपिक मेजबानी का किया जिक्र
PM Modi Netherlands Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने नीदरलैंड्स दौरे के दौरान यूरोपीय महाद्वीप की धरती से नए भारत की अभूतपूर्व विकास गाथा और भविष्य के वैश्विक विजन को बेहद बुलंद आवाज में दुनिया के सामने रखा है। हेग में प्रवासी भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने न केवल भारत की हालिया ऐतिहासिक उपलब्धियों का गर्व से बखान किया, बल्कि स्पष्ट संदेश दिया कि भारत अब केवल तेजी से विकास करने वाला देश मात्र नहीं रहा, बल्कि वह वैश्विक अर्थव्यवस्था को नई दिशा और गति देने वाला एक मजबूत ‘ग्लोबल ग्रोथ इंजन’ बन चुका है। अपने संबोधन में उन्होंने भारत की ओलंपिक खेलों की मेजबानी की महत्वाकांक्षा से लेकर देश के विशाल स्टार्टअप इकोसिस्टम, डिजिटल क्रांति, एआई (AI) लीडरशिप और अंतरिक्ष विज्ञान में चांद के दक्षिणी ध्रुव पर तिरंगा फहराने जैसी सफलताओं का विस्तार से जिक्र किया।
यह महत्वपूर्ण राजनयिक दौरा ऐसे समय में संपन्न हो रहा है जब भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच पूरी दुनिया भारत को स्थिरता और समावेशी विकास के एक वैश्विक मॉडल के रूप में देख रही है। प्रधानमंत्री के इस विजनरी संबोधन ने न केवल नीदरलैंड्स और यूरोप में रह रहे लाखों प्रवासियों के भीतर राष्ट्रवाद और आत्मविश्वास का नया संचार किया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक समुदाय को भी भारत की असीम क्षमताओं और निवेश के नए अवसरों के प्रति आकर्षित किया है। आइए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हेग की धरती से रेखांकित किए गए नए भारत के इस शानदार विजन, आर्थिक-तकनीकी सुधारों और भारत-नीदरलैंड्स संबंधों के नए आयामों का विस्तृत विश्लेषण करते हैं।
भारत बना दुनिया का ग्लोबल ग्रोथ इंजन: डिजिटल और सामाजिक क्रांति का खाका
हेग के भव्य सभागार में प्रवासी भारतीयों के गगनभेदी जयकारों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन का एक मुकम्मल खाका प्रस्तुत किया। उन्होंने गर्व के साथ रेखांकित किया कि भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है, जहां टियर-2 और टियर-3 शहरों के युवा अपनी मेधा के दम पर वैश्विक स्तर की यूनिकॉर्न कंपनियां खड़ी कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने देश की तकनीकी रीढ़ का जिक्र करते हुए कहा कि भारत ने दुनिया का सबसे बड़ा और अभूतपूर्व यूनिक डिजिटल आईडी प्रोग्राम सफलतापूर्वक स्थापित किया है, जिसने देश के वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) और सुशासन के पूरे ढांचे को बदलकर रख दिया है।
इस डिजिटल क्रांति के कारण आज भारत के सुदूर गांवों में रहने वाला एक छोटा रेहड़ी-पटरी वाला या किसान भी पलक झपकते ही सीधे अपने बैंक खाते में डिजिटल भुगतान प्राप्त कर रहा है। इसके साथ ही, प्रधानमंत्री ने सामाजिक सुरक्षा के मोर्चे पर भारत की ऐतिहासिक प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में वर्तमान में दुनिया की सबसे बड़ी सरकारी स्वास्थ्य बीमा योजना (आयुष्मान भारत) संचालित की जा रही है, जो करोड़ों निर्धन परिवारों को गंभीर बीमारियों के समय मुफ्त इलाज की गारंटी देती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ये उपलब्धियां महज कागजी आंकड़े नहीं हैं, बल्कि ये इस बात का जीवंत प्रमाण हैं कि तकनीक का सही इस्तेमाल करके कैसे 1.4 अरब आबादी के जीवन स्तर को सम्मानजनक बनाया जा सकता है।
PM Modi Netherlands Visit: ओलंपिक मेजबानी की महत्वाकांक्षा और भारत की बढ़ती खेल संस्कृति
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने भारत के एक नए और बड़े सपने को दुनिया के सामने रखते हुए कहा कि देश अब दुनिया के सबसे बड़े खेल महाकुंभ यानी ओलंपिक खेलों की मेजबानी करने के लिए पूरी तरह से तैयार और उत्सुक है। हाल के वर्षों में भारत ने अपनी धरती पर एशियन गेम्स, क्रिकेट वर्ल्ड कप और ऐतिहासिक जी-20 (G20) शिखर सम्मेलन जैसे महा-आयोजनों की अत्यंत सफल और सुरक्षित मेजबानी करके अपनी अद्वितीय इंफ्रास्ट्रक्चर क्षमता और प्रबंधकीय कौशल का लोहा पूरी दुनिया में मनवाया है।
ओलंपिक की मेजबानी का यह विजन केवल खेल के बुनियादी ढांचे के विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की विशाल युवा शक्ति की ऊर्जा को सही दिशा देने, देश में एक मजबूत खेल संस्कृति का निर्माण करने और वैश्विक मंच पर भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ (सांस्कृतिक कूटनीति) को एक नई और सर्वोच्च ऊंचाई प्रदान करने का एक रणनीतिक माध्यम है। देश के युवा एथलीटों द्वारा अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में जीते जा रहे रिकॉर्ड तोड़ पदक इस बात का संकेत हैं कि भारत खेलों की दुनिया में भी एक महाशक्ति बनने की राह पर तेजी से अग्रसर है।
PM Modi Netherlands Visit: जी-20 (G20), एआई (AI) समिट और अंतरिक्ष विज्ञान में इसरो (ISRO) का परचम
प्रधानमंत्री ने वैश्विक कूटनीति के मोर्चे पर भारत की बढ़ती धाक का जिक्र करते हुए कहा कि जी-20 शिखर सम्मेलन के सफल आयोजन के माध्यम से भारत ने विकसित और विकासशील देशों (Global South) के बीच एक मजबूत और संतुलित कूटनीतिक मध्यस्थ की भूमिका स्थापित की है। इसके अतिरिक्त, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के नैतिक और सुरक्षित उपयोग को लेकर भारत में आयोजित हुई वैश्विक एआई (AI) समिट का हवाला देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत तकनीकी विकास की अंधी दौड़ में केवल एक उपभोक्ता नहीं है, बल्कि वह भविष्य की तकनीकों के लिए वैश्विक नियम और नीतियां बनाने में अग्रणी नेतृत्वकारी भूमिका निभा रहा है।
अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की चमत्कारी सफलताओं की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने चंद्रयान मिशन का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत के वैज्ञानिकों ने चांद के उस अगम्य और अंधेरे दक्षिणी ध्रुव पर कदम रखा, जहां इतिहास में आज तक दुनिया का कोई भी देश नहीं पहुँच सका था। यह सफलता भारत के वैज्ञानिक सामर्थ्य, अनुसंधान की लागत-प्रभावशीलता (Cost-Effectiveness) और देश के भीतर जागृत हो चुके नए आत्मविश्वास का एक अद्भुत वैश्विक प्रतीक बन चुकी है।
16 मई 2014 का ऐतिहासिक दिन: स्थिर सरकार और नीतिगत निरंतरता का महत्व
एक बेहद भावनात्मक और राजनीतिक संदर्भ साझा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 मई 2014 के लोकसभा चुनाव परिणामों की ऐतिहासिक तारीख को याद किया। उन्होंने कहा कि ठीक 12 वर्ष पहले आज ही के दिन देश की जनता ने दशकों के गठबंधन और अनिश्चितता के दौर को समाप्त करते हुए केंद्र में पूर्ण बहुमत वाली एक स्थिर और मजबूत सरकार की स्थापना की थी। प्रधानमंत्री ने भावुक होते हुए कहा कि भारत के करोड़ों नागरिकों का यही अटूट विश्वास और जनादेश उन्हें वैश्विक मंच पर बिना थके, बिना रुके और बिना झुके देश के स्वाभिमान के लिए निरंतर काम करने की अपार शक्ति देता है।
इस नीतिगत स्थिरता और राजनीतिक इच्छाशक्ति के कारण ही पिछले एक दशक में भारत में वस्तु एवं सेवा कर (GST), दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (IBC), डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) और ‘डिजिटल इंडिया’ जैसे ऐतिहासिक और कड़े ढांचागत सुधारों को धरातल पर उतारना संभव हो सका है। इसी राजनीतिक स्थिरता ने विदेशी निवेशकों के भीतर भारत की अर्थव्यवस्था के प्रति एक नया और अटूट भरोसा पैदा किया है, जिससे देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के रिकॉर्ड नए कीर्तिमान स्थापित हो रहे हैं।
नए भारत के वैश्विक विजन के मुख्य स्तंभ और रणनीतिक दिशा
| विकास का क्षेत्र | भारत की वैश्विक स्थिति व उपलब्धि | भविष्य का रणनीतिक लक्ष्य (2047) |
| आर्थिक व स्टार्टअप | दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम और तीव्र विकास दर। | वर्ष 2047 तक भारत को पूरी तरह से एक विकसित और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था बनाना। |
| डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर | वैश्विक डिजिटल भुगतान (UPI) और देशव्यापी डिजिटल गवर्नेंस में नंबर वन। | विश्व के अन्य विकासशील देशों (Global South) को भारत का डिजिटल मॉडल सौंपना। |
| वैश्विक खेल व कूटनीति | जी-20 और एआई समिट की सफल मेजबानी; सॉफ्ट पावर का विस्तार। | भविष्य के ओलंपिक खेलों की आधिकारिक और भव्य मेजबानी का अधिकार हासिल करना। |
| अंतरिक्ष व विज्ञान | चंद्रयान के जरिए चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पहुँचने वाला दुनिया का पहला देश। | गगनयान और मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशनों के जरिए अंतरिक्ष अनुसंधान में अग्रणी बनना। |
PM Modi Netherlands Visit: प्रवासी भारतीयों की सराहना और भारत-नीदरलैंड्स संबंधों का नया क्षितिज
प्रधानमंत्री ने हॉलैंड और पूरे यूरोप में रह रहे भारतीय प्रवासियों की भूरी-भूरी प्रशंसा करते हुए उन्हें भारत का सच्चा और स्थाई ‘ब्रांड एंबेसडर’ करार दिया। उन्होंने कहा कि समय के साथ भले ही पीढ़ियां बदल गईं और लोग सात समंदर पार आकर बस गए, लेकिन भारतीय परिवारों के भीतर रची-बसी अपनी अनूठी संस्कृति, तीज-त्योहार, पारिवारिक मूल्य और अपनी मातृभूमि के प्रति जो अपनत्व का भाव है, वह आज भी पूरी तरह जीवंत है। उन्होंने भारत की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता को देश की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि जहां दुनिया की कई प्राचीन सभ्यताएं वक्त के थपेड़ों के साथ इतिहास के पन्नों में लुप्त हो गईं, वहीं सनातन भारतीय संस्कृति अपने लचीलेपन और उदारता के कारण आज भी पूरे विश्व को ‘वसुधैव कुटुंबकम’ (पूरी दुनिया एक परिवार है) का संदेश दे रही है।
नीदरलैंड्स के साथ भारत के द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार, सतत कृषि, उन्नत जल प्रबंधन (Water Management), हरित हाइड्रोजन और उच्च तकनीक के क्षेत्रों में सहयोग एक नए स्वर्ण युग में प्रवेश कर रहा है। यूरोपीय संघ (EU) के एक बेहद प्रभावशाली और तकनीकी रूप से समृद्ध सदस्य के रूप में नीदरलैंड्स भारत की यूरोप नीति (Europe Policy) और वैश्विक सप्लाई चेन के विविधीकरण में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार की भूमिका निभा रहा है।
निष्कर्ष: नए भारत का आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का संकल्प
निष्कर्षतः, नीदरलैंड्स के हेग में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह संबोधन केवल एक कूटनीतिक भाषण नहीं था, बल्कि यह 21वीं सदी के एक नए, महत्वाकांक्षी, आत्मनिर्भर और आत्मविश्वास से लबरेज भारत की हुंकार थी। आज का भारत न केवल अपनी आंतरिक और सदियों पुरानी जटिल समस्याओं का आधुनिक डिजिटल तकनीकों के माध्यम से स्थाई समाधान खोज रहा है, बल्कि वह जलवायु परिवर्तन, वैश्विक मंदी और तकनीकी कूटनीति जैसे अंतरराष्ट्रीय संकटों के समाधान के लिए पूरी दुनिया का मार्गदर्शन करने के लिए भी तत्पर खड़ा है।
ओलंपिक की मेजबानी का सपना हो, स्टार्टअप क्रांति को आगे बढ़ाना हो या वर्ष 2047 तक एक विकसित राष्ट्र के संकल्प को सिद्ध करना हो—नए भारत की यह कहानी दृढ़ इच्छाशक्ति और सामूहिक प्रयास की एक अनूठी गाथा है। प्रधानमंत्री का यह सफल दौरा निश्चित रूप से यूरोप के साथ भारत के आर्थिक व कूटनीतिक संबंधों को एक नई ऊर्जा और दीर्घकालिक सुरक्षा प्रदान करने में मील का पत्थर साबित होगा।
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