बार-बार गुस्सा आना बन सकता है जानलेवा, हाई बीपी, हार्ट डिजीज और डिप्रेशन जैसी गंभीर बीमारियों का बढ़ता खतरा, योग और मेडिटेशन से पाएं स्थायी राहत

बार-बार गुस्सा हाई बीपी और हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ाता, योग है समाधान

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Anger issues: सोचिए एक ऐसे इंसान के बारे में जो सुबह उठते ही छोटी सी बात पर तेज हो जाता है, ऑफिस में किसी की एक बात से पारा चढ़ जाता है और घर में भी छोटी-छोटी बातें तनाव का कारण बन जाती हैं। यह केवल मिजाज की बात नहीं है। अगर आप इस श्रेणी में आते हैं तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है क्योंकि यह गुस्सा आपके शरीर को धीरे-धीरे अंदर से खोखला कर रहा है।

Anger issues: क्या गुस्सा वाकई एक स्वास्थ्य समस्या है?

अधिकांश लोग गुस्से को केवल भावनात्मक प्रतिक्रिया मानते हैं लेकिन चिकित्सा विज्ञान इसे एक गंभीर स्वास्थ्य जोखिम के रूप में देखता है। जब आप क्रोधित होते हैं तो शरीर में कोर्टिसोल और एड्रेनालिन जैसे तनाव वाले हार्मोन तेजी से बढ़ते हैं। इन हार्मोनों के बढ़ने से ब्लड प्रेशर अचानक ऊपर चला जाता है, रक्त वाहिकाएं सिकुड़ने लगती हैं और हृदय की धड़कन असामान्य रूप से तेज हो जाती है। इससे सिरदर्द, माइग्रेन और सीने में जकड़न जैसी समस्याएं तुरंत शुरू हो सकती हैं।

Anger issues: शोध में क्या चौंकाने वाला खुलासा हुआ है?

एक हालिया अध्ययन में प्रतिभागियों को परेशान करने वाली परिस्थितियों से रूबरू कराया गया और उनकी भावनात्मक प्रतिक्रियाओं का अध्ययन किया गया। इस शोध में पाया गया कि जो लोग शारीरिक रूप से अनफिट थे उनमें गुस्सा और बेचैनी बहुत तेजी से और बहुत अधिक मात्रा में बढ़ी। शोध के अनुसार जो लोग नियमित रूप से योग और व्यायाम करते हैं उनकी भावनाएं कहीं अधिक स्थिर और नियंत्रित रहती हैं। रिपोर्ट बताती है कि एक अनफिट व्यक्ति को फिट व्यक्ति की तुलना में कई गुना अधिक गुस्सा आ सकता है जो एक बेहद अलार्मिंग तथ्य है।

Anger issues: लगातार गुस्सा आने से शरीर पर क्या असर पड़ता है?

क्रोध का पहला और सबसे सीधा असर हृदय और रक्त वाहिकाओं पर पड़ता है। जब गुस्सा बार-बार आता है तो दिल पर लगातार दबाव बढ़ता रहता है और धीरे-धीरे हाइपरटेंशन यानी उच्च रक्तचाप की समस्या स्थायी रूप ले लेती है। इसके अलावा गुस्से का सीधा संबंध मस्तिष्क पर भी पड़ता है। लगातार तनाव और क्रोध से स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। किडनी हाई बीपी की मार सबसे अधिक झेलती है और फेफड़ों की कार्यक्षमता भी धीरे-धीरे घटने लगती है। पाचन तंत्र पर असर से एसिड रिफ्लक्स और आईबीएस जैसी समस्याएं उभरने लगती हैं।

Anger issues: गुस्से से कौन-कौन सी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार बार-बार और अनियंत्रित क्रोध कई गंभीर बीमारियों का प्रवेश द्वार बन जाता है। इनमें हाइपरटेंशन, डायबिटीज, हृदय रोग और स्ट्रोक सबसे प्रमुख हैं। इसके साथ ही गुस्सा मानसिक स्वास्थ्य को भी बुरी तरह प्रभावित करता है। एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी मनोवैज्ञानिक समस्याएं भी क्रोध के कारण ट्रिगर हो सकती हैं। त्वचा संबंधी समस्याएं जैसे एक्जिमा और सोरायसिस भी अत्यधिक तनाव और गुस्से से बढ़ती हैं। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी भी कमजोर होने लगती है जिससे बार-बार बीमार पड़ने की आशंका बढ़ जाती है।

Anger issues: योग और मेडिटेशन गुस्से को कैसे नियंत्रित करते हैं?

योगगुरु स्वामी रामदेव ने गुस्से पर नियंत्रण के लिए योग और मेडिटेशन को सबसे कारगर और टिकाऊ उपाय बताया है। उनके अनुसार जब शरीर सक्रिय और स्वस्थ रहता है तो दिमाग भी स्वाभाविक रूप से नियंत्रित और शांत रहता है। स्वामी रामदेव के अनुसार नियमित योग करने से मन की उथल-पुथल शांत होती है और भावनाएं नियंत्रण में रहती हैं। योग केवल शारीरिक फिटनेस का साधन नहीं है बल्कि यह मानसिक और भावनात्मक संतुलन का भी सबसे प्रभावशाली तरीका है।

Anger issues: गुस्से पर काबू पाने के लिए क्या करें और कौन से योग अपनाएं?

गुस्से को नियंत्रित करने के लिए सबसे पहला और जरूरी कदम है रोजाना कम से कम 30 मिनट योग करना। अनुलोम-विलोम प्राणायाम, भ्रामरी प्राणायाम और शवासन विशेष रूप से क्रोध और तनाव को कम करने में सहायक माने जाते हैं। मेडिटेशन को दैनिक दिनचर्या में शामिल करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। केवल 10 से 15 मिनट की गहरी सांस लेने वाली ध्यान की प्रक्रिया भी तनाव हार्मोनों को कम करने में बेहद प्रभावी होती है। इसके अलावा नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और संतुलित आहार भी गुस्से को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

निष्कर्ष

गुस्सा एक ऐसी आग है जो बाहर से नहीं बल्कि अंदर से जलाती है। यह न केवल रिश्तों को कमजोर करता है बल्कि शरीर को भी धीरे-धीरे बीमारियों का घर बना देता है। योगगुरु स्वामी रामदेव का यह संदेश बेहद सटीक है कि एक सक्रिय और स्वस्थ शरीर ही शांत और नियंत्रित मन की नींव होती है। आज से ही रोजाना योग और मेडिटेशन को अपनी दिनचर्या में शामिल करें और गुस्से को अपनी सेहत का दुश्मन बनने से रोकें।

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