FMCG Price Hike: महंगाई की मार, साबुन से लेकर बिस्किट तक होंगे महंगे, FMCG कंपनियां बढ़ा रही हैं दाम

बढ़ती लागत और वैश्विक तनाव के बीच कंपनियां रोजमर्रा के उत्पादों की कीमतें बढ़ाने की तैयारी में

0

FMCG Price Hike: अगर आपका अगला ग्रॉसरी बिल अचानक से बढ़ जाए तो हैरान न हों। देश की प्रमुख फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स (FMCG) कंपनियां साबुन, शैंपू, बिस्किट, पैकेज्ड फूड, खाने के तेल और अन्य दैनिक उपयोग की चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी की तैयारी कर रही हैं। बढ़ती कच्चे माल की लागत, पैकेजिंग खर्च और पश्चिम एशिया में तनाव के कारण कंपनियों पर दबाव बढ़ गया है, जिसका सीधा असर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ने वाला है।

डाबर इंडिया जैसी कंपनियों ने पहले ही संकेत दे दिए हैं कि अगली तिमाही में कीमतों में और इजाफा हो सकता है। कंपनी ने मौजूदा तिमाही में करीब 4 प्रतिशत की बढ़ोतरी पहले ही कर ली है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह ट्रेंड अन्य प्रमुख ब्रांड्स में भी फैल सकता है, जिससे घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

FMCG उत्पादों की लागत बढ़ने के पीछे मुख्य कारण क्या हैं?

FMCG क्षेत्र में लागत दबाव कई मोर्चों से आ रहा है। सबसे बड़ा कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है, जिसने कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित किया है। होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाले तेल परिवहन में अनिश्चितता ने न सिर्फ क्रूड ऑयल बल्कि इससे जुड़ी कई अन्य चीजों की कीमतें भी बढ़ा दी हैं।

ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट, प्लास्टिक पैकेजिंग और विभिन्न रासायनिक इनपुट्स महंगे हो गए हैं। डाबर के ग्लोबल सीईओ मोहित मल्होत्रा ने हाल ही में कहा कि पैकेजिंग मटेरियल की लागत लगातार बढ़ रही है और इसे ऑफसेट करने के लिए कीमतें बढ़ानी पड़ सकती हैं। इसी तरह हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL), नेस्ले, ब्रिटानिया, आईटीसी, मैरिको और गोदरेज कंज्यूमर जैसी कंपनियां भी इनपुट कॉस्ट में वृद्धि की चिंता जता रही हैं।

खाने के तेल, दूध, गेहूं, चाय और कॉफी से जुड़े उत्पाद सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। अगर कच्चा तेल लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर रहा तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें भी बढ़ सकती हैं, जिसका असर पूरे सप्लाई चेन पर पड़ेगा।

कीमतों को लेकर विभिन्न बड़ी कंपनियों की क्या प्रतिक्रिया है?

डाबर ने पिछले वित्तीय वर्ष की अंतिम तिमाही में अच्छे नतीजे दिए, लेकिन आगे चुनौतियां साफ हैं। कंपनी ने घरेलू बाजार में मजबूत वॉल्यूम ग्रोथ दर्ज की, फिर भी मार्जिन बचाने के लिए दूसरी बार कीमत बढ़ाने का प्लान है। HUL के लिए पैकेजिंग और क्रूड से जुड़े उत्पाद महंगे हो रहे हैं, जबकि नेस्ले को दूध, कॉफी और पैकेजिंग की लागत झेलनी पड़ रही है।

ब्रिटानिया और आईटीसी जैसी कंपनियों को गेहूं और खाने के तेल की बढ़ती कीमतों का सामना करना पड़ रहा है। कुछ कंपनियां कीमत बढ़ाने के बजाय पैकेट का वजन कम करने (श्रिंकफ्लेशन) का रास्ता भी अपना सकती हैं। हालांकि, नेस्ले जैसी कुछ कंपनियां फिलहाल वॉल्यूम ग्रोथ पर फोकस कर रही हैं और लागत को खुद में सोखने की कोशिश कर रही हैं।

क्या ग्रामीण क्षेत्रों में मांग और महंगाई के बीच कोई संतुलन दिख रहा है?

अच्छी खबर यह है कि लंबे समय बाद ग्रामीण और छोटे शहरों में FMCG उत्पादों की मांग में सुधार दिख रहा है। सरकारी योजनाओं, बेहतर कृषि आय और क्विक कॉमर्स के चलते ग्रामीण बाजार शहरी बाजार से आगे निकल रहे हैं। कई कंपनियों ने रिपोर्ट किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में वॉल्यूम ग्रोथ शहरी से बेहतर रही है।

लेकिन इसी समय लागत बढ़ने से मुनाफा कम होने का खतरा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि कंपनियां या तो सीधे दाम बढ़ाएंगी या प्रीमियम प्रोडक्ट्स पर ज्यादा ध्यान देंगी। इससे मिडिल क्लास और निचले वर्ग के उपभोक्ताओं पर दबाव बढ़ सकता है, क्योंकि वे बेसिक प्रोडक्ट्स पर निर्भर रहते हैं।

दैनिक बजट और आम आदमी की जेब पर इसका क्या असर होगा?

साबुन, शैंपू और टूथपेस्ट जैसी पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स, बिस्किट-स्नैक्स और पैकेज्ड फूड की कीमतें बढ़ने से हर महीने का किराना खर्च 10-15 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। अगर मानसून कमजोर रहा या कच्चे तेल की कीमतें और ऊपर गईं तो यह प्रभाव और गहरा हो जाएगा।

पश्चिम एशिया संकट के कारण पहले ही महंगाई में तेजी आई है। कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि क्रूड की कीमतों में 10-15 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी भारत के आयात बिल को अरबों डॉलर बढ़ा सकती है। FMCG कंपनियों के लिए यह लागत सीधे उपभोक्ता तक पहुंचेगी।

भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए कंपनियां क्या रणनीति अपना रही हैं?

FMCG क्षेत्र की कंपनियां अब दोहरी रणनीति अपना रही हैं। एक तरफ ग्रामीण बाजार में पहुंच बढ़ाना, दूसरी तरफ प्रीमियम सेगमेंट को मजबूत करना। कुछ ब्रांड्स नए वेरिएंट लॉन्च कर रहे हैं जो हेल्थ और कन्वीनियंस पर फोकस करते हैं।

लेकिन लंबे समय में टिकाऊ विकास के लिए लागत नियंत्रण जरूरी है। कंपनियां बेहतर सोर्सिंग, सप्लाई चेन ऑप्टिमाइजेशन और टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रही हैं। फिर भी, वैश्विक अनिश्चितताएं चुनौती बनी हुई हैं।

FMCG Price Hike: महंगाई के इस दौर में उपभोक्ताओं के लिए क्या सलाह है?

ऐसे समय में उपभोक्ताओं को स्मार्ट खरीदारी करनी होगी। ब्रांडेड प्रोडक्ट्स के साथ-साथ लोकल विकल्पों पर भी नजर रखें। थोक में खरीदारी या जरूरत के हिसाब से छोटे पैक खरीदना फायदेमंद हो सकता है। सरकार से भी उम्मीद है कि महंगाई पर काबू पाने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं, खासकर खाद्य तेल और पैकेजिंग सामग्री पर।

FMCG क्षेत्र भारत की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह न सिर्फ रोजगार देता है बल्कि उपभोक्ता भावना का भी सूचक है। फिलहाल स्थिति चुनौतीपूर्ण है, लेकिन अगर वैश्विक तनाव कम हुआ और मानसून अच्छा रहा तो राहत मिल सकती हैं।

अभी के लिए आम आदमी को महंगाई का यह नया झटका सहना पड़ सकता है। कंपनियों की कीमत बढ़ोतरी की खबरें लगातार आ रही हैं और उपभोक्ताओं को तैयार रहना चाहिए। बाजार विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि शॉर्ट टर्म में खर्च पर नियंत्रण रखें और लंबे समय में विविध विकल्पों की तलाश करें।

Read More Here

 

आपको यह भी पसंद आ सकता है
Leave A Reply

Your email address will not be published.