E20 Fuel Protest: केजरीवाल का नेशनल टाउनहॉल और तहसीन पूनावाला की भूख हड़ताल से गरमाई दिल्ली की राजनीति
केजरीवाल का नेशनल टाउनहॉल, पूनावाला की भूख हड़ताल से E20 विवाद तेज
E20 Fuel Protest: देश की राजधानी नई दिल्ली में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20 Fuel) की अनिवार्य नीति के खिलाफ विरोध की लहर अब एक बड़े राष्ट्रव्यापी आंदोलन का रूप धारण कर चुकी है। शनिवार को दिल्ली की सड़कों और राजनीतिक गलियारों में केंद्र सरकार की इथेनॉल ब्लेंडिंग नीति के खिलाफ दो अलग-अलग मोर्चों पर जोरदार विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहा है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल नई दिल्ली स्थित संविधान क्लब (Constitution Club) में ‘नेशनल टाउनहॉल अगेंस्ट E20’ का आयोजन कर रहे हैं। दूसरी ओर, सामाजिक कार्यकर्ता और उद्यमी तहसीन पूनावाला एपीजे अब्दुल कलाम मार्ग से तीस जनवरी मार्ग (गांधी स्मृति) तक मौन मार्च निकालकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठने की रणनीति पर अमल कर रहे हैं। दोनों ही धड़े अपने-अपने तरीकों से सरकार की नीति, पारदर्शिता और उपभोक्ताओं को मिलने वाले ईंधन के विकल्पों पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं।
अरविंद केजरीवाल का ‘नेशनल टाउनहॉल अगेंस्ट E20’ और बड़ा राजनीतिक दांव
आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने E20 पेट्रोल के खिलाफ अपनी मुहिम को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने के लिए शनिवार दोपहर साढ़े ग्यारह बजे संविधान क्लब में विशाल नेशनल टाउनहॉल का आयोजन किया है। केजरीवाल के अनुसार, इस टाउनहॉल में ऑटोमोबाइल विशेषज्ञ, यांत्रिक अभियंता, देश भर के प्रभावित वाहन मालिक, टैक्सी यूनियन प्रतिनिधि और नागरिक समाज के लोग एकत्र हो रहे हैं। जो लोग व्यक्तिगत रूप से दिल्ली नहीं पहुंच सकते, उनके लिए पार्टी ने वर्चुअल माध्यमों और विशेष व्हाट्सएप नंबरों की व्यवस्था की है ताकि देश के कोने-कोने से लोग इस परिचर्चा से सीधे जुड़ सकें।
केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी साझा करते हुए बताया था कि इस टाउनहॉल मंच पर देश की एक बेहद जानी-मानी हस्ती भी उनके साथ उपस्थित रहेगी, जो जनता की शिकायतों को सुनेगी और E20 नीति के खिलाफ भावी रणनीति तय करने में अहम भूमिका निभाएगी। आम आदमी पार्टी का दावा है कि E20 के खिलाफ चलाई जा रही ऑनलाइन याचिका पर अब तक लाखों लोग अपने डिजिटल हस्ताक्षर दर्ज करा चुके हैं। केजरीवाल का तर्क है कि साल 2023 से पहले निर्मित करोड़ों वाहनों के इंजन E20 ईंधन के अनुकूल नहीं हैं, जिसके कारण वाहन मालिकों को भारी आर्थिक नुकसान, इंजन खराबी और माइलेज में गिरावट का सामना करना पड़ रहा है।
तहसीन पूनावाला का मौन मार्च और अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल
E20 नीति के खिलाफ सबसे पहले जमीनी आंदोलन शुरू करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता तहसीन पूनावाला ने शनिवार सुबह 10 बजे से अपने आंदोलन को नया रूप देने की घोषणा की है। पूनावाला की योजना अकेले गांधी स्मृति तक पदयात्रा करने और वहां मौन व्रत धारण कर भूख हड़ताल शुरू करने की है। उन्होंने देर रात सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस और प्रशासन द्वारा उन्हें इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन से रोकने की कोशिश की जा रही है और उनके आवागमन पर प्रतिबंध लगाने के प्रयास हो रहे हैं।
इससे पहले तहसीन पूनावाला के संगठन ‘टीम भारत’ ने संसद मार्ग की ओर विशाल ‘गाड़ी मार्च’ निकालने की तैयारी की थी, लेकिन केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी से हुई वार्ता के बाद सामूहिक मार्च को कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया गया था। इसके बावजूद पूनावाला व्यक्तिगत तौर पर गांधी स्मृति में सत्याग्रह करने पर अड़े हुए हैं। वे सरकार से मांग कर रहे हैं कि ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) की E20 से संबंधित रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए और उपभोक्ताओं को शुद्ध (E0) पेट्रोल चुनने का मौलिक अधिकार दिया जाए।
E20 Fuel Protest: E20 पेट्रोल क्या है और क्यों उठ रहे हैं विरोध के स्वर
केंद्र सरकार के इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम के तहत पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पारंपरिक पेट्रोल मिलाया जा रहा है। सरकार का मुख्य तर्क है कि इस नीति से कच्चे तेल के आयात पर विदेशी मुद्रा की भारी बचत होगी, प्रदूषण में कमी आएगी और गन्ने तथा अनाज की फसलों से इथेनॉल बनने के कारण देश के किसानों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा। सरकार का यह भी दावा है कि व्यापक परीक्षणों के बाद ही इस नीति को चरणबद्ध तरीके से पूरे देश में लागू किया गया है।
इसके विपरीत, देश के करोड़ों वाहन मालिकों, ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों और ट्रांसपोर्ट यूनियनों का कहना है कि 2023 से पहले बनी गाड़ियां केवल E10 या बिना इथेनॉल वाले ईंधन के लिए ही डिज़ाइन की गई थीं। इथेनॉल में नमी सोखने का गुण होता है, जिससे पुरानी गाड़ियों के फ्यूल टैंक, रबर सील, इंजेक्टर और इंजन घटकों में जंग और टूट-फूट की समस्या आ रही है। इसके साथ ही, ईंधन की क्षमता घटने के कारण वाहनों के माइलेज में 10 से 15 प्रतिशत की गिरावट आई है, जिससे आम नागरिक की जेब पर सीधा अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
उपभोक्ताओं की घटती माइलेज और ऑटोमोबाइल सेक्टर की चिंताएं
E20 ईंधन के लागू होने के बाद से ही देश के 90,000 से अधिक पेट्रोल पंपों पर बिना इथेनॉल वाला सामान्य पेट्रोल मिलना लगभग बंद हो चुका है। इससे सबसे ज्यादा परेशानी पुरानी कार, बाइक, ऑटो-रिक्शा और कमर्शियल टैक्सी चालकों को हो रही है। दिल्ली टैक्सी एंड टूरिस्ट ट्रांसपोर्टर्स एसोसिएशन जैसी संस्थाओं ने भी इस नीति के खिलाफ कड़ा ऐतराज जताया है। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि कम माइलेज और बार-बार गाड़ी के रखरखाव के बढ़ते खर्च से उनकी आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है।
इस विवाद में ऑटोमोबाइल निर्माण कंपनियों की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। अरविंद केजरीवाल ने दावा किया कि उन्होंने देश की प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियों से तकनीकी परामर्श किया है, जिसमें यह बात सामने आई है कि पुराने इंजनों में E20 का निरंतर उपयोग हानिकारक साबित हो सकता है। विपक्षी दल और प्रदर्शनकारी मांग कर रहे हैं कि पेट्रोल पंपों पर कम से कम एक डिस्पेंसर बिना इथेनॉल वाले (E0) या E10 पेट्रोल का रखा जाना चाहिए ताकि उपभोक्ताओं के पास विकल्प चुनने की आजादी हो।
E20 नीति पर गरमाती राजनीति और भविष्य का परिदृश्य
हाल के दिनों में देश भर में हुए छात्र आंदोलनों और राजनीतिक दबावों का हवाला देते हुए विपक्षी नेता इस मुद्दे को सीधे जन-आकांक्षाओं से जोड़ रहे हैं। अरविंद केजरीवाल ने हाल ही में बयान दिया था कि जिस तरह जनता के दबाव के आगे सरकार को झुकना पड़ा, उसी तरह E20 के जन-विरोधी फैसले पर भी केंद्र सरकार को पुनर्विचार करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। आंदोलनकारियों का आरोप है कि नीति में पारदर्शिता का अभाव है और इससे इथेनॉल उत्पादन से जुड़ी कुछ विशिष्ट कंपनियों को फायदा पहुंच रहा है।
शनिवार को दिल्ली में एक साथ आयोजित (E20 Fuel Protest) हो रहे केजरीवाल के नेशनल टाउनहॉल और तहसीन पूनावाला की भूख हड़ताल ने केंद्र सरकार पर प्रशासनिक और राजनीतिक दबाव बढ़ा दिया है। अब देखना यह होगा कि क्या सरकार उपभोक्ताओं को ईंधन का विकल्प देने या E20 नीति की स्वतंत्र वैज्ञानिक समीक्षा कराने के लिए तैयार होती है, या फिर यह विवाद आने वाले दिनों में और अधिक उग्र रूप धारण करेगा।
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