E-Cycle Rules India: 1 अक्टूबर से नए नियम, लाइसेंस-रजिस्ट्रेशन से मिलेगी छूट
25 किमी/घंटे तक की लो-स्पीड ई-साइकिल मोटर वाहन श्रेणी से बाहर, लाइसेंस-आरटीओ की बाध्यता नहीं
E-Cycle Rules India: देश में पर्यावरण-अनुकूल और किफायती आवागमन को गति देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रिक साइकिलों (ई-साइकिल) के नियमन के लिए एक व्यापक नीतिगत रूपरेखा तैयार की है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर यान नियम (CMVR) में संशोधन का आधिकारिक प्रारूप जारी किया है, जिसके तहत निर्धारित तकनीकी मानकों पर खरी उतरने वाली कम गति की ई-साइकिलों को सामान्य मोटर वाहनों की कानूनी श्रेणी से पूरी तरह बाहर रखा जाएगा। यह नए प्रावधान 1 अक्टूबर 2026 से पूरे देश में प्रभावी होने जा रहे हैं।
वर्तमान में ई-साइकिल को लेकर कोई पृथक और सुस्पष्ट कानूनी परिभाषा न होने के कारण चालकों और निर्माताओं को अक्सर नियामक असमंजस का सामना करना पड़ता था। नए नियमों के लागू होने के बाद पैडल-असिस्ट और लो-स्पीड ई-साइकिल चालकों को पारंपरिक दोपहिया वाहनों की तरह ड्राइविंग लाइसेंस, आरटीओ पंजीकरण और नियमित बीमा जैसी कानूनी औपचारिकताओं से पूर्ण मुक्ति मिलने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
E-Cycle Rules India: 25 किमी/घंटे की गति सीमा और मोटर पावर की बाध्यता
मंत्रालय द्वारा जारी प्रारूप के अनुसार, किसी भी दोपहिया इलेक्ट्रिक साइकिल को मोटर वाहन तभी नहीं माना जाएगा जब वह विशिष्ट तकनीकी शर्तों को पूरा करती हो। इसके तहत ई-साइकिल में 0.6 किलोवाट (600 वॉट) से कम 30-मिनट की निरंतर पावर वाली इलेक्ट्रिक मोटर लगी होनी चाहिए और इसकी अधिकतम गति सीमा 25 किलोमीटर प्रति घंटा से कम होनी अनिवार्य है।
सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ‘पैडल असिस्ट’ सिस्टम पर कड़े नियम लागू किए गए हैं। ई-साइकिल की गति जैसे ही 25 किमी/घंटा तक पहुंचेगी, मोटर का पावर आउटपुट स्वतः कट-ऑफ (बंद) हो जाना चाहिए। इसके अलावा, यदि चालक पैडल मारना बंद कर देता है, तब भी मोटर को तत्काल निष्क्रिय होना पड़ेगा। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य वाहन को हमेशा नियंत्रित गति में रखना और बिना पैडलिंग के अत्यधिक थ्रॉटल के अनियंत्रित उपयोग को रोकना है।
ब्रेक सिस्टम और रेट्रो-रिफ्लेक्टिव डिवाइस लगाना अनिवार्य
सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए प्रारूप में मजबूत और कुशल ब्रेकिंग सिस्टम को अनिवार्य घोषित किया गया है, ताकि आपातकालीन परिस्थितियों में साइकिल को न्यूनतम दूरी पर सुरक्षित रूप से रोका जा सके।
इसके साथ ही रात के समय सड़कों पर दृश्यता बढ़ाने और सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए ई-साइकिल के आगे सफेद रंग का और पीछे लाल रंग का रेट्रो-रिफ्लेक्टिव डिवाइस लगाना बाध्यकारी होगा। ये रिफ्लेक्टर्स अंधेरे में अन्य भारी व तेज रफ्तार वाहनों की रोशनी पड़ते ही चमकेंगे, जिससे चालक की मौजूदगी दूर से ही स्पष्ट रूप से दर्ज हो सकेगी।
छात्रों और दैनिक यात्रियों को राहत, लास्ट-माइल मोबिलिटी को गति
नियमों के सरलीकरण से शहरी क्षेत्रों में स्कूल-कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों, कार्यालय जाने वाले कर्मचारियों और अंतिम छोर तक आवागमन (लास्ट-माइल कनेक्टिविटी) के लिए ई-साइकिल का उपयोग तेजी से बढ़ेगा। पेट्रोल-डीजल की महंगाई और पारंपरिक इलेक्ट्रिक दोपहिया की तुलना में ई-साइकिल बेहद न्यूनतम परिचालन लागत पर दैनिक यात्रा की सुविधा देती है।
आरटीओ पंजीकरण और लाइसेंस की बाध्यता समाप्त होने से ई-साइकिल की खरीद और संचालन की प्रक्रिया पूरी तरह झंझट-मुक्त हो जाएगी। इसके अलावा, कम चार्जिंग समय और सुगम रख-रखाव के चलते यह आम मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए व्यक्तिगत आवागमन का एक सुरक्षित, स्वस्थ और सस्ता माध्यम बनकर उभरेगी।
E-Cycle Rules India: उद्योग जगत को मिलेगी नीतिगत स्पष्टता, 30 दिनों में मांगी गई आपत्तियां
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के स्तर से जारी किए गए इस प्रारूप पर आम नागरिकों, वाहन निर्माताओं, तकनीकी विशेषज्ञों और संबंधित हितधारकों से अगले 30 दिनों के भीतर सुझाव व आपत्तियां आमंत्रित की गई हैं। इस निर्धारित अवधि में प्राप्त सभी सुझावों के परीक्षण और आवश्यक संशोधनों के उपरांत अंतिम अधिसूचना जारी की जाएगी।
ई-साइकिल उद्योग लंबे समय से एक मानकीकृत विनियामक ढांचे की मांग कर रहा था। नियमों में आई इस स्पष्टता से घरेलू निर्माताओं और मोबिलिटी स्टार्टअप्स को अनुसंधान, स्थानीय स्तर पर पार्ट्स असेंबलिंग और विनिर्माण बढ़ाने में मदद मिलेगी। गुणवत्ता के ये मानक भविष्य में भारतीय ई-साइकिल निर्माताओं के लिए वैश्विक निर्यात के द्वार भी खोलेंगे, जिससे देश में हरित और सतत परिवहन क्रांति को नई दिशा मिलेगी।
Read more here