Dry Eye Syndrome: आंखों में बार-बार जलन और सूखापन क्यों होता है? जानें 5 बड़े कारण और बचाव
Dry Eye Syndrome: आंखों में बार-बार जलन और सूखापन क्यों होता है? जानें 5 बड़े कारण और बचाव
Dry Eye Syndrome: आजकल कई लोगों को आंखों में जलन, चुभन, खुजली या भारीपन की शिकायत रहती है। लंबे समय तक मोबाइल या लैपटॉप देखने के बाद यह परेशानी और बढ़ जाती है। कुछ को लगता है जैसे आंख में कोई कण फंस गया हो, जबकि कई बार आंखें लाल हो जाती हैं या नजर धुंधली लगती है। हैरानी की बात यह है कि सूखेपन की समस्या में भी आंखों से पानी निकल सकता है। इन लक्षणों को सिर्फ थकान मानकर नजरअंदाज करना सही नहीं है। ये ड्राई आई सिंड्रोम यानी आंखों में नमी की कमी के संकेत हो सकते हैं।
अमेरिकी नेशनल आई इंस्टीट्यूट के अनुसार, जब आंखों में पर्याप्त आंसू नहीं बनते या आंसुओं की गुणवत्ता ठीक नहीं रहती, तब यह स्थिति पैदा होती है। आंसू आंखों की सतह को नम रखने, धूल-कणों को साफ करने और संक्रमण से बचाने का काम करते हैं। इनकी कमी से जलन, लालिमा और असुविधा बढ़ जाती है।
ड्राई आई सिंड्रोम क्या है और इसके सामान्य लक्षण
ड्राई आई सिंड्रोम एक आम आंखों की समस्या है, जिसमें आंसू बनाने वाली ग्रंथियां पर्याप्त मात्रा में या सही गुणवत्ता के आंसू नहीं बना पातीं। इससे आंखों की सतह सूखने लगती है और जलन, खुजली, चुभन या रेत जैसी अनुभूति होती है। कई लोगों को सुबह उठते ही या लंबे समय तक ध्यान केंद्रित करने के बाद यह परेशानी ज्यादा महसूस होती है।
लक्षणों में आंखों का लाल होना, थकान, रोशनी से असहजता और कभी-कभी नजर धुंधला होना शामिल है। दिलचस्प बात यह है कि सूखेपन की प्रतिक्रिया में शरीर अतिरिक्त आंसू बना सकता है, जिससे पानी निकलने लगता है। इसलिए आंखों से पानी आना हमेशा पर्याप्त नमी का संकेत नहीं होता। अगर ये लक्षण हफ्तों तक बने रहें तो जांच जरूरी हो जाती है।
लंबे समय तक स्क्रीन देखने और पलक झपकाने में कमी
सबसे आम कारणों में से एक है लंबे समय तक मोबाइल, लैपटॉप या कंप्यूटर पर काम करना। स्क्रीन पर ध्यान देते समय लोग सामान्य से कम पलकें झपकाते हैं। हर पलक झपकाने पर आंसुओं की एक पतली परत आंखों की सतह पर फैलती है और नमी बनाए रखती है। झपकाने की आवृत्ति कम होने से यह परत जल्दी सूख जाती है।
इससे जलन, भारीपन और सूखापन बढ़ जाता है। ऑफिस में घंटों स्क्रीन के सामने बैठने वाले या सोशल मीडिया पर समय बिताने वाले लोग इस समस्या से ज्यादा प्रभावित होते हैं। स्क्रीन की ऊंचाई भी मायने रखती है। अगर स्क्रीन आंखों के स्तर से ऊपर हो तो पलकें ज्यादा खुलती हैं और सूखने की संभावना बढ़ जाती है।
एसी, पंखे, धूल और उम्र से जुड़े कारण
एयर कंडीशनर की ठंडी और सूखी हवा, पंखे की सीधी हवा, धूल, धुआं या कम नमी वाला वातावरण भी आंखों की नमी कम कर देता है। ऐसे वातावरण में आंसू जल्दी वाष्पित हो जाते हैं और चुभन तथा खुजली बढ़ जाती है। सर्दियों में हीटर चलाने या लंबे समय तक एयर कंडीशंड कमरे में रहने से भी यही असर होता है।
उम्र बढ़ने के साथ आंसू बनाने की क्षमता धीरे-धीरे कम हो सकती है। 50 साल से अधिक उम्र के लोगों में ड्राई आई की आशंका ज्यादा रहती है। महिलाओं में गर्भावस्था, मेनोपॉज या हार्मोनल बदलाव के दौरान यह समस्या बढ़ सकती है। हार्मोन आंसू ग्रंथियों के कामकाज को प्रभावित करते हैं, इसलिए इस चरण में आंखों की देखभाल और जरूरी हो जाती है।
कुछ दवाएं और अन्य बीमारियों का असर
एलर्जी, सर्दी-जुकाम, हाई ब्लड प्रेशर, डिप्रेशन या कुछ अन्य बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं आंसू उत्पादन को प्रभावित कर सकती हैं। एंटीहिस्टामाइन, कुछ ब्लड प्रेशर की दवाएं या एंटीडिप्रेसेंट्स में यह प्रभाव देखा गया है। अगर कोई दवा शुरू करने के बाद आंखों में सूखापन बढ़े तो डॉक्टर से सलाह लें। अपनी मर्जी से दवा बंद न करें।
डायबिटीज, थायरॉइड की समस्या, रूमेटाइड आर्थराइटिस और स्जोग्रेन सिंड्रोम जैसी स्थितियां भी आंखों की नमी पर असर डाल सकती हैं। स्जोग्रेन सिंड्रोम में शरीर की आंसू और लार बनाने वाली ग्रंथियां प्रभावित होती हैं, जिससे आंखों और मुंह दोनों में सूखापन होता है। इन बीमारियों से पीड़ित लोगों को आंखों की नियमित जांच करवानी चाहिए।
बचाव के आसान तरीके और डॉक्टर से कब मिलें
आंखों की जलन और सूखेपन से बचने के लिए कुछ आसान आदतें अपनाएं। स्क्रीन पर काम करते समय हर 20 मिनट में 20 सेकंड के लिए दूर देखें और जानबूझकर पलकें झपकाएं। स्क्रीन को आंखों के स्तर से थोड़ा नीचे रखें। एसी या पंखे की सीधी हवा आंखों पर न पड़ने दें। धूल और धुएं वाले स्थानों से बचें। कॉन्टैक्ट लेंस पहनने पर परेशानी बढ़े तो कुछ समय चश्मे का इस्तेमाल करें।
जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से लुब्रिकेटिंग आई ड्रॉप्स यानी आर्टिफिशियल टीयर्स का इस्तेमाल किया जा सकता है। ये आंखों की सतह पर नमी बनाए रखते हैं। अगर आंखों में बार-बार सूखापन, जलन या खुजली हो रही हो और कई हफ्तों तक परेशानी बनी रहे, तो नेत्र विशेषज्ञ से जांच कराएं। आंखों में तेज दर्द, अत्यधिक लालिमा, रोशनी से ज्यादा असहजता या नजर में अचानक बदलाव होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
नियमित आंखों की जांच, सही जीवनशैली और समय पर इलाज से ड्राई आई की समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है। आंखों की नमी बनाए रखना न सिर्फ आराम देता है, बल्कि लंबे समय तक आंखों के स्वास्थ्य की भी रक्षा करता है। अगर लक्षण हल्के हों तो ऊपर बताए गए उपायों से राहत मिल सकती है, लेकिन लगातार परेशानी पर विशेषज्ञ की सलाह लेना सबसे सुरक्षित कदम है।
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