Fatehpur Murder Case: पत्नी की हत्या में स्क्रिप्ट राइटर पति और भोजपुरी अभिनेत्री दोषी, DNA टेस्ट से खुला राज
फतेहपुर के खागा क्षेत्र में दिसंबर 2021 में हुई योगमाया की हत्या के मामले में अदालत ने पति इंद्रमोहन लोधी और भोजपुरी अभिनेत्री नेहा वर्मा को दोषी ठहराया है।
Fatehpur Murder Case: उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जनपद से रिश्तों को शर्मसार करने वाले एक सनसनीखेज हत्याकांड में अदालत ने अहम न्यायिक निर्णय सुनाया है। करीब पांच साल पहले हुई विवाहिता योगमाया की नृशंस हत्या के मामले में अपर सत्र न्यायालय ने मृतका के स्क्रिप्ट राइटर पति इंद्रमोहन लोधी और उसकी प्रेमिका भोजपुरी फिल्म अभिनेत्री नेहा वर्मा को हत्या का दोषी करार दिया है। भोजपुरी सिनेमा के लिए पटकथा और कहानियां लिखने वाले पति ने प्रेम प्रसंग और अवैध संबंधों के चलते अपनी ही पत्नी को रास्ते से हटाने की साजिश रची थी। वैज्ञानिक साक्ष्यों, डीएनए जांच रिपोर्ट और चिकित्सीय परीक्षण के आधार पर अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है, जबकि सजा के बिंदु पर अंतिम फैसला 6 नवंबर 2026 को सुनाया जाएगा।
Fatehpur Murder Case: फतेहपुर के खागा क्षेत्र में रची गई थी खूनी साजिश
यह दिल दहला देने वाला मामला फतेहपुर जिले के खागा कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत गुलरियापुर मजरे कूरा गांव का है। मृतका योगमाया का विवाह 10 फरवरी 2015 को इंद्रमोहन लोधी के साथ हिंदू रीति-रिवाज से संपन्न हुआ था। मृतका के भाई सत्यप्रकाश द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी के अनुसार, शादी के कुछ समय बाद से ही पति और ससुराल पक्ष द्वारा अतिरिक्त दहेज की मांग को लेकर योगमाया को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा था।
इसी बीच इंद्रमोहन लोधी ने भोजपुरी फिल्म उद्योग में बतौर कहानीकार और स्क्रिप्ट राइटर काम करना शुरू किया। फिल्मी गतिविधियों के दौरान उसकी मुलाकात भोजपुरी फिल्मों की उभरती अभिनेत्री नेहा वर्मा से हुई। धीरे-धीरे दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और यह जान-पहचान प्रेम प्रसंग में बदल गई। जब योगमाया को इस अवैध संबंध की जानकारी हुई, तो उसने इसका कड़ा विरोध किया। परिजनों का आरोप है कि अपनी राह का कांटा हटाने के लिए इंद्रमोहन और अभिनेत्री नेहा वर्मा ने मिलकर योगमाया की हत्या की योजना तैयार की और 25 दिसंबर 2021 की रात वारदात को अंजाम दे डाला।
मृतका के नाखूनों में मिले अभिनेत्री के बाल, डीएनए रिपोर्ट ने तय की भूमिका
इस अंधे कत्ल की गुत्थी सुलझाने में फॉरेंसिक साइंस और डीएनए परीक्षण ने सबसे निर्णायक भूमिका निभाई। घटना के समय योगमाया ने अपनी जान बचाने के लिए हमलावरों से कड़ा संघर्ष किया था। इसी आत्मरक्षा के दौरान आरोपी अभिनेत्री नेहा वर्मा के कुछ बाल टूटकर योगमाया के नाखूनों में फंस गए थे। पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने घटना स्थल के निरीक्षण के दौरान मृतका के नाखूनों से उन बालों को सुरक्षित जब्त कर विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा था।
डीएनए जांच में नाखूनों से बरामद बाल शत-प्रतिशत अभिनेत्री नेहा वर्मा के डीएनए प्रोफाइल से मेल खा गए। इसके अलावा घटना के तुरंत बाद कराए गए चिकित्सीय परीक्षण में नेहा वर्मा के शरीर पर संघर्ष के कारण बने नाखूनों की खरोंचों के ताजा निशान पाए गए थे। इतना ही नहीं, घटनास्थल पर फर्श और दीवारों से मिले खून के नमूनों की जब डीएनए प्रोफाइलिंग कराई गई, तो वह इंद्रमोहन लोधी के रक्त समूह और डीएनए से मेल खा गई। इन अकाट्य वैज्ञानिक प्रमाणों ने आरोपियों के झूठे बयानों की हवा निकाल दी और पुलिस की चार्जशीट को अदालत में बेहद पुख्ता बना दिया।
पांच वर्षों तक चली अदालती प्रक्रिया, नौ गवाहों के बयानों से साबित हुआ जुर्म
वारदात के बाद खागा कोतवाली पुलिस ने मृतका के भाई की तहरीर पर हत्या और आपराधिक षड्यंत्र की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया था। विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने वैज्ञानिक और फॉरेंसिक रिपोर्टों के साथ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। यह मामला अपर सत्र न्यायालय, कोर्ट संख्या चार की पीठासीन अधिकारी चेतना चौहान की अदालत में विचाराधीन था।
विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से मामले को साबित करने के लिए कुल नौ महत्वपूर्ण गवाह पेश किए गए, जिनमें घटना से जुड़े प्रत्यक्षदर्शी, पंचनामा व विवेचना करने वाले पुलिस अधिकारी, फॉरेंसिक विशेषज्ञ और पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्साधिकारी शामिल थे। बचाव पक्ष की तमाम दलीलों और जिरह को खारिज करते हुए अदालत ने पाया कि परिस्थितियों की कड़ियां और डीएनए जांच के वैज्ञानिक साक्ष्य सीधे तौर पर दोनों आरोपियों की संलिप्तता सिद्ध करते हैं। इसके बाद न्यायाधीश ने इंद्रमोहन लोधी और नेहा वर्मा को भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं में हत्या का दोषी ठहराते हुए न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजने का आदेश दिया।
6 नवंबर 2026 को अदालत तय करेगी सजा की अवधि
अदालत द्वारा दोषसिद्धि का फैसला सुनाए जाने के बाद अब कानूनी प्रक्रिया के तहत सजा के निर्धारण की बारी है। अदालत ने दोनों दोषियों की सजा के प्रश्न पर अंतिम सुनवाई के लिए 6 नवंबर 2026 की तारीख मुकर्रर की है। उसी दिन यह तय होगा कि अदालत दोनों को आजीवन कारावास देती है या फांसी की सजा सुनाती है।
लगभग पांच वर्ष तक न्याय की आस लगाए बैठे मृतका योगमाया के मायके पक्ष ने अदालत के इस फैसले पर संतोष व्यक्त किया है। परिजनों का कहना है कि उन्होंने अपनी बेटी को खोया है और वे दोषियों को कठोरतम दंड दिलाने की मांग करेंगे।
Fatehpur Murder Case: फॉरेंसिक साक्ष्य और आपराधिक न्याय प्रणाली की मिसाल
फतेहपुर का यह हत्याकांड आपराधिक मामलों में फॉरेंसिक साक्ष्यों की महत्ता को रेखांकित करने वाली एक बड़ी नजीर बन गया है। अक्सर ऐसे मामलों में जहां प्रत्यक्षदर्शी गवाह मुकर जाते हैं या चश्मदीदों का अभाव होता है, वहां अपराधियों द्वारा छोड़े गए जैविक साक्ष्य—जैसे नाखून में फंसे बाल, त्वचा के अंश और रक्त के धब्बे—न्याय दिलाने में मील का पत्थर साबित होते हैं। डीएनए तकनीक की मदद से ही इस हाई-प्रोफाइल मामले में एक फिल्मी स्क्रिप्ट राइटर और अभिनेत्री की साजिश का पर्दाफाश हो सका।
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