क्या रात 2-3 बजे खुल जाती है आपकी नींद? हो सकता है मेंटेनेंस इन्सोम्निया, जानें कारण और उपचार

तनाव, दर्द और उम्र हैं मुख्य वजहें, CBT-I थेरेपी से संभव है इलाज

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Maintenance Insomnia: क्या आप रात को सोने के बाद आधी रात या सुबह 2-3 बजे अचानक जाग जाते हैं और फिर घंटों करवटें बदलते रहते हैं? यदि यह समस्या आपके साथ नियमित रूप से हो रही है तो यह केवल साधारण बेचैनी नहीं बल्कि ‘मेंटेनेंस इन्सोम्निया’ नामक गंभीर नींद विकार का संकेत हो सकता है। अधिकांश लोग इन्सोम्निया को केवल नींद न आने की समस्या मानते हैं, लेकिन वास्तविकता में यह विकार कई प्रकार का होता है। कुछ लोगों को रात में सोने में परेशानी आती है, कुछ की नींद बहुत जल्दी खुल जाती है, जबकि कुछ लोग आधी रात में जागने के बाद दोबारा सो नहीं पाते। नींद को बनाए रखने में असमर्थता की यह विशिष्ट स्थिति ही मेंटेनेंस इन्सोम्निया कहलाती है।

यह समस्या केवल एक-दो रातों की बात नहीं होती, बल्कि यदि यह सप्ताह में तीन या अधिक बार हो रहा हो और कई हफ्तों से जारी हो तो यह चिंता का विषय है। मेंटेनेंस इन्सोम्निया आपके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। दिन भर थकान, एकाग्रता की कमी, चिड़चिड़ापन और कार्यक्षमता में कमी इसके सामान्य परिणाम हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि मेंटेनेंस इन्सोम्निया क्या है, इसके मुख्य कारण क्या हैं और इससे कैसे निपटा जा सकता है।

मेंटेनेंस इन्सोम्निया क्या है?

  • मेंटेनेंस इन्सोम्निया एक प्रकार का नींद विकार है जिसमें व्यक्ति को सोने में तो कोई खास परेशानी नहीं होती, लेकिन रात के बीच में या बहुत सुबह उसकी नींद टूट जाती है और फिर से सो पाना मुश्किल हो जाता है।

  • यह समस्या सामान्य नींद में खलल से अलग है। कभी-कभार रात में जागना सामान्य है, लेकिन जब यह नियमित हो जाए और व्यक्ति 30 मिनट या उससे अधिक समय तक जागता रहे, तो यह मेंटेनेंस इन्सोम्निया का संकेत है।

  • इस स्थिति में व्यक्ति आमतौर पर रात 2 बजे से 4 बजे के बीच जागता है। यह समय सर्कैडियन रिदम (शरीर की आंतरिक घड़ी) के अनुसार नींद का सबसे गहरा चरण होता है, इसलिए इस समय जागना विशेष रूप से परेशान करने वाला होता है।

  • मेंटेनेंस इन्सोम्निया से पीड़ित व्यक्ति अक्सर चिंतित रहता है कि वह फिर से सो पाएगा या नहीं। यह चिंता ही समस्या को और बढ़ा देती है, एक दुष्चक्र बन जाता है।

  • यह समस्या किसी भी उम्र के लोगों को प्रभावित कर सकती है, लेकिन वयस्कों और बुजुर्गों में अधिक देखी जाती है।

Maintenance Insomnia: तनाव और चिंता सबसे आम कारण

मेंटेनेंस इन्सोम्निया का सबसे प्रमुख कारण मानसिक तनाव और चिंता है। आधुनिक जीवनशैली में काम का दबाव, वित्तीय चिंताएं, पारिवारिक समस्याएं और भविष्य की अनिश्चितता लगातार दिमाग पर बोझ डालती हैं।

जब व्यक्ति रात में अचानक जागता है तो उसका दिमाग सक्रिय हो जाता है। वह अपनी समस्याओं, कार्यों और चिंताओं के बारे में सोचने लगता है। यह मानसिक गतिविधि फिर से सोना मुश्किल बना देती है। कार्यालय का तनाव विशेष रूप से हानिकारक है। डेडलाइन, प्रतिस्पर्धा, और काम के प्रदर्शन की चिंता रात को भी व्यक्ति का पीछा नहीं छोड़ती।

रात में आने वाले डरावने सपने या बुरे सपने भी नींद तोड़ देते हैं। पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) से पीड़ित लोगों में यह समस्या आम है। सामान्यीकृत चिंता विकार (Generalized Anxiety Disorder) और अवसाद जैसी मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं भी मेंटेनेंस इन्सोम्निया का कारण बनती हैं।

नींद न आने की चिंता स्वयं एक कारण बन जाती है। व्यक्ति सोचता है “मैं फिर से नहीं सो पाऊंगा” और यह विचार ही नींद को दूर भगा देता है।

शारीरिक दर्द और परेशानी

शारीरिक दर्द और मेंटेनेंस इन्सोम्निया के बीच सीधा संबंध है। दर्द रात की नींद को गंभीर रूप से प्रभावित करता है।

पुरानी या क्रॉनिक दर्द की समस्याएं जैसे गठिया, फाइब्रोमायल्जिया, या माइग्रेन रात में नींद तोड़ देती हैं। जब व्यक्ति करवट बदलता है या हिलता-डुलता है तो दर्द बढ़ जाता है। पीठ दर्द एक बहुत आम कारण है। खराब मुद्रा, अनुचित गद्दे या तकिए के कारण होने वाला पीठ दर्द रात भर परेशान करता रहता है।

अस्थायी चोटें या मोच भी नींद में खलल डाल सकती हैं। हालांकि ये समस्याएं कुछ समय बाद ठीक हो जाती हैं, लेकिन ठीक होने तक नींद प्रभावित रहती है। कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव भी दर्द या बेचैनी पैदा कर सकते हैं जो नींद में बाधा डालते हैं।

Maintenance Insomnia: उम्र और लैंगिक कारक

उम्र बढ़ने के साथ मेंटेनेंस इन्सोम्निया की समस्या बढ़ती है। बुजुर्गों में यह विशेष रूप से आम है।

वृद्धावस्था में कई स्वास्थ्य समस्याएं विकसित होती हैं जो नींद को प्रभावित करती हैं। न्यूरोपैथी (तंत्रिका संबंधी समस्याएं), पेशाब संबंधी विकार और एसिड रिफ्लक्स जैसी परेशानियां आम हो जाती हैं। बार-बार पेशाब जाने की आवश्यकता बुजुर्गों में नींद टूटने का प्रमुख कारण है। प्रोस्टेट समस्याओं या मूत्राशय की कमजोरी के कारण रात में कई बार उठना पड़ता है।

महिलाओं में हार्मोनल परिवर्तन विशेष भूमिका निभाते हैं। 2015 में संयुक्त राज्य अमेरिका में हुए एक अध्ययन में पाया गया कि मेनोपॉज की उम्र नजदीक आने पर महिलाओं में मेंटेनेंस इन्सोम्निया का खतरा काफी बढ़ जाता है। रजोनिवृत्ति के दौरान एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के स्तर में उतार-चढ़ाव हॉट फ्लैशेज (गर्मी की लहरें) और रात को पसीना आने का कारण बनते हैं, जो नींद तोड़ देते हैं।

गर्भावस्था के दौरान भी हार्मोनल बदलाव, शारीरिक असुविधा और चिंता के कारण नींद प्रभावित होती है।

नींद का वातावरण

कई बार आस-पास का वातावरण नींद बनाए रखने में बाधक बनता है। एक अच्छी नींद के लिए उचित माहौल बेहद जरूरी है। शोर-शराबा एक प्रमुख समस्या है। सड़क का ट्रैफिक, पड़ोसियों की आवाज, या घर में अन्य लोगों की गतिविधियां रात में नींद तोड़ सकती हैं।

अत्यधिक रोशनी भी हानिकारक है। खिड़की से आने वाली स्ट्रीट लाइट, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की LED लाइटें, या डिजिटल घड़ी की रोशनी नींद में बाधा डाल सकती है। कमरे का तापमान भी महत्वपूर्ण है। बहुत गर्मी या बहुत ठंड दोनों ही नींद खराब करते हैं। आदर्श नींद तापमान लगभग 18-20 डिग्री सेल्सियस माना जाता है।

असुविधाजनक बिस्तर या गद्दा रात भर परेशानी का कारण बनता है। पुराना या खराब गद्दा पीठ दर्द और बेचैनी पैदा करता है। साथी का तेज खर्राटे लेना भी एक आम समस्या है। यह न केवल नींद तोड़ता है बल्कि फिर से सोना भी मुश्किल बना देता है।

Maintenance Insomnia: इलाज के विकल्प

मेंटेनेंस इन्सोम्निया का उपचार संभव है। कई प्रभावी तरीके उपलब्ध हैं जो इस समस्या से छुटकारा दिला सकते हैं।

  • कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी फॉर इन्सोम्निया (CBT-I): यह सबसे प्रभावी और लंबे समय तक चलने वाला उपचार माना जाता है। इसमें विचारों, आदतों और व्यवहार का विश्लेषण किया जाता है जो नींद को प्रभावित करते हैं। आमतौर पर इसमें छह से आठ सत्र होते हैं। प्रशिक्षित चिकित्सक नकारात्मक विचारों को पहचानने और बदलने में मदद करते हैं।

  • दवाइयां: गंभीर मामलों में डॉक्टर सीमित समय के लिए नींद की दवाएं लिख सकते हैं। हालांकि, ये केवल अल्पकालिक समाधान हैं और लंबे समय तक उपयोग से निर्भरता बन सकती है। दवाओं का उपयोग हमेशा डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए।

  • सोने की सही दिनचर्या: एक नियमित और शांतिपूर्ण सोने की दिनचर्या बनाएं। हर रात एक ही समय पर सोएं और सुबह एक ही समय पर उठें। सोने से 30-60 मिनट पहले सभी डिजिटल उपकरणों को बंद कर दें। मोबाइल, टैबलेट और कंप्यूटर की स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी मेलाटोनिन उत्पादन को प्रभावित करती है।

  • विश्राम तकनीकें: गहरी सांस लेने के व्यायाम, प्रगतिशील मांसपेशी विश्राम, ध्यान और योगनिद्रा जैसी तकनीकें मन को शांत करने और फिर से सो पाने में मदद करती हैं।

क्या न करें?

कुछ आदतें मेंटेनेंस इन्सोम्निया को बढ़ाती हैं, इनसे बचना जरूरी है।

  • शाम या रात को कैफीन युक्त पेय जैसे कॉफी, चाय या एनर्जी ड्रिंक पीने से बचें। कैफीन की प्रभाविता 6-8 घंटे तक रह सकती है।

  • दिन में सोने से बचें। दिन की नींद रात की नींद को प्रभावित करती है और नींद-जागने के चक्र को बिगाड़ देती है।

  • रात में जागने पर घड़ी देखने से बचें। यह चिंता बढ़ाता है और सोना और मुश्किल बना देता है।

Maintenance Insomnia: निष्कर्ष

मेंटेनेंस इन्सोम्निया एक गंभीर लेकिन उपचार योग्य समस्या है। तनाव, दर्द, उम्र और खराब नींद वातावरण इसके मुख्य कारण हैं। CBT-I थेरेपी, सही दिनचर्या और जीवनशैली में बदलाव से इससे निपटा जा सकता है। यदि समस्या लगातार बनी रहे तो डॉक्टर से परामर्श आवश्यक है।

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