Delhi Health News: दिल्ली के 78 कम्युनिटी हॉल में खुलेंगे आयुष्मान आरोग्य मंदिर
MCD ने 78 सामुदायिक भवनों में आयुष्मान आरोग्य मंदिर खोलने को मंजूरी दी, स्थानीय लोगों को मिलेगा लाभ
Delhi Health News: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे को मजबूत और विकेंद्रीकृत करने की दिशा में दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने एक दूरगामी कदम उठाया है। नगर निगम की सदन बैठक में राजधानी के विभिन्न घनी आबादी वाले वार्डों में स्थित कम उपयोग वाले 78 सामुदायिक भवनों में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ (पूर्व में आयुष्मान भारत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर) स्थापित करने के प्रस्ताव को औपचारिक स्वीकृति प्रदान कर दी गई है।
इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य नगर निगम की उन संपत्तियों का जनहित में सर्वोत्तम उपयोग सुनिश्चित करना है, जिनकी सालाना बुकिंग दर बेहद कम रहती है और जो अधिकांश समय खाली या उपेक्षित पड़ी रहती हैं। इन केंद्रों की स्थापना से स्थानीय निवासियों को सामान्य बीमारियों के उपचार, बुनियादी पैथोलॉजी जांचों और नियमित टीकाकरण के लिए दूरदराज के बड़े सरकारी अस्पतालों के चक्कर काटने से मुक्ति मिलेगी।
Delhi Health News: 78 भवनों को मिली औपचारिक मंजूरी
एमसीडी स्वास्थ्य विभाग द्वारा तैयार किए गए इस प्रस्ताव को मंगलवार को सदन में विधिवत पारित किया गया। विधिक और प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत निगम ने पूर्व में 72 सामुदायिक भवनों के लिए जारी किए गए अनापत्ति प्रमाणपत्रों (NOC) को एकमुश्त कार्योत्तर मंजूरी (Ex-post facto approval) प्रदान की। इसके साथ ही, हालिया तकनीकी एवं व्यावहारिक सर्वेक्षण के आधार पर 6 नए स्थानों को भी इस परियोजना में जोड़ा गया है, जिससे स्वास्थ्य केंद्रों के लिए चयनित सामुदायिक भवनों की कुल संख्या बढ़कर 78 हो गई है।
भविष्य में इस प्रकार की स्वास्थ्य परियोजनाओं को लालफीताशाही और प्रशासनिक विलंब से बचाने के लिए भी एक विशेष अधिकार प्रदान किया गया है। प्रस्ताव के अंतर्गत एमसीडी आयुक्त को यह सैद्धांतिक अधिकार दिया गया है कि वे स्वास्थ्य विभाग से आने वाले उपयुक्त प्रस्तावों के आधार पर निगम की अन्य संपत्तियों के लिए सीधे एनओसी जारी कर सकेंगे। इससे नगर निगम की खाली पड़ी संपत्तियों को स्वास्थ्य अधोसंरचना में तब्दील करने की गति काफी तेज होगी।
तिमारपुर, रोहिणी और मीनाक्षी गार्डन समेत कई इलाके चयनित
स्वास्थ्य विभाग की व्यवहार्यता रिपोर्ट के अनुसार, घनी आबादी और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की कमी वाले क्षेत्रों को इस योजना में प्राथमिकता दी गई है। तकनीकी सर्वेक्षण में तिमारपुर, हकीकत नगर, रोहिणी सेक्टर और पश्चिमी दिल्ली के मीनाक्षी गार्डन जैसे इलाकों में स्थित सामुदायिक भवनों को स्वास्थ्य केंद्र संचालन के लिए सर्वथा उपयुक्त पाया गया है।
विभाग ने व्यवहार्यता जांच के लिए 8 निर्मित संपत्तियों का गहन तकनीकी परीक्षण किया था, जिनमें से 6 संपत्तियों को संरचनात्मक मजबूती, वेंटिलेशन और सुगम पहुंच के आधार पर उपयुक्त पाकर नई सूची में सम्मिलित किया गया। दूसरी ओर, चार खुले भूखंडों और स्थानों को इस योजना से बाहर रखा गया है, क्योंकि वहां अधिकार क्षेत्र के विवाद, पर्याप्त खुले स्थान का अभाव अथवा पहले से अन्य निर्माण कार्य प्रगति पर थे।
द्वि-स्तरीय उपयोग मॉडल: सामुदायिक गतिविधियों पर नहीं लगेगा विराम
एमसीडी के इस फैसले की सबसे अनूठी और व्यवहारिक विशेषता इसका हाइब्रिड या द्वि-स्तरीय उपयोग मॉडल है। निगम ने यह स्पष्ट किया है कि चयनित सामुदायिक भवनों को पूरी तरह से स्वास्थ्य केंद्रों में रूपांतरित नहीं किया जाएगा। योजना के प्रारूप के अनुसार, भवन के केवल भूतल (Ground Floor) या भूतल एवं प्रथम तल के एक सीमित हिस्से का उपयोग क्लिनिकल कंसल्टेशन रूम, दवा वितरण कक्ष और बुनियादी जांच लैब के रूप में किया जाएगा।
भवन का शेष हिस्सा, जिसमें मुख्य हॉल और अन्य तल शामिल हैं, पूर्व की भांति स्थानीय नागरिकों के सामाजिक आयोजनों, पारिवारिक कार्यक्रमों, विवाह समारोहों और सार्वजनिक बैठकों के लिए बुकिंग हेतु खुला रहेगा। इस संतुलित दृष्टिकोण से स्थानीय नागरिकों की सामाजिक जरूरतों पर कोई असर नहीं पड़ेगा और साथ ही अनुपयोगी पड़ी सरकारी संपत्ति का इस्तेमाल जीवनरक्षक सेवाओं के लिए सुनिश्चित हो सकेगा।
राजधानी में प्राथमिक स्वास्थ्य नेटवर्क के विस्तार की व्यापक रूपरेखा
यह कदम दिल्ली में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की उस व्यापक कार्ययोजना का हिस्सा है, जिसके तहत प्राथमिक केंद्रों का जाल बिछाया जा रहा है। पूर्व में जुलाई 2026 के दौरान दिल्ली में 45 नए आयुष्मान जन आरोग्य मंदिरों का लोकार्पण किया गया था और प्रशासन ने राष्ट्रीय राजधानी में ऐसे केंद्रों की कुल संख्या को 415 से बढ़ाकर 1,100 तक ले जाने का दीर्घकालिक लक्ष्य तय किया था।
आयुष्मान आरोग्य मंदिर मॉडल केंद्र सरकार के व्यापक स्वास्थ्य ढांचे का अभिन्न अंग है, जिसके तहत देशभर में 1.80 लाख से अधिक केंद्र संचालित हो चुके हैं। इन केंद्रों पर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य देखभाल, परिवार नियोजन, संक्रामक रोगों की रोकथाम, उच्च रक्तचाप व मधुमेह जैसी गैर-संचारी बीमारियों (NCDs) की नियमित स्क्रीनिंग, निःशुल्क आवश्यक औषधियां और टेली-कंसल्टेशन की सेवाएं प्रदान की जाती हैं। यह तंत्र दिल्ली में अप्रैल 2025 से लागू आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB PM-JAY) के अस्पताल भर्ती कवर के साथ मिलकर एक संपूर्ण स्वास्थ्य सुरक्षा चक्र का निर्माण करता है।
बड़े अस्पतालों पर ओपीडी का भार घटाने में कारगर साबित होगी पहल
दिल्ली के स्वास्थ्य तंत्र पर स्थानीय निवासियों के साथ-साथ उत्तर भारत के विभिन्न पड़ोसी राज्यों से आने वाले मरीजों का भारी दबाव बना रहता है। दिल्ली विधानसभा की स्वास्थ्य संबंधी समीक्षा रिपोर्टों में भी बार-बार यह उल्लेख किया गया है कि एम्स, सफदरजंग, एलएनजेपी और जीटीबी जैसे तृतीयक (Tertiary) अस्पतालों की बाह्य रोगी विभाग (OPD) में सामान्य सर्दी, बुखार, ब्लड प्रेशर जांच और दवा रिफिल जैसे मामलों की भारी भीड़ रहती है, जिससे गंभीर मरीजों के उपचार पर प्रतिकूल असर पड़ता है।
यदि 78 सामुदायिक भवनों में ये प्राथमिक केंद्र सुचारू रूप से कार्य करने लगें, तो मोहल्ले के स्तर पर ही 70 से 80 प्रतिशत सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान हो सकेगा। इससे न केवल बड़े अस्पतालों की ओपीडी में कतारें छोटी होंगी, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों का अस्पताल आने-जाने में लगने वाला समय और किराया भी बचेगा।
Delhi Health News: नियमित संचालन और स्टाफ की तैनाती होगी सबसे बड़ी कसौटी
एमसीडी द्वारा 78 सामुदायिक भवनों में आयुष्मान आरोग्य मंदिर खोलने का निर्णय नीतिगत स्तर पर एक अत्यंत व्यावहारिक और स्वागत योग्य पहल है। खाली पड़ी सार्वजनिक संपत्ति का उपयोग जनस्वास्थ्य के लिए करना शहरी नियोजन का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। हालांकि, इस महत्वाकांक्षी योजना की वास्तविक सफलता कागजी मंजूरी से आगे बढ़कर इस बात पर निर्भर करेगी कि इन केंद्रों पर एमबीबीएस डॉक्टर, नर्स, फार्मासिस्ट और लैब तकनीशियन नियमित रूप से उपस्थित रहें।
इसके अतिरिक्त, आवश्यक दवाओं की निर्बाध आपूर्ति, डायग्नोस्टिक परीक्षणों की विश्वसनीयता और साफ-सफाई के मानकों को बनाए रखना नगर निगम प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी। आने वाले महीनों में इन 78 केंद्रों का ढांचागत नवीनीकरण पूरा होने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि दिल्ली के आम नागरिकों को अपने घर के समीप विश्वस्तरीय प्राथमिक उपचार मिलने का सपना किस हद तक साकार होता है।
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