Delhi Earthquake: दिल्ली के पास भूकंप के झटके, हरियाणा के रेवाड़ी में था केंद्र, 2.8 तीव्रता दर्ज, घरों से निकले लोग, जानें भारत में भूकंप के जोन और रिक्टर स्केल का पूरा गणित

9 मार्च 2026 सुबह 7:01 बजे हरियाणा के रेवाड़ी में 2.8 तीव्रता का हल्का भूकंप, दिल्ली-NCR में झटके महसूस; लोग घरों से बाहर निकले, कोई नुकसान नहीं

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Delhi Earthquake: सोमवार 9 मार्च 2026 की सुबह राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों में भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए। सुबह 7 बजकर 1 मिनट पर आए इस भूकंप का केंद्र हरियाणा के रेवाड़ी जिले में जमीन से 5 किलोमीटर की गहराई में था। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 2.8 दर्ज की गई। हालांकि यह तीव्रता कम थी और किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है, लेकिन झटके महसूस होते ही लोग घबराकर अपने घरों से बाहर निकल आए। दिल्ली-NCR में रहने वाले लाखों लोगों के लिए यह एक चिंताजनक सुबह रही।

कैसे आया भूकंप?

भूगर्भ विज्ञान के अनुसार हमारी पृथ्वी के भीतर 7 टेक्टोनिक प्लेट्स हैं जो लगातार अपनी जगह पर सरकती और घूमती रहती हैं। जब इन प्लेट्स के बीच टकराव या घर्षण होता है तो धरती की सतह पर कंपन महसूस होता है जिसे हम भूकंप कहते हैं। रेवाड़ी में आया यह भूकंप उसी प्रक्रिया का परिणाम है। हरियाणा और दिल्ली-NCR का इलाका भूगर्भीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र में आता है। इस क्षेत्र में छोटी-बड़ी फॉल्ट लाइनें मौजूद हैं जो समय-समय पर सक्रिय होती रहती हैं।

Delhi Earthquake: दिल्ली है जोन-4 में, बड़े भूकंप का खतरा हमेशा मौजूद

भूगर्भ विशेषज्ञों के मुताबिक भारत के कुल भूभाग का करीब 59 फीसदी हिस्सा भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील है। वैज्ञानिकों ने भारत को भूकंप के खतरे के आधार पर चार जोन में बांटा है — जोन-2, जोन-3, जोन-4 और जोन-5। जोन-5 सबसे अधिक खतरनाक माना जाता है जबकि जोन-2 अपेक्षाकृत कम संवेदनशील है। देश की राजधानी दिल्ली भूकंप के जोन-4 में आती है जो काफी संवेदनशील श्रेणी है। विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली में 7 या उससे अधिक तीव्रता का भूकंप आ सकता है जो भारी तबाही मचा सकता है। यही कारण है कि दिल्ली-NCR में हर बार भूकंप के छोटे झटके भी लोगों को सचेत कर देते हैं।

भारत में भूकंप क्यों आते हैं ज्यादा?

भारतीय उपमहाद्वीप में भूकंप का खतरा इसलिए अधिक है क्योंकि भारतीय टेक्टोनिक प्लेट लगातार उत्तर की दिशा में खिसकते हुए यूरेशियन प्लेट से टकरा रही है। इसी टकराव के कारण हिमालय पर्वत श्रृंखला का निर्माण हुआ है और यही प्रक्रिया आज भी जारी है। इसके अलावा कच्छ, पूर्वोत्तर भारत और अंडमान-निकोबार जैसे इलाकों में भी कई सक्रिय फॉल्ट लाइनें हैं। जोन-5 में पूर्वोत्तर भारत के राज्य, जम्मू-कश्मीर का कुछ हिस्सा, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्र, कच्छ का रण और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह आते हैं।

Delhi Earthquake: रिक्टर स्केल पर भूकंप को कैसे समझें

भूकंप की तीव्रता को मापने के लिए रिक्टर स्केल का इस्तेमाल होता है। इस स्केल पर जितना अधिक नंबर होता है भूकंप उतना ही विनाशकारी होता है। 2 से 2.9 तीव्रता का भूकंप बहुत हल्का होता है और आमतौर पर सिर्फ संवेदनशील उपकरणों द्वारा ही दर्ज किया जाता है, हालांकि कभी-कभी हल्का कंपन महसूस हो सकता है। आज रेवाड़ी में आया 2.8 तीव्रता का भूकंप इसी श्रेणी में आता है। 3 से 3.9 तीव्रता पर कंपन महसूस होता है लेकिन नुकसान नहीं होता। 4 से 4.9 तीव्रता पर घर में रखा सामान अपनी जगह से नीचे गिर सकता है। 5 से 5.9 पर भारी सामान और फर्नीचर तक हिलने लगता है। 6 से 6.9 तीव्रता पर इमारत की नींव दरक सकती है और कमजोर निर्माण ध्वस्त हो सकते हैं। 7 से 7.9 तीव्रता पर पक्की इमारतें भी गिर सकती हैं और व्यापक नुकसान होता है। 8 से 8.9 पर सुनामी का खतरा पैदा हो जाता है और बड़े पैमाने पर तबाही होती है। 9 या उससे अधिक तीव्रता की घटनाएं बेहद दुर्लभ होती हैं लेकिन जब आती हैं तो इतिहास में दर्ज हो जाती हैं।

भूकंप आने पर क्या करें?

भूकंप के झटके आने पर घबराकर भागने की बजाय कुछ जरूरी बातों का पालन करना चाहिए। अगर घर के अंदर हों तो किसी मजबूत मेज या बेड के नीचे छुप जाएं और सिर को हाथों से ढक लें। लिफ्ट का इस्तेमाल बिल्कुल न करें। खिड़कियों और बाहरी दीवारों से दूर रहें। अगर बाहर हों तो इमारतों, बिजली के खंभों और पेड़ों से दूर खुले मैदान में चले जाएं। गाड़ी चला रहे हों तो किनारे रोककर गाड़ी से बाहर न निकलें। भूकंप रुकने के बाद गैस, बिजली और पानी के मेन स्विच बंद कर दें।

Delhi Earthquake: हाल के दिनों में बढ़ी हैं भूकंप की घटनाएं

हाल के महीनों में देश और दुनिया के कई हिस्सों में भूकंप की घटनाओं में बढ़ोतरी देखी गई है। दिल्ली-NCR में पिछले कुछ वर्षों में छोटे-छोटे झटके आते रहे हैं। भूगर्भ विशेषज्ञ लगातार इस बात की चेतावनी देते रहे हैं कि दिल्ली और आसपास के इलाकों में एक बड़े भूकंप की आशंका हमेशा बनी रहती है। ऐसे में आज आया हल्का भूकंप भले ही खतरनाक नहीं था लेकिन यह एक याद दिलाने वाली घटना जरूर है कि हमें हमेशा तैयार रहना चाहिए।

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