आईटी सेक्टर में छंटनी का झटका: इंफोसिस और टेक महिंद्रा ने Q4 में 10,433 कर्मचारियों को निकाला, बाजार में मची खलबली

Q4 FY26 में 10,433 नौकरियां खत्म; एआई और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन बना मुख्य कारण।

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Layoffs: भारतीय आईटी इंडस्ट्री में एक बार फिर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं। जनवरी से मार्च 2026 वाली तिमाही (Q4) के नतीजों ने नौकरी बाजार में हलचल मचा दी है। देश की दो प्रमुख आईटी दिग्गज कंपनियों, इंफोसिस (Infosys) और टेक महिंद्रा (Tech Mahindra) ने मिलकर 10,433 कर्मचारियों को कार्यबल से कम कर दिया है। यह खबर ऐसे समय में आई है जब पूरी इंडस्ट्री आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑटोमेशन के दौर से गुजर रही है।

Layoffs: Q4 FY26 के आंकड़े: वर्कफोर्स में भारी कटौती

वित्त वर्ष 2025-26 की अंतिम तिमाही के आंकड़े बताते हैं कि कंपनियां अब ‘मास हायरिंग’ के बजाय ‘बिजनेस ऑप्टिमाइजेशन’ पर फोकस कर रही हैं:

  • इंफोसिस: भारत की दूसरी सबसे बड़ी आईटी कंपनी ने इस तिमाही में अपने वर्कफोर्स से करीब 8,440 कर्मचारियों की कमी की है। कंपनी का कहना है कि यह कदम प्रोडक्टिविटी बढ़ाने और बेंच स्ट्रेंथ को सही करने के लिए उठाया गया है।

  • टेक महिंद्रा: कंपनी ने लगभग 1,993 लोगों की छंटनी की है। कंपनी ने इसे रीऑर्गनाइजेशन और रिसोर्स ऑप्टिमाइजेशन की रणनीति का हिस्सा बताया है।

इन दोनों कंपनियों के इस कदम से कुल 10,433 नौकरियां प्रभावित हुई हैं, जो रिक्रूटमेंट सेक्टर के लिए एक बड़ी चेतावनी है।

अन्य कंपनियों का रुझान: छंटनी के बीच उम्मीद की किरण

दिलचस्प बात यह है कि पूरी आईटी इंडस्ट्री में एक जैसा हाल नहीं है। कुछ कंपनियों ने इस चुनौतीपूर्ण समय में भी नियुक्तियां की हैं:

  • TCS (टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज): इस तिमाही में 2,356 नए कर्मचारी जोड़े।

  • HCLTech: 802 नई भर्तियां कीं।

  • विप्रो (Wipro): वर्कफोर्स में 135 कर्मचारियों की मामूली बढ़ोतरी की।

यह मिश्रित रुझान दर्शाता है कि जिन कंपनियों के पास बड़े आउटसोर्सिंग डील्स और स्टेबल क्लाइंट बेस हैं, वे अभी भी विस्तार कर रही हैं।

AI और ऑटोमेशन: छंटनी का असली कारण

विशेषज्ञों का मानना है कि यह छंटनी अस्थायी नहीं बल्कि आईटी सेक्टर के बड़े ढांचागत बदलाव का हिस्सा है।

  1. जेनरेटिव एआई का असर: ChatGPT, Copilot और आंतरिक एआई प्लेटफॉर्म्स अब कोडिंग, टेस्टिंग और बेसिक सपोर्ट जैसे कार्यों को अधिक तेजी से कर रहे हैं।

  2. पारंपरिक रोल्स में गिरावट: कोडिंग, मैन्युअल टेस्टिंग और सपोर्ट जैसे repetitive tasks वाले रोल्स में भारी कटौती हो रही है।

  3. नई स्किल्स की मांग: अब कंपनियां क्लाउड आर्किटेक्चर, साइबर सिक्योरिटी, डेटा साइंस, मशीन लर्निंग और एआई इंजीनियरिंग जैसे विशेषज्ञता वाले क्षेत्रों में निवेश कर रही हैं।

Layoffs: नौकरी बाजार और कर्मचारियों की स्थिति

नैसकॉम (NASSCOM) की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में आईटी सेक्टर की कुल ग्रोथ 7-8% रहने का अनुमान है, लेकिन हायरिंग की रफ्तार काफी धीमी है।

  • वैश्विक दबाव: अमेरिका-चीन ट्रेड टेंशन और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के कारण क्लाइंट्स बजट कटौती कर रहे हैं।

  • मानसिक प्रभाव: बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे जैसे आईटी हब्स में छंटनी की खबरों से कर्मचारियों में तनाव और चिंता का माहौल है। कई प्रोफेशनल्स अब रीस्किलिंग और ऑनलाइन कोर्सेस के जरिए खुद को अपडेट करने में जुट गए हैं।

भविष्य की राह: कर्मचारियों के लिए 5 महत्वपूर्ण सलाह

  1. स्किल अपग्रेडेशन: पुराने प्लेटफॉर्म्स (.NET/Java) के साथ-साथ Python, GenAI, और DevOps जैसी स्किल्स अनिवार्य रूप से सीखें।

  2. इमरजेंसी फंड: अनिश्चितता के दौर में कम से कम 6-8 महीने का वित्तीय बैकअप तैयार रखें।

  3. नेटवर्किंग: LinkedIn पर एक्टिव रहें और इंडस्ट्री इवेंट्स में भाग लें।

  4. लगातार सीखना (Continuous Learning): कंपनियों का फोकस अब मास हायरिंग से हटकर ‘स्किल-बेस्ड हायरिंग’ पर है, इसलिए खुद को अपडेट रखें।

  5. मानसिक स्वास्थ्य: करियर के उतार-चढ़ाव में तनाव प्रबंधन के लिए विशेषज्ञ की मदद लें।

निष्कर्ष: आईटी इंडस्ट्री का बदलता चेहरा

इंफोसिस और टेक महिंद्रा की यह छंटनी इस बात का संकेत है कि भारतीय आईटी सेक्टर अब परिपक्व (Maturation Phase) हो रहा है। ग्रोथ अब हाई डबल डिजिट के बजाय सिंगल डिजिट में आ रही है। यह दौर कठिन जरूर है, लेकिन सही तैयारी के साथ अवसरों से भरा भी है। जो कर्मचारी और कंपनियां तकनीक के इस बदलाव के साथ खुद को ढाल लेंगे, वे आने वाले समय में नई ऊंचाइयों को छुएंगे।

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