Cyclone Arnab: ओडिशा में 43,827 लोगों को सुरक्षित निकाला गया, अब तक शून्य जनहानि की सूचना

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने राहत-बचाव कार्यों की समीक्षा की। आठ जिलों में 634 आश्रय केंद्र सक्रिय, 313 बचाव टीमें तैनात।

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Cyclone Arnab: बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवाती तूफान ‘अर्णब’ (Cyclone Arnab) के गंभीर खतरे के बीच ओडिशा सरकार और राज्य के आपदा प्रबंधन तंत्र की पूर्व तैयारियों ने एक बार फिर मिसाल पेश की है। प्राकृतिक आपदाओं से निपटने में अपनी प्रशासनिक दक्षता को साबित करते हुए ओडिशा ने चक्रवात के इस ताजा संकट के दौरान ‘शून्य जनहानि’ (Zero Casualty) का शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर लिया है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने विशेष राहत आयुक्त (एसआरसी) के केंद्रीय नियंत्रण कक्ष में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ स्थिति की विस्तृत समीक्षा के बाद यह पुष्टि की कि राज्य में चक्रवात के कारण किसी भी नागरिक की जान नहीं गई है। समय रहते तटीय और निचले क्षेत्रों से 43,827 नागरिकों को सुरक्षित निकालकर राहत शिविरों में पहुंचाया गया, जिससे एक बड़ा संभावित संकट टल गया।

Cyclone Arnab: आठ जिलों के 634 राहत केंद्रों में पहुंचाए गए 43,827 नागरिक

चक्रवात की तीव्रता और दिशा को भांपते हुए ओडिशा सरकार ने दक्षिणी और तटीय इलाकों में युद्धस्तर पर बचाव अभियान चलाया। राज्य के अत्यधिक संवेदनशील आठ जिलों—मलकानगिरी, कोरापुट, नबरंगपुर, रायगड़ा, कालाहांडी, गंजाम, गजपति और नुआपड़ा में कुल 634 बहुउद्देशीय चक्रवात आश्रय स्थलों को चौबीसों घंटे के लिए सक्रिय किया गया। इन सुरक्षित केंद्रों में 43,827 प्रभावित लोगों को व्यवस्थित रूप से ठहराया गया।

इन राहत शिविरों में ठहरे परिवारों के लिए स्वच्छ पेयजल, ताजा पका हुआ भोजन, सूखा राशन, बच्चों के लिए दूध, जीवनरक्षक दवाएं और निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की गई। स्वास्थ्य विभाग की मोबाइल मेडिकल टीमों ने शिविरों में मौजूद वृद्धों और बच्चों की नियमित जांच की। प्रशासनिक निगरानी इस बात पर केंद्रित रही कि विस्थापित परिवारों को भोजन और सुरक्षा संबंधी किसी भी परेशानी का सामना न करना पड़े।

केंद्र और आंध्र प्रदेश के साथ निरंतर समन्वय, मंत्रियों और आईएएस अधिकारियों ने संभाला मोर्चा

इस प्राकृतिक संकट के दौरान केंद्र और राज्य सरकार के बीच अभूतपूर्व समन्वय देखने को मिला। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह लगातार हालात पर नजर बनाए हुए थे और उन्होंने तैयारियों का जायजा लेने के लिए कई बार फोन पर वार्ता की। गृह मंत्री ने राज्य को हरसंभव केंद्रीय सहायता और अतिरिक्त बलों की तैनाती का भरोसा दिलाया। इसके साथ ही सीमावर्ती इलाकों में आपदा प्रबंधन को प्रभावी बनाने के लिए ओडिशा सरकार ने पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश के प्रशासनिक तंत्र के साथ भी रियल-टाइम डेटा साझा किया।

जमीनी स्तर पर निगरानी को पारदर्शी और मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार ने दो उपमुख्यमंत्रियों, छह कैबिनेट मंत्रियों और सात वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को सीधे प्रभावित जिलों में तैनात किया। इन शीर्ष अधिकारियों ने जिलाधिकारियों और स्थानीय पुलिस प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर जोखिम वाले क्षेत्रों से लोगों की सुरक्षित निकासी की व्यक्तिगत निगरानी की, जिसके चलते स्थानीय तंत्र में त्वरित निर्णय लेने की क्षमता बनी रही।

एनडीआरएफ, ओडीआरएएफ और अग्निशमन की 313 टीमें रहीं मुस्तैद

बचाव और राहत कार्यों को सुचारु रूप से चलाने के लिए आपदा प्रबंधन एजेंसियों की कुल 313 टीमों को फील्ड में उतारा गया था। इनमें राज्य आपदा त्वरित कार्रवाई बल (ODRAF) की 60 टीमें, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की 9 विशेषज्ञ टीमें और ओडिशा अग्निशमन सेवा की 244 विशेष टीमें शामिल थीं।

भारी तूफानी हवाओं और पेड़ों के गिरने की आशंका को देखते हुए इन दलों को अत्याधुनिक कटर, बोट्स और वायरलेस संचार उपकरणों से लैस किया गया था। तटीय सड़कों पर जलभराव और अवरोध पैदा होते ही इन टीमों ने त्वरित कार्रवाई कर प्राथमिक मार्गों को साफ किया, जिससे आवश्यक सेवाओं और एंबुलेंस की आवाजाही बिना किसी लंबे व्यवधान के जारी रह सकी।

गजपति और कोरापुट में भारी वर्षा, जनजीवन पर असर

चक्रवात के प्रभाव के चलते राज्य के दक्षिणी अंचलों में मूसलाधार बारिश ने सामान्य जनजीवन को प्रभावित किया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, ओडिशा के 17 अलग-अलग प्रशासनिक ब्लॉकों में 105 मिलीमीटर से अधिक की अत्यधिक भारी वर्षा दर्ज की गई। कोरापुट जिले के पोटांगी ब्लॉक में सर्वाधिक 188 मिलीमीटर और गजपति जिले के मोहना में 182.4 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई।

गजपति और गंजाम जिलों में भारी बारिश के कारण कुछ ग्रामीण पुलियों और सड़कों को आंशिक नुकसान पहुंचा है, जिससे कुछ समय के लिए आवागमन धीमा हुआ। निचले रिहायशी इलाकों में पानी भरने की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन को पंपों के जरिए जल निकासी करने और लोक निर्माण विभाग को क्षतिग्रस्त सड़कों की त्वरित मरम्मत के निर्देश दिए गए हैं।

2,245 गर्भवती महिलाओं की सुरक्षित शिफ्टिंग, 931 शिशुओं का जन्म

आपदा प्रबंधन रणनीति के तहत सबसे संवेदनशील वर्ग यानी गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया। राज्य के स्वास्थ्य विभाग और आशा कार्यकर्ताओं के नेटवर्क के जरिए चक्रवात प्रभावित क्षेत्रों से 2,245 गर्भवती महिलाओं को प्रसव की संभावित तारीख से पहले ही सुरक्षित रूप से नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पतालों में भर्ती कराया गया।

इस सुनियोजित मानवीय पहल का ही परिणाम रहा कि तूफान के इस पूरे दौर में अस्पतालों में 931 शिशुओं का सुरक्षित और सफल जन्म हुआ। किसी भी गर्भवती महिला को आपातकालीन स्थिति में अस्पताल पहुंचने में देरी या जोखिम का सामना नहीं करना पड़ा, जिसे स्वास्थ्य तंत्र की एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

Cyclone Arnab: 19 हजार से अधिक नौकाएं सुरक्षित लौटीं, अब नुकसान के आकलन पर जोर

तटीय मछुआरों की जानमाल की सुरक्षा के लिए मत्स्य पालन विभाग ने समय रहते सख्त अलर्ट जारी किया था। गंजाम से लेकर बालेश्वर तक गहरे समुद्र में मछली पकड़ने गई सभी 19,143 नौकाएं चक्रवात के तट से टकराने से पहले ही सुरक्षित बंदरगाहों और तटों पर लौट आईं। इससे तटीय मछुआरा बस्तियों में किसी भी अप्रिय घटना की संभावना पूरी तरह समाप्त हो गई।

यद्यपि चक्रवात की तीव्रता अब काफी कम हो चुकी है, किंतु राज्य सरकार ने प्रशासनिक मशीनरी को पूरी तरह सतर्क रहने को कहा है। मुख्यमंत्री ने कृषि, राजस्व और ऊर्जा विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे पानी उतरते ही धान की फसलों, कच्चे मकानों और बिजली के खंभों को पहुंचे नुकसान का त्वरित सर्वे शुरू करें, ताकि प्रभावित किसानों और ग्रामीणों को सरकार की ओर से समयबद्ध मुआवजा प्रदान किया जा सके। समय पूर्व योजना, सटीक चेतावनी प्रणाली और प्रशासनिक मुस्तैदी के बल पर ओडिशा ने एक बार फिर वैश्विक स्तर पर आपदा प्रबंधन का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है।

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