MLC Election Results 2026: 28 सीटों में NDA को 16 पर जीत, यूपी में सपा का दम; बिहार में जन सुराज की एंट्री
उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक की 28 विधान परिषद सीटों के नतीजों में NDA को बढ़त, सपा ने यूपी में पांच सीटें जीतीं और जन सुराज ने बिहार में खाता खोला।
MLC Election Results 2026: देश के चार प्रमुख राज्यों—उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक की 28 विधान परिषद (MLC) सीटों पर संपन्न हुए द्विवार्षिक चुनावों के परिणाम घोषित हो चुके हैं। स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों से जुड़े इन नतीजों ने राष्ट्रीय और क्षेत्रीय राजनीति में नए विमर्श को जन्म दे दिया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने कुल 28 में से 16 सीटों पर शानदार जीत दर्ज कर अपना दबदबा साबित किया है। कर्नाटक में जहां विपक्षी भाजपा-जेडीएस गठबंधन ने सभी चार सीटें जीतकर सत्तारूढ़ कांग्रेस का सूपड़ा साफ कर दिया, वहीं उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी ने शिक्षक और स्नातक कोटे की सीटों पर मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। बिहार में चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने पहली बार उच्च सदन में खाता खोलकर सबको चौंकाया, जबकि महाराष्ट्र के नागपुर में विपक्षी महा विकास आघाड़ी ने सत्तारूढ़ महायुति को झटका देकर मुकाबला रोचक बना दिया है। आगामी विधानसभा चुनावों की दृष्टि से प्रबुद्ध और शिक्षक मतदाताओं का यह फैसला राजनीतिक दलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
उत्तर प्रदेश: 11 सीटों पर भाजपा और सपा के बीच कांटे की जंग
उत्तर प्रदेश की 11 विधान परिषद सीटों (पाँच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र) पर मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच ही सिमटा रहा। भाजपा ने छह सीटों पर परचम फहराया, जबकि समाजवादी पार्टी ने आक्रामक रणनीति के दम पर पाँच सीटें अपनी झोली में डालीं।
भाजपा उम्मीदवारों ने मेरठ-सहारनपुर खंड स्नातक सीट पर दिनेश कुमार गोयल, लखनऊ खंड शिक्षक सीट पर उमेश द्विवेदी, आगरा खंड स्नातक सीट पर डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह, मेरठ खंड शिक्षक सीट पर श्रीचंद शर्मा, बरेली-मुरादाबाद खंड शिक्षक सीट पर डॉ. हरि सिंह ढिल्लों और गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक सीट पर ध्रुव कुमार त्रिपाठी के दम पर जीत दर्ज की। वहीं दूसरी ओर समाजवादी पार्टी ने शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में सेंध लगाते हुए वाराणसी शिक्षक सीट पर लाल बिहारी यादव, आगरा शिक्षक सीट पर डॉ. आकाश अग्रवाल और इलाहाबाद-झांसी स्नातक सीट पर डॉ. मान सिंह यादव को विजय दिलाई। लखनऊ खंड स्नातक सीट पर कांति सिंह ने भी जीत हासिल कर अपनी पार्टी को मजबूती दी। प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की शिक्षक सीट पर सपा की जीत ने सियासी गलियारों में विशेष ध्यान आकर्षित किया है।
बिहार: जन सुराज का खुला खाता, पटना में राजद का बड़ा उलटफेर
बिहार की आठ विधान परिषद सीटों के नतीजे पारंपरिक राजनीतिक समीकरणों को बदलने वाले साबित हुए। सबसे बड़ा ऐतिहासिक मोड़ दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में आया, जहां प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने जीत दर्ज कर चुनावी राजनीति में अपना पहला आधिकारिक खाता खोला। जन सुराज के प्रत्याशी डॉ. सुरेश प्रसाद राय ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री मदन मोहन झा को सीधे मुकाबले में शिकस्त दी।
दूसरा बड़ा राजनीतिक उलटफेर पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में देखने को मिला, जहां राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के डॉ. संजीव सिंह ने भाजपा के कद्दावर नेता और लगातार कई बार से जीत रहे नवल किशोर यादव को पराजित कर यह सीट छीन ली। एनडीए गठबंधन ने दरभंगा स्नातक, तिरहुत शिक्षक और कोसी स्नातक सीटों पर जीत बरकरार रखी, जिसमें तिरहुत शिक्षक सीट से भाजपा के नरेंद्र प्रसाद सिंह विजयी रहे। वहीं पटना स्नातक सीट पर जनता दल (यूनाइटेड) के वरिष्ठ नेता नीरज कुमार ने बाजी मारी। तिरहुत स्नातक सीट और सारण शिक्षक सीट पर निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत का परचम लहराया, जिसमें सारण से निर्दलीय राहुल राज निर्वाचित हुए।
महाराष्ट्र: महा विकास आघाड़ी ने दी महायुति को कड़ी टक्कर
महाराष्ट्र की पाँच विधान परिषद सीटों पर सत्तारूढ़ महायुति और विपक्षी महा विकास आघाड़ी (MVA) के बीच सीधा और कड़ा मुकाबला रहा। नतीजों में विपक्षी गठबंधन ने तीन सीटों पर कब्जा जमाया, जबकि सत्तारूढ़ महायुति को दो सीटों से संतोष करना पड़ा। सबसे चर्चित परिणाम नागपुर स्नातक सीट से सामने आया, जहां घंटों तक चली मतों की गिनती के बाद कांग्रेस प्रत्याशी अभिजीत वंजारी ने भाजपा के सुधाकर कोहले को हराकर सीट अपने पास बरकरार रखी। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के मुख्यालय वाले गृह क्षेत्र में कांग्रेस की यह जीत विपक्ष के लिए नैतिक रूप से बेहद अहम मानी जा रही है।
इसके अलावा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) ने पुणे स्नातक सीट पर हर्षदा देशमुख-जाधव और छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) स्नातक सीट पर डॉ. प्रतापसिंह पाटिल को विजयी बनाकर अपनी स्थिति मजबूत की। सत्तारूढ़ गठबंधन की ओर से पुणे शिक्षक सीट पर भाजपा के कौस्तुभ गावड़े और अमरावती शिक्षक सीट पर शिवसेना (शिंदे गुट) के किरण सरनाईक ने जीत हासिल कर महायुति की लाज बचाई।
कर्नाटक: भाजपा-जेडीएस गठबंधन का क्लीन स्वीप, सत्तारूढ़ कांग्रेस शून्य पर सिमटी
दक्षिण भारत के कर्नाटक राज्य में विधान परिषद की चारों सीटों पर हुआ चुनाव सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के लिए सबसे बड़ा आघात साबित हुआ। राज्य में सत्तासीन होने के बावजूद कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत सकी और भाजपा-जेडीएस (NDA) गठबंधन ने चारों सीटों पर एकतरफा क्लीन स्वीप कर दिया।
बेंगलुरु शिक्षक सीट पर जनता दल (सेक्युलर) के प्रत्याशी ए.पी. रंगनाथ ने कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व एमएलसी पुट्टन्ना को 908 मतों के अंतर से पराजित किया। वहीं भाजपा के वरिष्ठ नेता शशील जी. नमोशी ने उत्तर-पूर्व शिक्षक सीट पर कांग्रेस के शरणप्पा मत्तूर को 3,297 वोटों से हराकर अपनी सीट बरकरार रखी। इसके साथ ही भाजपा के एस.वी. संकानूर ने पश्चिम स्नातक सीट और के.एम. सुरेश ने दक्षिण-पूर्व स्नातक सीट पर शानदार विजय प्राप्त की। राज्य के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने नतीजों पर निराशा व्यक्त करते हुए संगठन स्तर पर सुधारात्मक कदम उठाने की बात कही है, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा ने इसे कांग्रेस के खिलाफ जनादेश बताया।
MLC Election Results 2026: 2026 MLC नतीजों के राजनीतिक निहितार्थ और दलों के लिए सबक
चार राज्यों के इन 28 उच्च सदन नतीजों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि स्थानीय और बौद्धिक वर्ग के मुद्दों पर जनता किसी एक पार्टी के पक्ष में एकतरफा झुकाव नहीं दिखा रही है। 28 सीटों के कुल दलीय आंकड़े में भाजपा 13, सपा 5, राकांपा (शरद पवार) 2, निर्दलीय 2, और कांग्रेस, जदयू, जद(एस), राजद, जन सुराज व शिवसेना ने 1-1 सीट पर जीत दर्ज की है। कर्नाटक में एनडीए का बेहतर जमीनी समन्वय परिणामदायक रहा, तो वहीं उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की पांच सीटों पर जीत यह दर्शाती है कि आगामी विधानसभा चुनाव एकतरफा नहीं रहने वाला है। बिहार में जन सुराज पार्टी का आगाज यह संकेत दे रहा है कि राज्य में पारंपरिक गठबंधनों के अलावा तीसरे विकल्प के लिए भी जमीन तैयार हो रही है। हालांकि शिक्षक और स्नातक मतदाता एक सीमित और विशिष्ट वर्ग होते हैं, लेकिन इन परिणामों ने राजनीतिक रणनीतिकारों को जमीनी स्तर पर अपनी कमजोरियों और संगठन की मजबूती का वास्तविक आईना जरूर दिखा दिया है।
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