CJP India Gate March: CJP ने 5 सितंबर का इंडिया गेट मार्च वापस लिया, केंद्र के आश्वासन के बाद फैसला
केंद्र ने FIR वापसी और मुआवजे का भरोसा दिया, CJP ने 5 सितंबर का मार्च टाला
CJP India Gate March: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक इंडिया गेट पर आगामी 5 सितंबर को प्रस्तावित ‘सिटीजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस’ (CJP) का विशाल छात्र एवं नागरिक मार्च अब आयोजित नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार द्वारा आंदोलनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी प्राथमिकियों (FIR) को वापस लेने, भविष्य में कोई नई दंडात्मक कार्रवाई न करने तथा विरोध-प्रदर्शनों के दौरान जान गंवाने वाले छात्रों के पीड़ित परिवारों को उचित वित्तीय मुआवजा प्रदान करने का औपचारिक आश्वासन दिए जाने के बाद आयोजकों ने यह बड़ा फैसला लिया है।
सुप्रीम कोर्ट की विशेष पीठ के समक्ष केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सरकार का सकारात्मक रुख रखते हुए अदालत को अवगत कराया कि प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत वार्ता के बाद गतिरोध समाप्त करने की दिशा में ठोस सहमति बन गई है। इस पर सीजेपी के सह-संयोजक सौरभ दास ने शीर्ष अदालत में औपचारिक रूप से मार्च वापस लेने की घोषणा की।
CJP India Gate March: सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार के तीन बड़े आश्वासन
शीर्ष अदालत में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र सरकार की ओर से तीन प्रमुख बिंदुओं पर स्पष्ट प्रतिबद्धता जताई। सरकार ने अदालत को आश्वस्त किया कि छात्र आंदोलन के दौरान विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज मामलों को वापस लेने की प्रशासनिक और विधिक प्रक्रिया तुरंत शुरू की जाएगी। इसके अतिरिक्त, इस आंदोलन के संबंध में भविष्य में छात्रों के विरुद्ध कोई नई प्राथमिकी दर्ज नहीं की जाएगी।
तीसरे महत्वपूर्ण बिंदु के तहत सरकार ने आंदोलन के दौरान अपनी जान गंवाने वाले छात्रों के आश्रित परिवारों को मुआवजा देने की नीति पर भी सहमति व्यक्त की। सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि मुआवजे का व्यापक ढांचा और वितरण नियम तैयार करने के लिए सरकार को तीन महीने का समय अपेक्षित है, जिसके भीतर प्रक्रिया पूरी कर पात्र परिवारों को सहायता राशि का भुगतान सुनिश्चित कर दिया जाएगा।
दिल्ली पुलिस की 13 FIR रद्द करने की सहमति, आपराधिक तत्वों पर अलग रुख
सुनवाई के दौरान दिल्ली क्षेत्र में दर्ज 13 विशिष्ट प्राथमिकियों का मामला प्रमुखता से उठा। सॉलिसिटर जनरल ने स्पष्ट किया कि दिल्ली पुलिस इन 13 मामलों में अभियोजन की कार्रवाई को आगे नहीं बढ़ाएगी और इन्हें समाप्त करने की दिशा में कदम उठाएगी। इससे सीधे तौर पर प्रभावित दर्जनों छात्रों को तत्काल कानूनी राहत मिलेगी।
इसके साथ ही केंद्र सरकार ने अदालत के समक्ष यह भेद भी रेखांकित किया कि निर्दोष छात्रों और प्रदर्शन की आड़ में हिंसा भड़काने वाले तत्वों को एक तराजू में नहीं तौला जा सकता। सरकार ने लगभग 2,873 ऐसे व्यक्तियों का डेटा साझा किया जिनका पूर्व आपराधिक इतिहास रहा है। सरकार का तर्क है कि छात्रों को संरक्षण दिया जाना आवश्यक है, किंतु आदतन असामाजिक व आपराधिक पृष्ठभूमि वाले तत्वों के खिलाफ कानून के तहत अलग से कार्रवाई की जानी चाहिए।
पूर्ण न्याय के लिए संविधान के अनुच्छेद 142 के उपयोग का अनुरोध
मामले को त्वरित और स्थायी रूप से हल करने के लिए केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से संविधान के अनुच्छेद 142 के अंतर्गत अपनी विशेषाधिकार शक्तियों का उपयोग करने का अनुरोध किया। सॉलिसिटर जनरल ने पीठ से आग्रह किया कि 20 जुलाई से संबंधित सभी प्राथमिकियों और कानूनी उलझनों को एकमुश्त समाप्त करने के लिए अदालत व्यापक आदेश पारित करे।
संविधान का अनुच्छेद 142 सुप्रीम कोर्ट को किसी भी लंबित मामले में ‘पूर्ण न्याय’ (Complete Justice) सुनिश्चित करने के लिए असाधारण निर्देश जारी करने का अधिकार देता है। सरकार का मानना है कि इस न्यायिक व्यवस्था के माध्यम से विभिन्न राज्यों की अदालतों में चल रही मुकदमों की लंबी प्रक्रिया को समाप्त कर छात्रों का भविष्य सुरक्षित किया जा सकेगा।
सीजेआई सूर्यकांत की टिप्पणी और सीजेपी का रुख
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने दोनों पक्षों के बीच बने सकारात्मक माहौल का स्वागत किया। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि जब कार्यपालिका और नागरिक समाज खुले मन और सद्भावना के साथ संवाद करते हैं, तो अत्यंत जटिल से जटिल विवादों का भी गरिमापूर्ण समाधान निकाला जा सकता है।
केंद्र के रुख पर प्रतिक्रिया देते हुए सीजेपी के सह-संयोजक सौरभ दास ने अदालत में कहा कि सरकार के आश्वासनों और न्यायिक पीठ के सकारात्मक रुख को देखते हुए संगठन 5 सितंबर के इंडिया गेट मार्च के आह्वान को वापस लेता है। उन्होंने विधिक सहायता प्रदान करने वाले वकीलों और छात्रों के अधिकारों की रक्षा के लिए आगे आए सभी पक्षों का आभार व्यक्त किया।
CJP India Gate March: अन्य राज्यों के मामलों का समन्वय और आगामी कदम
सॉलिसिटर जनरल ने पीठ को यह भी जानकारी दी कि इस आंदोलन से जुड़े मामलों का दायरा केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है, बल्कि बिहार, महाराष्ट्र, असम और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों से भी संबंधित आवेदन और याचिकाएं दाखिल की गई हैं। केंद्र सरकार इन सभी राज्यों के साथ समन्वय स्थापित कर रही है ताकि पूरे देश में छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों में एक समान नीति लागू की जा सके।
5 सितंबर का मार्च वापस होने से राजधानी में संभावित कानून-व्यवस्था के संकट और टकराव की स्थिति पूरी तरह टल गई है। अब सभी पक्षों का ध्यान सरकार द्वारा दिए गए आश्वासनों के जमीनी क्रियान्वयन, तीन माह के भीतर मुआवजा वितरण योजना के निर्धारण और सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनुच्छेद 142 के तहत जारी होने वाले अंतिम दिशा-निर्देशों पर केंद्रित रहेगा।
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