China Bangladesh Corridor: अब बांग्लादेश और म्यांमार तक कॉरिडोर बनाएगा चीन, बंगाल की खाड़ी के होगा करीब; क्यों भारत के लिए टेंशन

बांग्लादेश-म्यांमार तक चीन का नया कॉरिडोर, जानें भारत की सुरक्षा पर इसका असर

0

China Bangladesh Corridor: एशिया महाद्वीप और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मंच से इस समय भारत की सीमाओं और समुद्री सुरक्षा से जुड़ी एक बहुत ही बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। चीन अपनी विस्तारवादी नीतियों के तहत अब भारत के दो सबसे करीबी पड़ोसियों यानी बांग्लादेश और म्यांमार तक एक नया और विशाल व्यापारिक व सैन्य कॉरिडोर (रास्ता) बनाने की बेहद महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रहा है। चीन का यह नया इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट सीधे तौर पर भारत के बैकयार्ड यानी बंगाल की खाड़ी के बेहद करीब पहुँच जाएगा, जिसने भारत के रक्षा विशेषज्ञों और सरकार की रणनीतिक चिंताओं को बहुत तेज़ी से बढ़ा दिया है। बीजिंग का यह कड़ा कदम पूरे इंडो-पैसिफिक (हिंद-प्रशांत) क्षेत्र में भारत को घेरने और अपना एकतरफा दबदबा कायम करने की एक बहुत बड़ी और सोची-समझी कूटनीतिक चाल का हिस्सा माना जा रहा है।

भारत के लिए चीन का यह नया कॉरिडोर सुरक्षा, संप्रभुता और आर्थिक व्यापार, तीनों ही दृष्टिकोण से एक बहुत बड़ी कड़क चुनौती बनकर उभरा है। बंगाल की खाड़ी में चीन की इस नई एंट्री से भारत की समुद्री सीमाओं पर चौबीसों घंटे का ख़तरा मंडराने की आशंका पैदा हो गई है। आइए इस न्यूज़ रिपोर्ट में बिल्कुल आसान और सीधी हिंदी भाषा में समझते हैं कि चीन के इस नए कॉरिडोर का पूरा कड़ा प्लान क्या है, यह भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के लिए कितनी बड़ी आफत है और भारत सरकार इसका मुकाबला करने के लिए क्या बड़े रक्षा कदम उठा रही है।

चीन का अरबों डॉलर का नया कॉरिडोर प्लान और बंगाल की खाड़ी तक सीधी चीनी पहुँच का सच

चीन सरकार की तरफ से मिली ताज़ा जानकारियों के अनुसार, इस नए कॉरिडोर प्रोजेक्ट के तहत चीन अपने मुख्य भूभाग को म्यांमार और बांग्लादेश के प्रमुख शहरों व बंदरगाहों (पोर्ट्स) से सीधे जोड़ने के लिए सड़कों, हाई-स्पीड रेल लाइनों और बड़े-बड़े रिफाइनरी प्लांटों का एक बहुत ही विशाल नेटवर्क तैयार करने जा रहा है। इस महा-प्रोजेक्ट पर चीन की सरकारी कंपनियां अरबों डॉलर का भारी-भरकम निवेश करने के लिए पूरी तरह तैयार बैठी हैं। इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य चीन को मलक्का जलडमरूमध्य (स्ट्रैट ऑफ मलक्का) के लंबे और जोखिम भरे समुद्री रास्ते से बचाकर सीधे हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी तक एक नया, छोटा और सुरक्षित जमीनी रास्ता देना है।

एक बार यह कॉरिडोर पूरी तरह बनकर तैयार हो गया, तो चीन का व्यापारिक माल और उसके सैनिक कुछ ही घंटों के भीतर सीधे भारत की समुद्री सीमा के पास आकर खड़े हो सकते हैं। बंगाल की खाड़ी के करीब होने से इस पूरे क्षेत्र के व्यस्त समुद्री व्यापारिक मार्ग पूरी तरह से चीनी सेना (पीएलए) की निगरानी और रडार के कड़े दायरे में आ जाएंगे। चीन का लक्ष्य इस कनेक्टिविटी के ज़रिए बांग्लादेश और म्यांमार के बाज़ारों पर अपना पूरा आर्थिक नियंत्रण स्थापित करना है, जिससे आने वाले समय में इन दोनों देशों पर चीन का कूटनीतिक दबाव बहुत ज़्यादा बढ़ जाएगा।

भारत के लिए बढ़ीं रणनीतिक और रक्षा चुनौतियां और पूर्वोत्तर राज्यों की सुरक्षा पर कड़ा संकट

चीन के इस नए कॉरिडोर प्रोजेक्ट से भारत की राष्‍ट्रीय सुरक्षा को लेकर कई कड़े सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ी चिंता भारत के पूर्वोत्तर राज्यों यानी असम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और मिजोरम की सुरक्षा को लेकर है। म्यांमार और बांग्लादेश के साथ भारत की हज़ारों किलोमीटर लंबी खुली और संवेदनशील सीमाएं लगती हैं। अगर इन देशों में चीन की सेना और उसके जासूसी उपकरणों का जाल बिछ जाता है, तो भारत के इन शांत राज्यों में अशांति फैलाने और स्थानीय उग्रवादी गुटों को चीनी हथियारों की सप्लाई मिलने का ख़तरा बहुत तेज़ी से बढ़ सकता है।

इसके अलावा, भारत का सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील हिस्सा जिसे ‘सिक्किम का सिलीगुड़ी कॉरिडोर’ या ‘चिकन नेक’ (चूज़े की गर्दन) कहा जाता है, वह भी चीन के इस नए प्लान के बाद बेहद असुरक्षित हो सकता है। यह सड़क मार्ग भारत के बाकी हिस्से को पूरे पूर्वोत्तर भारत से जोड़ता है। कूटनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि चीन इस कॉरिडोर के बहाने भारत को चारों तरफ से ज़मीन और समंदर में घेरने की अपनी पुरानी और कुख्यात ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ (मोतियों की माला) की रणनीति को और ज़्यादा कड़ा और मजबूत कर रहा है, ताकि किसी भी संभावित युद्ध की स्थिति में वह भारत की पूरी घेराबंदी कर सके।

China Bangladesh Corridor: पड़ोसी देशों का कड़ा कर्ज जाल और चीन की चाल का मुकाबला करने के लिए भारत की नई नीतियां

पड़ोसी देशों की लाचारी: बांग्लादेश और म्यांमार, दोनों ही विकासशील देश हैं और उन्हें अपने यहाँ सड़कों और बिजली के विकास के लिए भारी-भरकम पूंजी की सख़्त ज़रूरत है। चीन इसी मजबूरी का फायदा उठाकर इन देशों को बहुत ही आसान शर्तों पर मोटा कर्ज देता है और बाद में जब ये देश कर्ज नहीं चुका पाते, तो चीन उनके मुख्य बंदरगाहों और जमीनी हिस्सों पर 99 साल के लिए कब्ज़ा कर लेता है, जैसा उसने श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह के साथ किया था। हालांकि, बांग्लादेश और म्यांमार की सरकारें भारत के साथ अपने सदियों पुराने सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंधों को भी बनाए रखने के लिए एक बहुत ही कड़ा संतुलन बनाने की कोशिश कर रही हैं।

भारत की कड़क जवाबी कूटनीति: चीन की इस खतरनाक चाल का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए भारत सरकार ने भी अपनी कूटनीतिक और सैन्य तैयारियों को चार गुना तेज़ी से बढ़ा दिया है। भारत अब अपनी ‘एक्ट ईस्ट’ (Act East Policy) नीति के तहत अपने पूर्वोत्तर राज्यों में बंपर हाईवे, आधुनिक पुल और नए हवाई अड्डों का निर्माण युद्ध स्तर पर कर रहा है। इसके साथ ही, भारत ने म्यांमार में ‘कलादान मल्टी-मोडल प्रोजेक्ट’ और बांग्लादेश के साथ सीधे रेल व अंतर्देशीय जलमार्गों को बहुत मजबूत करना शुरू कर दिया है, ताकि इन पड़ोसी देशों को चीन के कर्ज जाल में फंसने से पूरी तरह बचाया जा सके। अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ मिलकर ‘क्वाड’ (QUAD) संगठन के ज़रिए हिंद महासागर में चीन की हर एक संदिग्ध गतिविधि पर बहुत ही कड़ी और पैनी नज़र बनाए हुए है।

निष्कर्ष: संप्रभुता से कोई समझौता नहीं, पूरी सतर्कता और आत्मनिर्भरता से सुरक्षित रहेंगी सीमाएं

इस प्रकार चीन द्वारा बांग्लादेश और म्यांमार (China Bangladesh Corridor) में बनाया जा रहा यह नया कॉरिडोर निसंदेह भारत के लिए आने वाले समय की सबसे बड़ी और कूटनीतिक अग्निपरीक्षा बनने जा रहा है। यह पूरी स्थिति साफ़ दर्शाती है कि आज के इस आधुनिक दौर में कोई भी देश बिना अपनी सैन्य और आर्थिक ताकत को मजबूत किए अपनी सीमाओं की रक्षा नहीं कर सकता है। भारत एक शांतिप्रिय राष्ट्र है जो हमेशा अपने सभी पड़ोसी देशों की संप्रभुता और उनके विकास का दिल से सम्मान करता है, लेकिन अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और अखंडता के साथ वह कभी भी किसी को रत्ती भर भी खिलवाड़ करने की इज़ाज़त नहीं दे सकता है।

एक जागरूक नागरिक और राष्ट्रभक्त पाठक के रूप में हमें यह अच्छी तरह समझना होगा कि विदेशी ताकतों की इन कूटनीतिक चालों का सामना करने के लिए देश के भीतर आंतरिक एकता और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की नीतियों का मजबूत होना सबसे ज़रूरी है। हमारी सेनाएं और देश का विदेश मंत्रालय इस समय पूरी मुस्तैदी और कड़ाई के साथ सीमाओं पर डटे हुए हैं और चीन के हर एक कड़े कदम का जवाब देने के लिए पूरी तरह सक्षम हैं। आइए हम सब मिलकर देश के वैज्ञानिकों, जवानों और सरकार की इन सुरक्षा नीतियों का पूरा समर्थन करें, ताकि हमारा प्यारा भारत हमेशा अखंड, सुरक्षित, शक्तिशाली और तरक्की के रास्ते पर बिना किसी डर के आगे बढ़ता रहे।

Read More Here

Amarnath Yatra पर श्रद्धालुओं के लिए खुशखबरी, परिवहन विभाग ने तय किया बस और ऑटो का किराया

mAadhaar: आधार ऐप में बड़ा बदलाव, पुराने ऐप को किया गया बंद, अब इस नए डिजिटल साथी से मिलेंगे सभी अपडेट

Monsoon Hair Care Tips: बारिश के मौसम में क्यों झड़ते हैं ज्यादा बाल? अपनाएं ये आसान टिप्स और रखें हेयर फॉल पर कंट्रोल

Saree Draping Tips: साड़ी में दिखना चाहती हैं टॉल और स्लिम? तो ड्रेपिंग के समय इन 4 छोटी गलतियों से बचें

आपको यह भी पसंद आ सकता है
Leave A Reply

Your email address will not be published.