Kids Sleep Routine: स्कूल खुलने से पहले बच्चों की ये आदतें जरूर बदलें, वरना सुबह उठाना होगा मुश्किल; जानें सही स्लीप रूटीन

स्कूल खुलने से पहले बच्चों का स्लीप रूटीन और स्क्रीन टाइम सुधारना क्यों है जरूरी?

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Kids Sleep Routine: गर्मियों या सर्दियों की लंबी छुट्टियों के बाद अब देश भर में दोबारा से स्कूल खुलने का समय बेहद नज़दीक आ गया है। ऐसे में बच्चों को दोबारा से स्कूल भेजने की तैयारी करना सभी माता-पिता (पेरेंट्स) के लिए एक बहुत बड़ी चिंता और कड़े इम्तिहान का विषय बन गया है। छुट्टियों के लंबे दिनों में अक्सर बच्चों की पूरी दिनचर्या (रूटीन) बिगड़ जाती है, जहाँ देर रात तक जागना, सुबह बहुत देर से सोकर उठना, असमय खाना-पीना और मोबाइल या टीवी स्क्रीन का टाइम बहुत ज़्यादा बढ़ जाना बेहद आम बात हो जाती है। शिक्षा विशेषज्ञों और बाल मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि स्कूल खुलने से ठीक पहले बच्चों की इन बिगड़ी आदतों को कड़ाई और प्यार से बदलना बेहद ज़रूरी है, वरना स्कूल के पहले ही दिन से बच्चों को सुबह नींद से जगाना और उन्हें समय पर तैयार करना माता-पिता के लिए एक बहुत बड़ा सिरदर्द बन जाएगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों के दिमाग और उनके शरीर को दोबारा से स्कूल के अनुशासित माहौल में ढालने के लिए अचानक से कोई कड़ा नियम नहीं थोपना चाहिए, बल्कि स्कूल शुरू होने से कम से कम 7 से 10 दिन पहले से ही इसकी तैयारी स्टेप-बाय-स्टेप शुरू कर देनी चाहिए। ऐसा करने से बच्चे बिना किसी चिड़चिड़ेपन या तनाव के बहुत ही आसानी से अपने पुराने स्कूल रूटीन में वापस लौट आते हैं। आइए इस पैरेंटिंग स्पेशल न्यूज़ रिपोर्ट में बिल्कुल आसान और सीधी हिंदी भाषा में समझते हैं कि बच्चों की इन आदतों को बदलने का सबसे आसान साइंटिफिक प्लान क्या है, सुबह उन्हें बिना किसी रोने-धोने के उठाने के जादुई तरीके क्या हैं और उनके खान-पान का कैसे सही मैनेजमेंट किया जाए।

छुट्टियों के बाद अचानक रूटीन बदलने की बड़ी आफत और धीरे-धीरे आदत सुधारने का जादुई सीक्रेट

लंबी छुट्टियों के दौरान बच्चों के शरीर की आंतरिक घड़ी (बॉडी क्लॉक) पूरी तरह से बदल जाती है। जब बच्चे रोज़ाना सुबह 9 या 10 बजे सोकर उठने के आदी हो जाते हैं, तो स्कूल खुलने के पहले ही दिन अचानक उन्हें सुबह 6 बजे उठा देने से उनका मूड पूरी तरह खराब हो जाता है। इसके कारण बच्चे पूरे दिन सुस्ती, सिरदर्द और चिड़चिड़ेपन का शिकार रहते हैं और उनका मन पढ़ाई या स्कूल जाने में बिल्कुल नहीं लगता है।

इस बड़ी समस्या से बचने के लिए बाल मनोवैज्ञानिकों ने एक बहुत ही सुंदर और आसान ‘स्लीप शिफ्टिंग’ (नींद बदलने) का फॉर्मूला बताया है। माता-पिता को चाहिए कि वे स्कूल खुलने से एक हफ्ता पहले ही इस पर काम शुरू कर दें। अगर आपका बच्चा छुट्टियों में सुबह 9 बजे उठता है, तो पहले दिन उसे 8:30 बजे जगाएं, उसके अगले दिन 8 बजे उठाएं और इसी तरह धीरे-धीरे हर दिन समय को 20 से 30 मिनट कम करते जाएं। इस आसान और कड़े तरीके से स्कूल शुरू होने तक बच्चा बिना किसी कड़क ज़बरदस्ती के अपने आप ही सुबह 6 बजे उठने का पूरी तरह आदी हो जाएगा और उसकी रात की नींद भी अपने आप समय पर आने लगेगी।

रात को जल्दी सुलाने के कड़े और ज़रूरी नियम और स्क्रीन टाइम पर डिजिटल ताला लगाने का सही तरीका

मोबाइल और टीवी से दूरी: बच्चों को सुबह जल्दी उठाने के लिए सबसे ज़्यादा ज़रूरी है कि वे रात को समय पर सो जाएं। आज के इस डिजिटल दौर में देर रात तक मोबाइल पर गेम्स खेलना या टीवी पर कार्टून देखना बच्चों की नींद खराब होने का सबसे बड़ा मुख्य कारण है। गैजेट्स (स्क्रीन) से निकलने वाली नीली रोशनी बच्चों के दिमाग को सोने का संकेत देने वाले हार्मोन को पूरी तरह रोक देती है, जिससे थके होने के बाद भी बच्चों को नींद नहीं आती है। विभाग की सलाह है कि रात को सोने से कम से कम दो घंटे पहले ही घर के सभी मोबाइल, टैबलेट और टीवी को पूरी तरह बंद कर दें और बच्चों के कमरे में पूरी तरह शांति व हल्का अंधेरा रखें।

सात्विक और हल्का रात का भोजन: इसके साथ ही बच्चों की डाइट यानी खान-पान का भी उनकी नींद से बहुत गहरा और सीधा संबंध होता है। छुट्टियों में अक्सर बच्चे रात के समय पिज्जा, बर्गर या भारी पैकेट वाले चिप्स खा लेते हैं, जिससे उनका पाचन तंत्र बहुत धीमा हो जाता है और रात भर उन्हें गहरी नींद नहीं आती है। स्कूल शुरू होने से पहले बच्चों को रात के समय बेहद सात्विक, सुपाच्य और हल्का भोजन देने की आदत डालें। सोने से पहले उन्हें एक ग्लास गुनगुना हल्दी वाला दूध देना उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए एक बहुत ही बेहतरीन व कड़ा नुस्खा साबित हो सकता है, जिससे उनका शरीर अंदर से पूरी तरह साफ़ (detox) हो जाएगा और सुबह वे बिल्कुल तरोताजा महसूस करेंगे।

Kids Sleep Routine: नई किताबों और रंग-बिरंगे बैग से बढ़ाएं स्कूल जाने का उत्साह और माता-पिता की मुख्य भूमिका

बच्चों के मन से स्कूल जाने के डर को पूरी तरह खत्म करने और उनके भीतर एक नया जोश भरने के लिए माता-पिता को एक बहुत ही सुंदर कूटनीति अपनानी चाहिए। बच्चों को डांटने या डराने के बजाय उन्हें अपने साथ बाज़ार ले जाएं और उनकी पसंद की नई किताबें, सुंदर कॉपियां, रंग-बिरंगे वॉटर बॉटल और उनकी पसंद का नया स्कूल बैग व स्टेशनरी खरीद कर लाएं। घर पर इन नई चीज़ों को देखकर बच्चों के भीतर अपने स्कूल के नए क्लास में जाने और अपने पुराने दोस्तों से मिलने की उत्सुकता बहुत तेज़ी से जाग उठती है।

इस पूरे बदलाव के दौरान माता-पिता की भूमिका सबसे ज़्यादा महत्वपूर्ण और कड़क होनी चाहिए। बच्चों का रूटीन बदलने के लिए सबसे पहले माता-पिता को खुद भी रात को जल्दी सोने और सुबह जल्दी उठने का एक बहुत ही सुंदर उदाहरण बच्चों के सामने पेश करना होगा। सुबह उठकर बच्चों पर चिल्लाने या गुस्सा करने के बजाय उनके कमरे में हल्का और मधुर संगीत बजाएं, उन्हें प्यार से सहलाकर उठाएं और स्कूल जाने की तैयारी को एक मज़ेदार खेल की तरह बनाएं। बच्चों के साथ बैठकर एक सुंदर ‘रूटीन चार्ट’ तैयार करें और जो बच्चा समय पर सोकर उठे और अपने कड़े नियमों का पालन करे, उसे छोटे-छोटे पुरस्कार या उनकी मनपसंद चीज़ देकर उनका हौसला लगातार बढ़ाते रहें।

निष्कर्ष: सुरक्षित और स्वस्थ आदतों से सजेगा बच्चों का सुनहरे भविष्य, आज ही से शुरू करें तैयारी

इस प्रकार स्कूल खुलने से पहले बच्चों की इन बिगड़ी हुई आदतों (Kids Sleep Routine) को सुधारना और उनके रूटीन को पूरी तरह अनुशासित बनाना उनके शारीरिक, मानसिक और शैक्षणिक विकास के लिए एक बेहद ज़रूरी और शुभ कदम है। यह तैयारी न केवल बच्चों को स्कूल के पहले दिन एक नया आत्मविश्वास देगी, बल्कि आपके घर के माहौल को भी सुबह के समय होने वाली भागदौड़ और तनाव से पूरी तरह मुक्त रखेगी। स्कूल शुरू होने के साथ-साथ इस मानसूनी मौसम में बच्चों की सेहत और उनके टीकाकरण (वैक्सीनेशन) का भी पूरा और कड़ा ख्याल रखें ताकि वे मौसमी बीमारियों से पूरी तरह सुरक्षित बने रहें।

एक जागरूक अभिभावक और देश के ज़िम्मेदार नागरिक के रूप में हमें यह अच्छी तरह समझना होगा कि बच्चे हमारे देश का आने वाला उज्ज्वल भविष्य हैं, इसलिए उनकी आदतों में सुधार करने के लिए कभी भी उनके साथ कोई कड़ी मारपीट या ज़बरदस्ती न करें। उन्हें प्यार से समझाएं, उनकी चिंताओं को सुनें और उन्हें यह अहसास दिलाएं कि स्कूल जाना कोई सज़ा नहीं बल्कि नई चीज़ें सीखने और जीवन में आगे बढ़ने का एक बहुत ही सुंदर और मनोरंजक रास्ता है। आइए हम सब मिलकर आज ही से इस आसान पेरेंटिंग गाइडलाइंस का पालन करने का पक्का संकल्प लें, ताकि हमारे बच्चों का यह नया स्कूल सत्र हमेशा खुशहाल, मंगलमय, स्वस्थ और पूरी तरह से सफल बना रहे।

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