CEC Gyanesh Kumar Protest: ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर अड़ा विपक्ष, राहुल गांधी के नेतृत्व में राष्ट्रपति भवन तक मार्च की तैयारी

SIR और कथित वोट चोरी के आरोपों पर INDIA ब्लॉक का विरोध तेज, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की कोशिश

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CEC Gyanesh Kumar Protest: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ (INDIA) का रुख लगातार आक्रामक बना हुआ है। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) और कथित ‘वोट चोरी’ के गंभीर आरोपों को केंद्र में रखकर विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। शुक्रवार, 9 अक्टूबर को संसद भवन परिसर में विपक्षी सांसदों के जुटने और वहां से राष्ट्रपति भवन तक विरोध मार्च निकालने की योजना है। विपक्ष का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से सीधे मुलाकात कर चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़ी अपनी आपत्तियां दर्ज कराना और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे का औपचारिक ज्ञापन सौंपना है।

राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्ष की लामबंदी और चुनाव आयोग पर सवाल

कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी इस पूरे आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं। विपक्षी दलों का तर्क है कि हालिया चुनावी प्रक्रियाओं और मतदाता सूची में किए जा रहे बदलावों को लेकर उठ रहे सवालों का निष्पक्ष और पारदर्शी समाधान होना आवश्यक है। इसी मांग को लेकर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पिछले कई दिनों से राजनीतिक तापमान बढ़ा हुआ है।
इससे पहले भी विपक्षी सांसदों ने निर्वाचन सदन (चुनाव आयोग मुख्यालय) की ओर पैदल मार्च निकालने का प्रयास किया था, जिसे सुरक्षा बलों द्वारा बीच में ही रोक दिया गया था। विपक्ष का आरोप है कि विशेष गहन पुनरीक्षण की आड़ में पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जाने का जोखिम बना हुआ है, जिससे नागरिकों के बुनियादी लोकतांत्रिक अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। इसी आधार पर वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नैतिक इस्तीफे पर अड़े हैं। हालांकि, चुनाव आयोग और प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण एक नियमित और वैधानिक प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य फर्जी प्रविष्टियों को हटाकर सूची को अद्यतन बनाना है।

ममता बनर्जी, अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव से संपर्क: एकजुट मोर्चे की रणनीति

इस विरोध प्रदर्शन को राष्ट्रीय स्तर पर अधिक धारदार बनाने के लिए राहुल गांधी ने विपक्षी गठबंधन के शीर्ष नेताओं से व्यक्तिगत रूप से संपर्क साधा है। इनमें पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री व टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव और शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे शामिल हैं।
राहुल गांधी ने इन घटक दलों के प्रमुखों से दिल्ली पहुंचकर साझा प्रदर्शन में शामिल होने और राष्ट्रपति से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा बनने का अनुरोध किया है। ममता बनर्जी ने भी राजधानी रवाना होने से पूर्व स्पष्ट किया था कि चुनाव प्रक्रिया और मतदाता अधिकारों से जुड़े इस अहम विषय पर साझा रणनीति तय करने के लिए उन्हें बैठक में आमंत्रित किया गया है। विपक्ष की कोशिश है कि क्षेत्रीय छत्रपों की प्रत्यक्ष मौजूदगी से इस मुद्दे को संसद से लेकर सड़क तक एक बड़ा राजनीतिक विमर्श बनाया जाए।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात का समय और संसद में आपात बैठक

विपक्षी गठबंधन की प्राथमिक रणनीति राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के समक्ष अपना पक्ष रखने की है। इसके लिए राष्ट्रपति भवन को औपचारिक अनुरोध भेजा जा चुका है, हालांकि शुक्रवार सुबह तक मुलाकात का आधिकारिक समय निर्धारित होने की पुष्टि नहीं हुई थी।
यदि राष्ट्रपति भवन से मुलाकात का समय नहीं मिलता है, तो विपक्षी सांसदों ने संसद भवन के संविधान सदन में बैठक कर आगे की रणनीति तय करने की योजना बनाई है। इसके बाद सांसद शांतिपूर्ण मार्च के रूप में राष्ट्रपति भवन की ओर कूच करने का प्रयास कर सकते हैं। लुटियंस दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था और धारा 144 जैसे प्रतिबंधों को देखते हुए पुलिस प्रशासन भी सतर्क है और संसद भवन के आसपास कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं।

एसआईआर (SIR) प्रक्रिया पर विवाद की मुख्य वजह

विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) दरअसल मतदाता सूची की घर-घर जाकर की जाने वाली भौतिक जांच और अद्यतनीकरण की प्रशासनिक प्रक्रिया है। इसका वैधानिक उद्देश्य मृत मतदाताओं, स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके व्यक्तियों और दोहरी प्रविष्टियों को हटाना तथा नए 18 वर्ष के मतदाताओं को जोड़ना होता है।
विपक्ष का मुख्य आक्षेप यह है कि इस प्रक्रिया के दौरान उचित पारदर्शिता और राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों (BLA) की पर्याप्त भागीदारी सुनिश्चित नहीं की जा रही है, जिससे सत्ताधारी दल के प्रभाव में वास्तविक मतदाताओं के नाम काटे जाने की आशंका बनती है। दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग का निरंतर यह रुख रहा है कि पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों, फॉर्म-7 और फॉर्म-8 की जांच तथा अपील के अवसरों के तहत संचालित होती है।

आगे की राजनीतिक दिशा और संभावित प्रभाव

फिलहाल समूचे घटनाक्रम की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि राष्ट्रपति भवन से विपक्षी प्रतिनिधिमंडल को मुलाकात का समय मिलता है या नहीं। साथ ही, दिल्ली पुलिस द्वारा प्रस्तावित मार्च को अनुमति दिए जाने या रोके जाने की स्थिति में संसद से लेकर सड़कों पर टकराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की यह मांग आगामी विधानसभा और स्थानीय चुनावों के पहले संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता और चुनावी शुचिता को लेकर देश में एक बड़े राजनीतिक टकराव का रूप ले चुकी है।

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