Delhi NCR Air Pollution: हवा सुधारने के लिए CAQM ने बनाई 11 सदस्यीय समिति, पांच राज्यों के अधिकारी और शीर्ष वैज्ञानिक शामिल

प्रदूषण के स्रोतों की पहचान और वैज्ञानिक निगरानी के लिए 11 सदस्यीय समिति गठित

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Delhi NCR Air Pollution: देश की राजधानी दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में सर्दियों के मौसम में जहरीली हवा और स्मॉग की समस्या से निपटने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। आयोग ने प्रदूषण के मुख्य स्रोतों, हॉटस्पॉट्स और भौगोलिक कारणों की तत्काल पहचान करने के लिए 11 सदस्यीय विशेष निगरानी और पहचान समिति (Monitoring and Identification Committee) का गठन किया है। इस समिति की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें केवल नीति निर्माता ही नहीं, बल्कि देश के शीर्ष मौसम वैज्ञानिक, पर्यावरण शोधकर्ता और दिल्ली समेत पांच पड़ोसी राज्यों के वरिष्ठ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारी एक साथ एक मंच पर आए हैं, ताकि जमीनी स्तर पर त्वरित और सख्त कार्रवाई की जा सके।

अंतर-राज्यीय चुनौती और वैज्ञानिक समाधान की जरूरत

सर्दियों के महीनों में दिल्ली-एनसीआर का वायु प्रदूषण केवल किसी एक शहर या राज्य तक सीमित समस्या नहीं रहता है। पड़ोसी राज्यों से आने वाला पराली का धुआं, उद्योगों से निकलने वाला उत्सर्जन, वाहनों की अनियंत्रित आवाजाही और सर्दियों में हवा की धीमी गति मिलकर पूरी घाटी को गैस चैंबर में तब्दील कर देती हैं। आयोग का मानना है कि प्रशासनिक और कागजी निर्देशों के स्थान पर अब वैज्ञानिक डेटा और सटीक सैटेलाइट मैपिंग के जरिए ही इस संकट को नियंत्रित किया जा सकता है। इसी अंतर-राज्यीय समन्वय को मजबूत करने के लिए अंतर-विभागीय विशेषज्ञों की यह समिति तैयार की गई है।

डॉ. एस डी अत्री की कमान और शीर्ष वैज्ञानिकों की भागीदारी

आयोग द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, इस 11 सदस्यीय समिति का नेतृत्व सीएक्यूएम के तकनीकी सदस्य डॉ. एस डी अत्री को सौंपा गया है, जबकि डॉ. विकास सिंह को सदस्य-संयोजक के रूप में नियुक्त किया गया है। समिति में मौसम की सटीक और अग्रिम भविष्यवाणी के लिए भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. वी. के. सोनी को शामिल किया गया है। इसके अलावा, वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान और वैज्ञानिक शोध के क्षेत्र में अग्रणी संस्थान भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM), पुणे से डॉ. सचिन घुड़े और सीएसआईआर-नीरी (NEERI) से डॉ. पद्मा एस. राव जैसी प्रमुख हस्तियों को समिति का हिस्सा बनाया गया है।

उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान का सीधा प्रतिनिधित्व

प्रदूषण नियंत्रण में अंतर-राज्यीय खींचतान और आरोप-प्रत्यारोप को खत्म करने के लिए उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और पंजाब के राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों के वरिष्ठ अधिकारियों को सीधे इस समिति से जोड़ा गया है। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से ए के आनंद, हरियाणा से भूपेंद्र सिंह रिणवा, राजस्थान से डॉ. जयश्री काला और पंजाब से हरप्रीत सिंह समिति के आधिकारिक सदस्य बनाए गए हैं। इनके साथ केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) के विशेषज्ञ भी जुड़े हैं, जिससे राज्यों के बीच रियल-टाइम डेटा शेयरिंग और संयुक्त कार्रवाई बेहद आसान हो जाएगी।

सैटेलाइट डेटा से 48 से 72 घंटे पहले प्रदूषण का सटीक पूर्वानुमान

यह समिति आधुनिक सैटेलाइट इमेजरी, रियल-टाइम एमिशन मैपिंग और मौसम की गणितीय मॉडलिंग का उपयोग करेगी। इसकी मदद से 48 से 72 घंटे पहले ही यह सटीक अनुमान लगाया जा सकेगा कि दिल्ली-एनसीआर के किस इलाके में वायु गुणवत्ता खतरनाक स्तर तक गिरने वाली है। एडवांस वार्निंग सिस्टम मिलते ही आयोग और संबंधित राज्यों की टास्क फोर्स आपातकालीन कदम (जैसे निर्माण कार्यों पर रोक, एंटी-स्मॉग गन का इस्तेमाल और गाड़ियों की पाबंदियां) समय रहते लागू कर सकेंगी, जिससे प्रदूषण को चरम स्तर पर पहुंचने से पहले ही नियंत्रित किया जा सकेगा।

Delhi NCR Air Pollution: निर्णय प्रक्रिया में बाधा न आए, इसलिए निरंतरता के कड़े आदेश

आयोग ने अंतर-राज्यीय समन्वय को निर्बाध बनाए रखने के लिए बेहद सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि यदि समिति में शामिल किसी भी संस्था या राज्य बोर्ड के प्रतिनिधि अधिकारी का तबादला होता है या पद बदलता है, तो संबंधित विभाग को बिना किसी देरी के नए नामित अधिकारी का नाम तुरंत अपडेट करना होगा। इस नियम का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि आपातकालीन स्थितियों में निगरानी, समीक्षा और निर्णय लेने की प्रशासनिक श्रृंखला में एक घंटे का भी गैप न आए और कार्रवाई की निरंतरता बनी रहे।

जन-स्वास्थ्य की सुरक्षा और भविष्य की रणनीति

सर्दियों के (Delhi NCR Air Pollution) समय वायु प्रदूषण बढ़ने से बच्चों, बुजुर्गों और सांस के मरीजों पर सबसे गंभीर असर पड़ता है। जहरीली हवा से आंखों में जलन, अस्थमा और फेफड़ों की गंभीर बीमारियां तेजी से फैलती हैं। सीएक्यूएम द्वारा बनाई गई यह 11 सदस्यीय समिति वैज्ञानिक आंकड़ों के आधार पर लक्षित कार्रवाई करेगी, जिससे केवल उन्हीं स्रोतों को बंद किया जाएगा जो सीधे तौर पर प्रदूषण फैला रहे हैं। वैज्ञानिकों और पांच राज्यों के अधिकारियों का यह साझा ढांचा एनसीआर में साफ हवा सुनिश्चित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है।

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