BRICS Summit के गुडी बैग में बिहार का सत्तू, विदेशी मेहमानों तक पहुंचेगा देसी स्वाद

BRICS Summit के गुडी बैग में बिहार का सत्तू, विदेशी मेहमानों तक पहुंचेगा देसी स्वाद

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BRICS Summit: नई दिल्ली के भारत मंडपम में 12 और 13 सितंबर को आयोजित हो रहे 18वें BRICS समिट में इस बार बिहार के सत्तू को खास पहचान मिली है। समिट में शामिल होने वाले भारतीय और विदेशी पत्रकारों तथा प्रतिनिधियों के लिए तैयार किए गए विशेष गुडी बैग में बिहार के इस पारंपरिक खाद्य उत्पाद को जगह दी गई है। भुने हुए चने से बना सत्तू लंबे समय से बिहार के खान-पान का अहम हिस्सा रहा है, और अब यह अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश के अलग-अलग हिस्सों के अन्य स्थानीय उत्पादों के साथ मेहमानों तक पहुंचेगा। इस खास हैंपर में देशभर से कुल नौ स्थानीय उत्पाद शामिल किए गए हैं, जिनमें बिहार के सत्तू के अलावा गुजरात का ब्लॉक-प्रिंटेड स्टोल, कॉफी मग और टोट बैग जैसी चीजें भी हैं। समिट की कवरेज के लिए दिल्ली में करीब 1,200 से 1,300 पत्रकारों के पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे इस आयोजन का दायरा और भी बड़ा हो गया है।

BRICS Summit: गुडी बैग में क्यों चुना गया बिहार का सत्तू

सत्तू बिहार के खान-पान की पहचान माना जाता है, और भुने हुए चने से तैयार यह उत्पाद सस्ता, पौष्टिक और आसानी से उपलब्ध होने की वजह से गांव-शहर दोनों जगह बेहद लोकप्रिय रहा है। गर्मी के मौसम में सत्तू का शरबत और नमक-मसाले के साथ इसका सेवन बिहार में आम बात है, और इसे अक्सर देसी सुपरफूड के तौर पर भी जाना जाता है। इसी सादगी और पौष्टिकता की वजह से इसे BRICS जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन के गुडी बैग में शामिल किया गया है। इस कदम को बिहार के पारंपरिक खाद्य उत्पादों के लिए एक बड़ा मंच माना जा रहा है, क्योंकि इससे स्थानीय स्वाद को वैश्विक पहचान मिलने का मौका बन रहा है।

गुडी बैग में और क्या-क्या है खास

समिट के लिए तैयार किए गए इस हैंपर में सिर्फ खाद्य उत्पाद ही नहीं, बल्कि रोजमर्रा के इस्तेमाल की कई चीजें भी शामिल की गई हैं। बिहार के सत्तू के साथ-साथ गुजरात का ब्लॉक-प्रिंटेड स्टोल, कॉफी मग और टोट बैग भी इस गुडी बैग का हिस्सा हैं, जो देश की अलग-अलग राज्यों की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाते हैं। इसके अलावा बैग में एक इन-बिल्ट चार्जिंग पोर्ट भी दिया गया है, ताकि समिट में मौजूद पत्रकार और प्रतिनिधि अपने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को आसानी से चार्ज कर सकें। इस तरह का व्यावहारिक फीचर जोड़ना यह दिखाता है कि आयोजकों ने मेहमानों की सुविधा का भी पूरा ध्यान रखा है।

बिहार के लिए क्यों अहम है यह मौका

बिहार में सत्तू सिर्फ एक खाद्य पदार्थ नहीं, बल्कि यहां की खान-पान संस्कृति का जीवंत हिस्सा माना जाता है। चना आधारित इस उत्पाद की पहचान अब धीरे-धीरे बिहार की पारंपरिक खाद्य विरासत के तौर पर भी होने लगी है। BRICS जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर इसकी मौजूदगी इस बात का साफ संकेत है कि स्थानीय और पारंपरिक उत्पादों को भी अब वैश्विक स्तर पर पहचान मिल रही है। इससे न सिर्फ बिहार के उत्पादकों को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि आने वाले समय में राज्य के अन्य पारंपरिक खाद्य उत्पादों को भी इसी तरह के मंच मिलने की उम्मीद बढ़ जाती है।

BRICS Summit: कितने पत्रकार पहुंच रहे और कौन-कौन से देश शामिल

18वें BRICS समिट की कवरेज के लिए दिल्ली में करीब 1,200 से 1,300 पत्रकारों के पहुंचने की उम्मीद है, जिनमें सदस्य देशों के साथ-साथ सहयोगी देशों के मीडियाकर्मी भी शामिल हैं। भारत मंडपम में इन पत्रकारों की सुविधा के लिए एक विशेष इंटरनेशनल मीडिया सेंटर भी तैयार किया जा रहा है। इस समय BRICS के विस्तारित समूह में कुल 11 पूर्ण सदस्य देश हैं, जिनमें ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और यूएई शामिल हैं। इसके अलावा बेलारूस, बोलीविया, क्यूबा, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम सहयोगी देशों के तौर पर इस समूह से जुड़े हुए हैं।

कुल मिलाकर BRICS समिट के गुडी बैग में बिहार के सत्तू को शामिल किया जाना सिर्फ एक खाद्य उत्पाद की मौजूदगी भर नहीं है, बल्कि यह बिहार की स्थानीय संस्कृति और देसी स्वाद को दुनिया के सामने रखने का एक अनूठा मौका भी है। इस तरह के आयोजनों में पारंपरिक और स्थानीय उत्पादों को शामिल करना देश की सांस्कृतिक विविधता को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित करने का बेहतर जरिया साबित हो सकता है। जैसे-जैसे भारत में इस तरह के वैश्विक आयोजन बढ़ते जाएंगे, वैसे-वैसे स्थानीय उत्पादों को इस तरह की पहचान मिलने के अवसर भी बढ़ने की उम्मीद है। बिहार के सत्तू का यह सफर आने वाले समय में राज्य के अन्य पारंपरिक उत्पादों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है।

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