Bihar Flood Alert: गंडक ने तोड़ा रिकॉर्ड, कई जिलों में बाढ़ का खतरा
गंडक 91.25 मीटर पर पहुंची, गोपालगंज-सारण समेत कई जिलों में बाढ़ का खतरा बढ़ा
Bihar Flood Alert: मानसून के अंतिम चरण में नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में हुई भारी बारिश ने बिहार में एक बार फिर विनाशकारी बाढ़ की आशंका को गहरा दिया है। राज्य की प्रमुख नदियों—गंडक, बूढ़ी गंडक, गंगा और सोन—का जलस्तर तेजी से बढ़ते हुए चेतावनी और खतरे के निशान को पार कर चुका है। सर्वाधिक विस्फोटक स्थिति गंडक नदी बेसिन में बनी हुई है, जहां पश्चिम चंपारण के बगहा गेज स्थल पर नदी ने 91.25 मीटर के स्तर को छूकर अब तक के सभी जलस्तर रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।
अचानक आए इस भारी जलप्रवाह के कारण पश्चिम चंपारण जिले में चंपारण तटबंध दो स्थानों पर टूट गया है, जिससे निचले इलाकों में पानी फैलने लगा है। वाल्मीकिनगर गंडक बैराज से 5 लाख क्यूसेक से अधिक पानी का डिस्चार्ज निचले जिलों की ओर बढ़ने से गोपालगंज, सारण, पूर्वी चंपारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली के तटवर्ती इलाकों में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। जल संसाधन विभाग और स्थानीय जिला प्रशासन की टीमें तटबंधों को सुरक्षित रखने और प्रभावित आबादी को सुरक्षित ठिकानों तक पहुंचाने के लिए युद्धस्तर पर जुटी हैं।
Bihar Flood Alert: 91.25 मीटर पर पहुंचा जलस्तर
जल संसाधन विभाग द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, बगहा स्थित गेज स्टेशन पर गंडक नदी का जलस्तर 91.25 मीटर दर्ज किया गया। यह स्तर वर्ष 2024 में दर्ज किए गए 90.90 मीटर के पिछले उच्चतम जलस्तर (HFL) से 0.35 मीटर अधिक है। नदी के इस अप्रत्याशित रूप से ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंचने से संपूर्ण तटबंध तंत्र पर भारी दबाव आ गया है।
इस जलप्रलय का मुख्य कारण वाल्मीकिनगर बैराज पर हुआ अत्यधिक जलस्राव रहा। 28 सितंबर को बैराज पर लगभग 5,43,500 क्यूसेक पानी का भारी डिस्चार्ज दर्ज किया गया था। चिंताजनक बात यह रही कि बैराज पर 13 घंटे तक लगातार पानी का बहाव 5 लाख क्यूसेक से ऊपर और 32 घंटे तक 4 लाख क्यूसेक से अधिक बना रहा। भारी मात्रा में छोड़े गए इस पानी ने मैदानी इलाकों में पहुंचते ही तबाही मचानी शुरू कर दी।
पश्चिम चंपारण में दो स्थानों पर चंपारण तटबंध क्षतिग्रस्त
गंडक के प्रचंड वेग और अभूतपूर्व दबाव के चलते पश्चिम चंपारण जिले में चंपारण तटबंध की संरचना को गंभीर क्षति पहुंची है। आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार बगहा-1 प्रखंड के अंतर्गत खैरतवा और बैरिया प्रखंड के फुलियाखाड़ में तटबंध दो स्थानों पर कट गया। तटबंध के क्षतिग्रस्त होते ही संबंधित क्षेत्रों में अफरा-तफरी मच गई, जिसके बाद जल संसाधन विभाग के अभियंताओं ने मौके पर पहुंचकर बोल्डर क्रेट्स और सैंडबैग्स के जरिए बाढ़ संघर्षात्मक कार्य (Flood Fighting Works) प्रारंभ किए।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि तटबंधों पर हो रहे कटाव, सीपेज और ओवरटॉपिंग की स्थिति से निपटने के लिए बगहा, बेतिया, मोतिहारी और गोपालगंज में अतिरिक्त तकनीकी टास्क फोर्स तैनात की गई हैं। अब तक संवेदनशील तटबंधों के 169 कमजोर बिंदुओं पर आपातकालीन सुरक्षा कार्य पूरे कर बांधों को सुरक्षित रखने का प्रयास किया गया है।
गोपालगंज में 7 गांवों में घुसा पानी, 1,900 परिवार प्रभावित
गंडक नदी का रौद्र रूप गोपालगंज जिले के निचले इलाकों में साफ नजर आने लगा है। जिला प्रशासन से प्राप्त जानकारी के अनुसार सदर प्रखंड के करीब सात गांवों में नदी का पानी प्रवेश कर चुका है, जिससे लगभग 1,900 परिवार सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। फसलें जलमग्न हो गई हैं और गांवों का संपर्क मुख्य मार्गों से कट गया है।
बाढ़ के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने प्रभावित ग्रामीणों को सुरक्षित ऊंचे स्थानों और शरणार्थी शिविरों में स्थानांतरित करना शुरू कर दिया है। विस्थापित परिवारों के लिए तीन सामुदायिक रसोइयां (कम्युनिटी किचन्स) शुरू की गई हैं, ताकि भोजन का संकट न हो। साथ ही बेघर हुए लोगों को अस्थायी आश्रय के लिए पॉलीथिन शीट्स और तिरपाल बांटे जा रहे हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और पशुपालन विभाग की टीमों को भी दवाइयों के साथ फील्ड में उतारा गया है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने किया हवाई सर्वेक्षण, डुमरिया घाट का लिया जायजा
बाढ़ की गंभीरता को देखते हुए बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने वैशाली, सारण, पूर्वी चंपारण और गोपालगंज के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया। हवाई निरीक्षण के उपरांत मुख्यमंत्री ने गोपालगंज के डुमरिया घाट पहुंचकर गंडक नदी के बढ़े जलस्तर और सुरक्षा व्यवस्थाओं का स्थलीय निरीक्षण भी किया।
निरीक्षण के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि डुमरिया घाट के पास गंडक नदी का जलस्तर 64.08 मीटर पर पहुंच गया है, जो खतरे के निशान (62.22 मीटर) से करीब 1.86 मीटर ऊपर है और यह 64.36 मीटर के सर्वकालिक उच्चतम स्तर से मात्र 28 सेंटीमीटर दूर है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि तटबंधों की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने प्रभावित परिवारों को तत्काल सूखा राशन, शुद्ध पेयजल, नौकाओं की व्यवस्था और चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
सारण, वैशाली और मुजफ्फरपुर में भी नदियां लाल निशान के पार
गंडक के निचले प्रवाह वाले जिलों सारण और वैशाली में भी पानी का स्तर लगातार चिंता बढ़ा रहा है। वैशाली जिले के लालगंज में गंडक का जलस्तर 51.28 मीटर दर्ज किया गया, जो 50.50 मीटर के खतरे के निशान से काफी ऊपर है। मुजफ्फरपुर के रेवा घाट और रनिसैदपुर में भी संबंधित नदियां लाल निशान के ऊपर बह रही हैं, जिससे दियारा इलाकों में खेत और रिहायशी बस्तियां जलमग्न होने लगी हैं।
उधर खगड़िया जिले में बूढ़ी गंडक नदी अपने सर्वकालिक उच्चतम बाढ़ स्तर (HFL) को पार कर गई है, जिससे तटवर्ती इलाकों में दहशत का माहौल है। हालांकि सोन नदी का जलस्तर पटना के मनेर में 51.10 मीटर पर था, जो चेतावनी स्तर (51 मीटर) से थोड़ा ऊपर किंतु खतरे के निशान (52 मीटर) से नीचे बना हुआ है। पटना के दीघा घाट पर गंगा नदी भी 49.69 मीटर पर बह रही है, जो खतरे के निशान 50.45 मीटर के करीब पहुंच रही है।
Bihar Flood Alert: अगले 48 घंटे बेहद संवेदनशील, प्रशासनिक तंत्र मुस्तैद
बिहार में बाढ़ का मौजूदा संकट ऊपरी इलाकों और नेपाल से आने वाले पानी के समय और मात्रा पर पूरी तरह निर्भर है। मौसम विज्ञान विभाग और केंद्रीय जल आयोग के अनुसार गंडक और बूढ़ी गंडक का जलस्तर अगले कुछ दिनों तक उच्च स्तर पर बना रह सकता है। तटबंधों पर पानी का लगातार दबाव बने रहने से रिसाव और कटाव का खतरा अभी टला नहीं है।
राज्य आपदा प्रबंधन विभाग, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की अतिरिक्त कंपनियों को संवेदनशील जिलों में स्टैंडबाय पर रखा गया है ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में राहत व बचाव कार्य तुरंत शुरू किया जा सके। प्रशासन ने नदी किनारे बसे ग्रामीणों से सतर्क रहने, अफवाहों पर ध्यान न देने और सुरक्षित स्थानों पर बने रहने की अपील की है।
Read more here