Assembly Election 2027: यूपी समेत 5 राज्यों में अफसरों के तबादले, 30 नवंबर तक डेडलाइन

चुनाव आयोग ने यूपी, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर से 30 नवंबर तक अनुपालन रिपोर्ट मांगी।

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Assembly Election 2027: देश के पांच प्रमुख राज्यों में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को निष्पक्ष, पारदर्शी और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने के लिए भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने अभी से प्रशासनिक कसावट शुरू कर दी है। चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर की राज्य सरकारों को कड़ा निर्देश जारी करते हुए चुनाव प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों के बड़े पैमाने पर तबादले करने को कहा है। आयोग की मानक नीति के अनुसार, कोई भी अधिकारी अपने गृह जिले में तैनात रहकर चुनाव नहीं करा सकेगा। इसके अलावा, जिन अधिकारियों ने पिछले चार वर्षों में किसी एक जिले में तीन साल का कार्यकाल पूरा कर लिया है या निर्धारित कट-ऑफ तिथि तक पूरा करने वाले हैं, उन्हें भी तत्काल प्रभाव से स्थानांतरित किया जाएगा। आयोग ने सभी पांचों राज्यों के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों को इस आदेश पर अमल करते हुए 30 नवंबर 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट सौंपने की अंतिम समयसीमा तय की है।

निष्पक्ष चुनाव के लिए आयोग का सख्त निर्देश, गृह जिले में नहीं होगी तैनाती

निर्वाचन आयोग द्वारा सभी पांचों चुनावी राज्यों के मुख्य सचिवों और मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को भेजे गए आधिकारिक पत्र में साफ कहा गया है कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए यह फेरबदल अनिवार्य है। अक्सर यह देखा जाता है कि गृह जिले में पदस्थ होने या लंबे समय तक एक ही जगह टिके रहने से स्थानीय प्रशासन पर पक्षपात और राजनीतिक दबाव के आरोप लगते हैं। इसी जोखिम को समाप्त करने के लिए आयोग ने यह नीतिगत कदम उठाया है।
कार्यकाल की गणना के लिए आयोग ने राज्यों के चुनावी चक्र के अनुसार अलग-अलग कट-ऑफ तारीखें तय की हैं। उत्तर प्रदेश में विधानसभा का कार्यकाल मई 2027 में समाप्त हो रहा है, इसलिए वहां तीन साल की सेवा अवधि की गणना 31 मई 2027 को आधार मानकर की जाएगी। वहीं दूसरी ओर पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर की विधानसभाओं का कार्यकाल मार्च 2027 में पूरा हो रहा है, जिसके चलते इन चार राज्यों में अधिकारियों के कार्यकाल की गणना 31 मार्च 2027 के आधार पर की जाएगी। इस समयसीमा के भीतर तय कार्यकाल पूरा करने वाले किसी भी अधिकारी को फील्ड पोस्टिंग में बनाए रखने की अनुमति नहीं होगी।

एडीएम, एसडीएम से लेकर पुलिस इंस्पेक्टर तक आएंगे तबादला नीति के दायरे में

आयोग का यह स्थानांतरण आदेश केवल जिलाधिकारियों या जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) तक सीमित नहीं है, बल्कि चुनाव प्रबंधन और कानून-व्यवस्था की प्रत्यक्ष रीढ़ माने जाने वाले सभी अधिकारियों पर लागू होगा। इसमें अपर जिलाधिकारी (ADM), उपजिलाधिकारी (SDM), तहसीलदार, खंड विकास अधिकारी (BDO), निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) और सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (AERO) शामिल हैं। इसके साथ ही मंडलायुक्तों, नगर निगमों के आयुक्तों और विकास प्राधिकरणों के उन अधिकारियों पर भी यह आदेश लागू होगा जिन्हें चुनाव से जुड़े दायित्व सौंपे जाने हैं।
सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को पुख्ता रखने के लिए पुलिस महकमे में भी व्यापक स्तर पर फेरबदल देखने को मिलेगा। जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों और पुलिस अधीक्षकों से लेकर फील्ड में तैनात पुलिस उपाधीक्षक (DSP) और पुलिस निरीक्षक (Inspector) रैंक के सभी अधिकारियों की तैनाती की समीक्षा की जाएगी। आयोग ने चुनाव के दौरान अवैध शराब और नकदी के वितरण पर रोक लगाने वाले आबकारी और परिवहन विभागों के फील्ड अधिकारियों को भी इस नीति के दायरे में रखा है, जिसके तहत आबकारी उपनिरीक्षक और उससे ऊपर के अधिकारी स्थानांतरित किए जाएंगे।

पुरानी विधानसभा सीट पर दोबारा तैनाती पर रोक और राज्य मुख्यालय को छूट

आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन अधिकारियों ने पिछले विधानसभा चुनाव या उसके बाद हुए किसी उपचुनाव के दौरान किसी विशेष विधानसभा क्षेत्र या जिले में रिटर्निंग ऑफिसर, सहायक रिटर्निंग ऑफिसर या थाना प्रभारी के रूप में काम किया था, उन्हें उसी विधानसभा क्षेत्र या जिले में दोबारा चुनावी जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। यदि किसी अधिकारी को उसी जिले में पदोन्नति देकर दूसरे पद पर नियुक्त किया गया है, तो उसकी कुल सेवा अवधि की गणना में पदोन्नति से पहले और बाद दोनों समय को एक साथ जोड़ा जाएगा।
हालांकि, इस नीति में राज्य मुख्यालयों पर तैनात अधिकारियों को सामान्य रूप से छूट प्रदान की गई है, भले ही वह मुख्यालय उसी जिले के भौगोलिक दायरे में आता हो। इसके अतिरिक्त आवश्यक सेवाओं से जुड़े कार्मिकों—जैसे डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक और स्कूल-कॉलेजों के प्राचार्यों—पर यह सामान्य तबादला नीति लागू नहीं होगी। लेकिन यदि इनमें से किसी भी कर्मचारी या अधिकारी के खिलाफ किसी राजनीतिक दल या प्रत्याशी के पक्ष में पक्षपात करने की शिकायत सही पाई जाती है, तो निर्वाचन आयोग तत्काल उसके स्थानांतरण और कठोर विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई का आदेश दे सकता है।

Assembly Election 2027: विशेष मतदाता पुनरीक्षण (SIR) पूरा होने के बाद ही हटेंगे संबंधित अधिकारी

आयोग ने मतदाता सूची के शुद्धिकरण को लेकर भी एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। इन राज्यों में वर्तमान में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में शामिल अधिकारियों को अंतिम मतदाता सूची के विधिवत प्रकाशन से पहले उनके पद से नहीं हटाया जा सकेगा। यदि किसी अपरिहार्य या आपात स्थिति में किसी ऐसे अधिकारी का स्थानांतरण अनिवार्य हो जाता है, तो इसके लिए संबंधित राज्य सरकार को पहले भारत निर्वाचन आयोग से औपचारिक लिखित पूर्व-अनुमति लेनी होगी।
मुख्य सचिवों और पुलिस प्रमुखों को निर्देश दिए गए हैं कि तबादला आदेश जारी होते ही अधिकारियों को तत्काल कार्यभार सौंपना होगा और वे अपने स्थान पर नए अधिकारी के पदभार ग्रहण करने का इंतजार नहीं करेंगे। नई पोस्टिंग से पहले संबंधित राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से परामर्श करना अनिवार्य होगा। जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत आयोग को विधानसभा का कार्यकाल पूरा होने से छह माह पूर्व चुनाव कराने का कानूनी अधिकार प्राप्त है, ऐसे में 30 नवंबर तक अनुपालन रिपोर्ट तलब करने का यह कदम स्पष्ट संकेत देता है कि चुनाव आयोग 2027 की चुनावी जंग के लिए प्रशासनिक मैदान को पूरी तरह दुरुस्त करने में जुट गया है।

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