AI in IRCTC: ट्रेन में खाने की क्वालिटी पर अब AI की सख्त नजर, IRCTC ने शुरू की क्रांतिकारी व्यवस्था, मक्खी-कॉकरोच से लेकर गंदगी तक सब पकड़ में
IRCTC ने शुरू की क्रांतिकारी व्यवस्था, मक्खी-कॉकरोच से गंदगी तक सब पकड़ में
AI in IRCTC: भारतीय रेलवे से सफर करने वाले करोड़ों यात्रियों के लिए खानपान की स्वच्छता और गुणवत्ता को लेकर एक बेहद राहत भरी और बड़ी खबर सामने आई है। रेल यात्रा के दौरान ट्रेनों में मिलने वाले भोजन की क्वालिटी, शुद्धता और किचनों की साफ-सफाई पर अब किसी इंसान की नहीं, बल्कि साक्षात आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की पैनी और चौबीसों घंटे सख्त नजर रहेगी। इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (IRCTC) ने देश भर में फैले अपने सभी प्रमुख बेस किचनों में एक अत्याधुनिक एआई-आधारित कैमरा सर्विलांस सिस्टम पूरी तरह से स्थापित कर दिया है, जो खाना बनाने की शुरुआत से लेकर उसकी पैकिंग तक की पूरी प्रक्रिया को ‘राउंड द क्लॉक’ (24 घंटे) मॉनिटर कर रहा है।
4 जून 2026 को सामने आई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह क्रांतिकारी और हाईटेक व्यवस्था न सिर्फ यात्रियों को पूरी तरह से स्वच्छ, बैक्टीरिया-मुक्त और सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराएगी, बल्कि किचनों में काम करने वाले स्टाफ द्वारा की जाने वाली छोटी से छोटी मानवीय लापरवाही को भी पल भर में पकड़ लेगी। आईआरसीटीसी के इस ऐतिहासिक और डिजिटल कदम से प्रतिदिन ट्रेनों में सफर करने वाले और रेलवे का भोजन करने वाले लाखों यात्रियों को सीधे तौर पर एक बड़ा लाभ मिलेगा। आइए विस्तार से जानते हैं कि आईआरसीटीसी का यह नया एआई मॉनिटरिंग सिस्टम आखिर किस तरह काम करता है, इसके तकनीकी पहलू क्या हैं और इससे भारतीय रेलवे की खानपान सेवा में कितना बड़ा बदलाव आने वाला है।
IRCTC का AI मॉनिटरिंग सिस्टम: यात्री स्वास्थ्य और स्वच्छता की नई डिजिटल गारंटी
भारतीय रेलवे के इतिहास में पहली बार खानपान व्यवस्था को पूरी तरह से पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए आईआरसीटीसी ने देश के विभिन्न राज्यों में सक्रिय अपने 800 से ज्यादा विशाल बेस किचनों में कुल 2394 अत्याधुनिक एआई-आधारित कैमरे (AI-enabled Cameras) लगाए हैं। ये सभी हाई-डेफिनिशन कैमरे सीधे देश की राजधानी दिल्ली में स्थित आईआरसीटीसी के एक विशाल ‘केंद्रीय वार रूम’ (Central War Room) से हाई-स्पीड इंटरनेट के माध्यम से सीधे जुड़े हुए हैं, जहां से पूरे देश की कैटरिंग व्यवस्था की लाइव और डिजिटल निगरानी की जा रही है।
यह एडवांस एआई सिस्टम मुख्य रूप से कुल 9 प्रकार की बड़ी और गंभीर गड़बड़ियों या सुरक्षा प्रोटोकॉल के उल्लंघन को रीयल-टाइम में स्वतः पहचानने और पकड़ने में पूरी तरह से सक्षम है। इन 9 प्रमुख मापदंडों में—किचन के फर्श पर गंदगी या अस्वच्छता होना, खाना बनाने वाले शेफ या रसोइयों द्वारा सिर पर ‘हेयरनेट’ न पहनना, हाथों में डिस्पोजेबल ग्लव्स (दस्ताने) का इस्तेमाल न करना, किचन में चूहों, मक्खियों या कॉकरोच (तिलचट्टों) की मौजूदगी होना, और यहां तक कि हवा में उड़ने वाले या बर्तनों के आसपास रेंगने वाले मात्र 7 से 8 मिलीमीटर जितने सूक्ष्म कीड़ों का तुरंत पता लगाना शामिल है। आईआरसीटीसी के अनुसार, इस पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत लगभग ढाई साल पहले की गई थी, लेकिन अब इसके शानदार परिणामों को देखते हुए सॉफ्टवेयर को अपग्रेड कर इसका दायरा पूरे देश में फैला दिया गया है। यह पहल इसलिए भी गेम-चेंजर मानी जा रही है क्योंकि ट्रेन यात्रा के दौरान यात्रियों द्वारा सबसे ज्यादा शिकायतें खाने में बाल मिलने, कॉकरोच निकलने या बासी भोजन परोसे जाने को लेकर ही दर्ज कराई जाती रही हैं।
2394 कैमरों की पैनी नजर और देश के विभिन्न रेलवे जोनों से उठते अलर्ट्स
देश के कोने-कोने में फैले आईआरसीटीसी के ये एडवांस किचन अब चौबीसों घंटे कंप्यूटर विज़न तकनीक की सख्त निगरानी में हैं। आईआरसीटीसी द्वारा जारी किए गए जोनल आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि देश के उत्तरी रेलवे क्षेत्र (नॉर्दन ज़ोन) के किचनों से सबसे ज्यादा स्वच्छता उल्लंघन के अलर्ट प्राप्त हो रहे हैं, जहां अकेले पिछले एक महीने के भीतर कुल 4123 छोटी-बड़ी गड़बड़ियां एआई कैमरों द्वारा दर्ज की गईं। इसी क्रम में पूर्वी क्षेत्र से 3205, पश्चिमी क्षेत्र से 2687, दक्षिण मध्य क्षेत्र से 2226 और देश के दक्षिणी रेलवे क्षेत्र से सबसे कम यानी 1309 अलर्ट वार रूम के सर्वर पर रिकॉर्ड किए गए हैं।
वर्तमान में इस ऑटोमैटिक सिस्टम के जरिए देश भर के किचनों से प्रतिदिन औसतन 350 लाइव अलर्ट्स जनरेट हो रहे हैं। यह एआई सिस्टम सॉफ्टवेयर स्तर पर इतना ज्यादा संवेदनशील और सटीक है कि यदि कोई रसोइया खाना बनाते समय या सब्जी काटते समय कुछ पलों के लिए भी अपना मास्क नीचे करता है या हेयरनेट ठीक से नहीं पहनता, तो कैमरे का सेंसर उसकी तस्वीर कैप्चर करके तुरंत एक ‘रेड फ्लैग’ या अलर्ट जारी कर देता है। यह अलर्ट तुरंत दिल्ली स्थित केंद्रीय वार रूम से संबंधित बेस किचन के स्थानीय मैनेजर के मोबाइल फोन पर एक रीयल-टाइम मैसेज के रूप में भेज दिया जाता है। नियम के अनुसार, यदि किचन मैनेजर अलर्ट मिलने के अगले दो घंटे के भीतर उस गड़बड़ी को जमीन पर ठीक नहीं करता है, तो सिस्टम स्वतः ही उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट भेज देता है और संबंधित वेंडर या स्टाफ के खिलाफ भारी वित्तीय जुर्माना व निलंबन जैसी सख्त दंडात्मक कार्रवाई शुरू हो जाती है। इस कड़ी डिजिटल व्यवस्था ने कैटरिंग स्टाफ के भीतर जवाबदेही और डर को कई गुना बढ़ा दिया है।
मशीन लर्निंग तकनीक का कमाल और रोजाना 18 लाख रेल यात्रियों को बेहतर भोजन
तकनीकी रूप से आईआरसीटीसी का यह नया सुरक्षा तंत्र बेहद एडवांस और मशीन लर्निंग (Machine Learning) एल्गोरिदम पर आधारित है। ये कैमरे केवल साधारण सीसीटीवी की तरह वीडियो रिकॉर्डिंग नहीं करते, बल्कि ये वीडियो की एक-एक फ्रेम का लाइव और गहन रीयल-टाइम एनालिसिस (Real-time Analysis) करते हैं। लगातार हो रहे डेटा अपग्रेडेशन के कारण ये कैमरे इंसानी चेहरों, कपड़ों के पैटर्न और हाइजीन मानकों को पूरी तरह पहचान चुके हैं। उदाहरण के लिए, यदि किसी किचन के किसी कोने में हल्की सी भी गंदगी दिखती है या हवा में मक्खियां तैरती नजर आती हैं, तो सिस्टम इंसानी हस्तक्षेप के बिना स्वतंत्र रूप से अलार्म बजा देता है। विशेष रूप से मानसून और मौसम बदलने के समय, जब बैक्टीरिया के फैलने और फूड पॉइजनिंग का खतरा सबसे ज्यादा होता है, तब यह सिस्टम यात्रियों के स्वास्थ्य की रक्षा में एक अभूतपूर्व सुरक्षा कवच साबित हो रहा है। आईआरसीटीसी के आईटी विंग के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि शुरुआत में सॉफ्टवेयर मैपिंग के दौरान कुछ गलत (फॉल्स) अलर्ट भी आ रहे थे, लेकिन अब सिस्टम की सटीकता (Accuracy) 98 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है।
वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, आईआरसीटीसी भारतीय रेलवे के नेटवर्क पर प्रतिदिन औसतन 18 लाख यात्रियों को विभिन्न माध्यमों से तैयार भोजन और नाश्ता उपलब्ध करा रहा है, जिसका सालाना आंकड़ा 60 करोड़ के विशाल स्तर को पार कर जाता है। देश की सबसे वीआईपी और प्रीमियम ट्रेनों जैसे वंदे भारत एक्सप्रेस, राजधानी, शताब्दी, दुरंतो, तेजस और गतिमान एक्सप्रेस से लेकर सभी महत्वपूर्ण मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों में यात्रा करने वाले नागरिकों को अब इस एआई मॉनिटरिंग के कारण पूरी तरह से शुद्ध और होटल जैसा स्वादिष्ट खाना मिलने का रास्ता साफ हो गया है। पहले ट्रेनों में खराब और दूषित भोजन के कारण यात्रियों के पेट में दर्द, डायरिया या गंभीर फूड पॉइजनिंग होने की खबरें अक्सर मीडिया की सुर्खियां बनती थीं, लेकिन अब इस डिजिटल पहरेदारी के कारण ऐसी अप्रिय घटनाओं और यात्रियों की शिकायतों में साल दर साल एक बड़ी गिरावट दर्ज की जा रही है, जो भारतीय रेल के आधुनिकीकरण की एक बेहद सुखद तस्वीर है।
लापरवाही पर भारी जुर्माना और भारतीय रेलवे की बदलती वैश्विक छवि
हालिया दिनों में रेल मंत्रालय और आईआरसीटीसी ने खाने की गुणवत्ता से खिलवाड़ करने वाले ठेकेदारों और सप्लाई करने वाली बाहरी कंपनियों के खिलाफ बेहद सख्त और आक्रामक रुख अपनाना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी कार्रवाई के तहत हाल ही में पटना-टाटानगर वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन में सफर कर रहे यात्रियों को खराब और खट्टा दही परोसे जाने की एक गंभीर शिकायत पर त्वरित संज्ञान लेते हुए रेलवे बोर्ड ने आईआरसीटीसी पर सीधे 10 लाख रुपये और संबंधित भोजन सप्लाई करने वाली निजी वेंडर कंपनी पर पूरे 50 लाख रुपये का एक ऐतिहासिक और रिकॉर्ड तोड़ जुर्माना ठोंका था। यह सख्त कार्रवाई साफ संदेश देती है कि अब यात्रियों के स्वास्थ्य और रेलवे की साख के साथ कोई भी समझौता नहीं किया जाएगा।
यदि हम आधिकारिक शिकायत आंकड़ों को देखें, तो पिछले पांच सालों में खाने की खराब क्वालिटी को लेकर रेलवे के शिकायत पोर्टल्स पर 19,000 से अधिक मामले दर्ज हुए थे। लेकिन कड़े प्रशासनिक कदमों और एआई तकनीक के आने के बाद साल 2023-24 में जहां 7026 शिकायतें आई थीं, वहीं साल 2024-25 के दौरान यह आंकड़ा घटकर 6645 रह गया है। रेलवे के वरिष्ठ नीति विश्लेषकों और विशेषज्ञों का मानना है कि आईआरसीटीसी का यह अत्याधुनिक प्रयोग भारतीय रेलवे को पारंपरिक ढर्रे से निकालकर पूरी तरह से एक आधुनिक, डिजिटल और यात्री-केंद्रित (Passenger-centric) वैश्विक परिवहन प्रणाली के रूप में स्थापित कर रहा है। यह अनूठी तकनीक आने वाले दिनों में न केवल देश के सभी रेलवे स्टेशनों के रिफ्रेशमेंट रूम्स और फूड वेंडिंग स्टॉल्स पर भी लागू की जाएगी, बल्कि दुनिया के अन्य बड़े रेल नेटवर्क्स के लिए भी सुशासन और क्वालिटी कंट्रोल का एक बेहतरीन और अनुकरणीय मॉडल साबित होगी।
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