Afghanistan Earthquake 2026: सुबह-सुबह 4.1 तीव्रता के भूकंप से कांपी धरती, जानें केंद्र और गहराई

फैजाबाद के पास 130 किमी गहराई में भूकंप, फिलहाल बड़े नुकसान की सूचना नहीं

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Afghanistan Earthquake 2026: अफगानिस्तान में सोमवार सुबह धरती के डोलने से लोगों में एक बार फिर दहशत का माहौल बन गया। भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, अफगानिस्तान के उत्तरी हिस्से में रिक्टर पैमाने पर 4.1 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। यह भूकंपीय घटना सोमवार, 7 सितंबर 2026 की सुबह भारतीय समयानुसार 5 बजकर 36 मिनट 23 सेकेंड पर घटित हुई। भूकंप का केंद्र जमीन के भीतर लगभग 130 किलोमीटर की गहराई में स्थित था। सीस्मोलॉजिकल आंकड़ों के आधार पर इसका मुख्य केंद्र बदख्शां प्रांत की राजधानी फैजाबाद से लगभग 112 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में चिन्हित किया गया है।
हिंदुकुश पर्वतीय श्रृंखला से सटे इस इलाके में भूकंप की हलचल कोई नई बात नहीं है, किंतु सुबह के समय अचानक आए इन झटकों के कारण लोग नींद से जागकर घरों से बाहर निकल आए। चूंकि यह इलाका भौगोलिक रूप से बेहद सक्रिय फॉल्ट लाइनों के बीच स्थित है, इसलिए हल्के से मध्यम झटके भी स्थानीय आबादी और आपदा प्रबंधन एजेंसियों के लिए तत्काल चिंता का विषय बन जाते हैं।

Afghanistan Earthquake 2026: फैजाबाद के पास रहा भूकंप का केंद्र, 130 किलोमीटर गहराई में उठी तरंगे

नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी द्वारा जारी आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, इस भूकंप के निर्देशांक 36.114 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 70.820 डिग्री पूर्वी देशांतर पर दर्ज किए गए। भूकंप का केंद्र फैजाबाद के दक्षिण-दक्षिण-पूर्व (SSE) में लगभग 112 किलोमीटर की दूरी पर था। यह स्थान बदख्शां और तूरान घाटी के दुर्गम पर्वतीय अंचलों के करीब पड़ता है, जिसकी सीमाएं ताजिकिस्तान और पाकिस्तान के उत्तरी क्षेत्रों से भी सटी हुई हैं।
सीस्मोलॉजिकल दृष्टि से इस भूकंप की सबसे बड़ी विशेषता इसका हाइपोसेंटर यानी गहराई रही। जमीन के 130 किलोमीटर नीचे स्थित होने के कारण इसे ‘इंटरमीडिएट-डेप्थ’ (मध्यम गहराई) वाला भूकंप माना गया है। आमतौर पर उथले स्तर यानी सतह के 10 से 30 किलोमीटर के दायरे में आने वाले भूकंप जमीन के ऊपर सबसे ज्यादा तबाही मचाते हैं। इसके विपरीत, 130 किलोमीटर की गहराई होने के चलते भूकंपीय तरंगों की सीधी विनाशकारी ऊर्जा सतह तक पहुंचते-पहुंचते काफी बिखर जाती है, जिससे तेज झटके महसूस होने के बावजूद बड़ी तबाही की आशंका सीमित हो जाती है।

जान-माल के नुकसान की खबर नहीं: सुदूर इलाकों में चल रही जांच

ताजा सीस्मोलॉजिकल और प्रशासनिक रिपोर्टों के मुताबिक, इस 4.1 तीव्रता वाले भूकंप से किसी भी प्रकार के जान-माल के बड़े नुकसान या इमारतों के गिरने की सूचना सामने नहीं आई है। अफगानिस्तान के स्थानीय अधिकारियों ने भी शुरुआती समीक्षा के बाद स्थिति के सामान्य रहने की बात कही है।
हालांकि, अफगानिस्तान का बदख्शां प्रांत अपनी अत्यंत जटिल, पथरीली और दुर्गम भौगोलिक बनावट के लिए जाना जाता है। यहां के ग्रामीण इलाकों में अधिकांश मकान कच्ची मिट्टी, पत्थरों और लकड़ी की छतों से बने होते हैं। ऐसे दूरदराज के पहाड़ी गांवों तक संचार तंत्र सीमित होने के कारण स्थानीय स्तर पर किसी हल्की क्षति का पूरा आकलन होने में कुछ समय लग सकता है। फिलहाल उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार सभी नागरिक सुरक्षित हैं और किसी आपातकालीन राहत अभियान की आवश्यकता नहीं पड़ी है।

सितंबर में लगातार हिल रही है अफगानिस्तान की जमीन

अफगानिस्तान के लिए यह सप्ताह लगातार भूगर्भीय गतिविधियों से भरा रहा है। 7 सितंबर के इस झटके से पहले भी पिछले कुछ दिनों में फैजाबाद और हिंदुकुश क्षेत्र में एक के बाद एक कई हल्के व मध्यम भूकंप दर्ज किए गए हैं। आंकड़ों के अनुसार 6 सितंबर को इसी क्षेत्र में 3.7 और 3.9 तीव्रता के दो अलग-अलग झटके रिकॉर्ड हुए थे, जबकि 4 सितंबर को फैजाबाद के दक्षिण में 4.4 तीव्रता का भूकंप आया था।
वैज्ञानिकों का मानना है कि किसी क्षेत्र में लगातार आ रहे ऐसे छोटे और मध्यम झटके जमीन के नीचे टेक्टोनिक प्लेटों में जमा हो रहे निरंतर तनाव को रिलीज करने का काम करते हैं। हालांकि, इन झटकों के आधार पर किसी तात्कालिक बड़े भूकंप की सटीक समयबद्ध भविष्यवाणी करना आधुनिक विज्ञान के लिए अब भी संभव नहीं है, लेकिन ये लगातार झटके इस पूरे इलाके के सीस्मिक रूप से सक्रिय बने रहने का पुख्ता प्रमाण हैं।

हिंदुकुश क्षेत्र में बार-बार क्यों आते हैं भूकंप? जानिए टेक्टोनिक विज्ञान

अफगानिस्तान का दुनिया के सबसे खतरनाक भूकंपीय क्षेत्रों में शुमार होने का मुख्य कारण इसका भौगोलिक स्थान है। यह देश भारतीय टेक्टोनिक प्लेट और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेट के सीधे टकराव वाले मुहाने पर स्थित है। लाखों वर्षों से भारतीय प्लेट लगातार उत्तर दिशा की ओर बढ़ रही है और यूरेशियन प्लेट पर दबाव बना रही है।
इस निरंतर गति के कारण हिंदुकुश पर्वतमाला के नीचे स्थित भ्रंश रेखाओं (Fault Lines) में भारी मात्रा में ऊर्जा जमा होती रहती है। जब यह आंतरिक चट्टानी दबाव अपनी सीमा पार कर जाता है, तो चट्टानें खिसकती हैं और वही तनाव भूकंपीय तरंगों के रूप में सतह पर कंपन पैदा करता है। यही कारण है कि अफगानिस्तान और उससे सटे पाकिस्तान के उत्तरी क्षेत्रों में हर महीने छोटे-बड़े दर्जनों झटके दर्ज किए जाते हैं।

Afghanistan Earthquake 2026:अतीत की त्रासदियों से सबक और सतर्कता की अनिवार्यता

अफगानिस्तान ने बीते वर्षों में कई बार विनाशकारी भूकंपों का दंश झेला है। हेरात और पक्तिका जैसे प्रांतों में आए शक्तिशाली भूकंपों ने हजारों लोगों की जान ली थी और पूरे के पूरे गांवों को मलबे में तब्दील कर दिया था। इसके अतिरिक्त अप्रैल 2026 में हिंदुकुश क्षेत्र के जुर्म इलाके के पास आए 5.8 तीव्रता के भूकंप ने भी कई लोगों को हताहत किया था।
यही ऐतिहासिक पृष्ठभूमि है जिसकी वजह से 4.1 तीव्रता जैसे अपेक्षाकृत हल्के झटके आने पर भी स्थानीय प्रशासन, आपदा प्रबंधन टीमें और वैज्ञानिक संस्थान तुरंत सतर्क हो जाते हैं। कमजोर निर्माण ढांचे और पहाड़ी ढलानों पर भूस्खलन के खतरे को देखते हुए आपदा विशेषज्ञ हमेशा लोगों को ऐसे झटकों के दौरान खुले मैदानों में आने और सतर्क रहने की सलाह देते हैं।

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