हर महीने किस तारीख को करें SIP? सही दिन चुना तो रिटर्न होगा ज्यादा, वरना पड़ेगा पछताना! 10 साल के आंकड़ों में सिर्फ 0.19% का फर्क, तारीख से ज्यादा जरूरी अनुशासन और निरंतरता

म्यूचुअल फंड SIP में तारीख का असर: 10 साल के आंकड़ों में सिर्फ 0.19% रिटर्न का फर्क, सही तारीख चुनने से ज्यादा जरूरी है अनुशासन, कैश फ्लो और लंबी अवधि

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SIP Date for Good Return: म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले करोड़ों भारतीयों के मन में हर महीने एक सवाल घूमता रहता है – SIP की तारीख कितनी अहम है? क्या 1 तारीख पर निवेश करना बेहतर है या 15 तारीख, या फिर 25 तारीख? हाल ही में एक बड़े लार्ज कैप म्यूचुअल फंड के 10 साल के विस्तृत आंकड़ों (मार्च 2015 से मार्च 2025 तक) का गहन विश्लेषण किया गया। नतीजे हैरान करने वाले रहे। लंबी अवधि में तारीख का असर रिटर्न पर न के बराबर होता है।

SIP Date for Good Return: SIP क्या है और तारीख का चुनाव क्यों लगता है इतना महत्वपूर्ण?

SIP म्यूचुअल फंड में नियमित निवेश का तरीका है। हर महीने तय तारीख को तय राशि ऑटो डेबिट होकर फंड में चली जाती है। इससे भाव ऊंचे हों या नीचे, हर बार कुछ यूनिट्स खरीद ली जाती हैं। यही रुपी कॉस्ट एवरेजिंग का जादू है। निवेशक सोचते हैं कि अगर तारीख सही चुनी जाए तो बाजार के अच्छे दिन में निवेश हो जाएगा और रिटर्न बढ़ जाएगा। लेकिन हकीकत इससे थोड़ी अलग है। 10 साल के आंकड़ों से साफ है कि तारीख बदलने से रिटर्न में बहुत मामूली अंतर आता है।

10 साल के आंकड़ों ने खोला बड़ा राज, रिटर्न में महज 0.19 प्रतिशत का फर्क

एक प्रमुख लार्ज कैप फंड के 10 साल के डेटा का विश्लेषण बेहद रोचक रहा। मार्च 2015 से मार्च 2025 तक हर तारीख पर ₹2000 मासिक SIP करने वाले निवेशकों के रिटर्न की तुलना की गई। नतीजा यह निकला कि सबसे कम रिटर्न 13.07 प्रतिशत और सबसे ज्यादा 13.26 प्रतिशत रहा। यानी पूरे 10 साल में कुल अंतर महज 0.19 प्रतिशत का था। ₹2000 मासिक SIP करने वाले एक निवेशक को 10 साल बाद तारीख के अंतर के कारण कुल रकम में महज ₹6,000 का अंतर आया।

असल रिटर्न किन बातों पर निर्भर करता है, तारीख से ज्यादा जरूरी ये 4 फैक्टर

एक्सपर्ट्स कहते हैं कि निवेशक तारीख पर ज्यादा ध्यान देते हैं जबकि असली मुनाफा चार अन्य बातों पर निर्भर करता है। पहला, आप किस फंड हाउस और किस स्कीम में निवेश कर रहे हैं। दूसरा, आप कितने सालों तक बाजार में टिके रहते हैं। तीसरा, हर साल अपनी SIP राशि को थोड़ा-थोड़ा बढ़ाना (Step-up SIP)। चौथा और सबसे जरूरी, बाजार गिर रहा हो तब भी किस्त न रोकना। कई निवेशक गिरावट में घबरा जाते हैं और SIP रोक देते हैं। यही सबसे बड़ी गलती है।

शॉर्ट टर्म बनाम लॉन्ग टर्म: छोटी अवधि में तारीख का असर ज्यादा

अगर आप सिर्फ 6 महीने या 1 साल के लिए SIP कर रहे हैं तो बाजार की चाल के साथ तारीख का थोड़ा असर जरूर दिख सकता है। उदाहरण के लिए अगर आप 1 तारीख को SIP शुरू करते हैं और उस दिन बाजार ऊंचे स्तर पर है तो शुरुआती यूनिट्स महंगी पड़ सकती हैं। लेकिन 10-15 साल के लंबे सफर में रुपी कॉस्ट एवरेजिंग अपना पूरा जादू दिखाती है। लंबे समय में औसत लागत बैलेंस हो जाती है। इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि 7 साल या उससे ज्यादा अवधि के लिए तारीख से ज्यादा महत्वपूर्ण निरंतरता है।

SIP Date for Good Return: सही तारीख कैसे चुनें? कैश फ्लो ही सबसे बड़ा फैक्टर

SIP की तारीख तय करने का सबसे सही तरीका बाजार की चाल नहीं बल्कि आपका कैश फ्लो देखना है। अगर आपकी सैलरी महीने की 1 से 5 तारीख के बीच आती है तो उसी दौरान SIP सेट कर दें। इससे खाते में पर्याप्त बैलेंस रहेगा और किस्त मिस होने या पेनल्टी लगने का खतरा खत्म हो जाएगा। सबसे अच्छी तारीख वह है जिस पर आपके पास पैसा नियमित रूप से उपलब्ध हो। अगर तारीख बदलनी हो तो फंड हाउस की ऐप या वेबसाइट से आसानी से बदल सकते हैं।

विशेषज्ञों की सलाह: धैर्य रखें और बाजार के उतार-चढ़ाव को नजरअंदाज करें

वित्तीय विशेषज्ञों का एकमत है कि SIP में सफलता का राज तारीख नहीं बल्कि अनुशासन है। वे कहते हैं कि बाजार गिरने पर भी SIP जारी रखें। एक प्रमाणित फाइनेंशियल प्लानर ने बताया कि उनके क्लाइंट्स में जो लोग 10 साल से SIP कर रहे हैं वे तारीख पर कम और निरंतरता पर ज्यादा फोकस करते हैं। उन्होंने कहा कि ₹2000 की SIP को 15 साल बाद ₹1 करोड़ से ज्यादा बना दिया जा सकता है अगर आप बीच में नहीं रुके।

SIP से जुड़ी आम गलतियां जो रिटर्न खा जाती हैं

निवेशक अक्सर कुछ गलतियां करते हैं जो तारीख से ज्यादा नुकसान पहुंचाती हैं। पहली गलती – बाजार गिरने पर SIP रोकना। दूसरी – राशि बढ़ाने में आनाकानी करना। तीसरी – सिर्फ एक फंड में सारा पैसा लगाना। चौथी – शॉर्ट टर्म लक्ष्य के लिए SIP शुरू करना। इन गलतियों से बचें तो तारीख चाहे जो भी हो, रिटर्न अच्छा ही आएगा।

निष्कर्ष: तारीख से ज्यादा जरूरी है अनुशासन और धैर्य

SIP की तारीख का चुनाव जरूर महत्वपूर्ण है लेकिन लंबी अवधि में इसका असर न के बराबर होता है। 10 साल के आंकड़े साफ बताते हैं कि 13.07 से 13.26 प्रतिशत के बीच रिटर्न आता है। असली खेल कैश फ्लो, फंड चॉइस, निवेश अवधि और निरंतरता पर है। बाजार का उतार-चढ़ाव SIP को नुकसान नहीं पहुँचाता बल्कि फायदा ही देता है। सही तारीख वह नहीं जो बाजार को सूट करे बल्कि वह जो आपके बजट को सूट करे।

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