West Bengal News: बंगाल में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, भंग होंगी सभी स्कूल प्रबंधन कमेटियां, अब ‘एडमिनिस्ट्रेटर’ संभालेंगे सरकारी स्कूलों की कमान

West Bengal News: स्कूलों की मैनेजमेंट कमेटियां भंग

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West Bengal News: पश्चिम बंगाल के शिक्षा जगत से इस वक्त की एक बहुत बड़ी और प्रशासनिक खबर सामने आ रही है। राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग ने सरकारी और सरकार द्वारा प्रायोजित (स्पॉन्सर्ड) स्कूलों के संचालन को लेकर एक नया और कड़ा निर्देश जारी किया है। कोलकाता स्थित विकास भवन (शिक्षा विभाग मुख्यालय) से मिली जानकारी के मुताबिक, राज्य सरकार ने सभी स्कूल मैनेजमेंट कमेटियों (SMC) को पूरी तरह से भंग करने का फैसला लिया है। अब इन पारंपरिक कमेटियों की जगह स्कूलों में ‘एडमिनिस्ट्रेटर’ (प्रशासक) नियुक्त किए जाएंगे। इस नए आदेश के तहत स्कूलों के सब-इंस्पेक्टर (SI) ही एडमिनिस्ट्रेटर की भूमिका निभाएंगे। यह नई व्यवस्था अगले सरकारी आदेश तक लागू रहेगी, जिसका मुख्य उद्देश्य स्कूलों के प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता लाना और जवाबदेही तय करना है।

West Bengal News: अब स्कूल सब-इनस्पेक्टरों (SI) के हाथ में होगी 5 से 10 स्कूलों की चाबी

शिक्षा विभाग द्वारा बुधवार को जारी किए गए आधिकारिक आदेश के अनुसार, इस नए सिस्टम में स्थानीय स्तर पर बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। अब तक जिन सरकारी और स्पॉन्सर्ड स्कूलों का प्रबंधन स्थानीय कमेटियां या राजनीतिक प्रभाव वाले लोग देखते थे, वहां अब पूरी तरह से सरकारी नियंत्रण होगा।

विभाग के नए नियमों के तहत, स्कूलों के सब-इंस्पेक्टर (SI) अब एडमिनिस्ट्रेटर के रूप में काम करेंगे। प्रत्येक सब-इंस्पेक्टर को उनके कार्यक्षेत्र (क्षेत्राधिकार) के अंतर्गत आने वाले लगभग 5 से 10 स्कूलों के प्रशासनिक और वित्तीय कार्यों की सीधे निगरानी करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इससे स्कूलों के रोजमर्रा के कामकाज में सरकारी तालमेल बेहतर होने की उम्मीद है।

बार-बार बदले फैसले: पहले DDO को दी गई थी जिम्मेदारी, अब फिर हुआ संशोधन

पश्चिम बंगाल स्कूल शिक्षा विभाग में पिछले कुछ दिनों से इस नीति को लेकर काफी कशमकश चल रही थी। दरअसल, यह पहली बार नहीं है जब विभाग ने इस तरह का कोई कड़ा कदम उठाया है। इससे पहले भी शिक्षा विभाग ने एक आदेश जारी कर सभी स्कूल मैनेजमेंट कमेटियों को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने की बात कही थी।

शुरुआत में कमेटियों को हटाने के बाद, आदेश में एक कूटनीतिक संशोधन किया गया था। उस संशोधन के तहत यह तय हुआ था कि ड्राइंग एंड डिसबर्सिंग ऑफिसर (DDO) को स्कूलों के प्रबंधन की मुख्य जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। लेकिन प्रशासनिक पेचीदगियों को देखते हुए, विभाग ने अब इस व्यवस्था को भी पलट दिया है और अंतिम रूप से सब-इंस्पेक्टरों को एडमिनिस्ट्रेटर बनाकर कमान सौंपने का फैसला किया है।

अगले आदेश तक बनी रहेगी नई व्यवस्था; सभी आला अधिकारियों को भेजी गई कॉपी

विकास भवन की ओर से जारी किए गए इस हाई-लेवल सर्कुलर में यह साफ-साफ स्पष्ट कर दिया गया है कि जब तक राज्य सरकार की ओर से कोई अगला नया नोटिफिकेशन या आदेश जारी नहीं होता, तब तक यही एडमिनिस्ट्रेटर ही स्कूल मैनेजमेंट कमेटियों की सभी शक्तियों और जिम्मेदारियों का इस्तेमाल करेंगे।

इस महत्वपूर्ण प्रशासनिक फैसले की कॉपियां राज्य के सभी संबंधित विभागों और अधिकारियों को कड़ाई से पालन करने के लिए भेज दी गई हैं। इनमें स्कूल शिक्षा आयुक्त, जिला विद्यालय निरीक्षक (DI), स्कूल सब-इंस्पेक्टर (SE), सभी जिलों के जिलाधिकारियों (DM) और पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष शामिल हैं, ताकि जमीनी स्तर पर इस आदेश को बिना किसी रुकावट के तुरंत लागू किया जा सके।

West Bengal News: क्यों पड़ी स्कूल मैनेजमेंट कमेटियों को भंग करने की जरूरत?

राजनीतिक और प्रशासनिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्य के कई सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में मैनेजमेंट कमेटियों को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं। कई जगहों पर स्थानीय कमेटियों के सदस्यों पर वित्तीय गबन, शिक्षकों की नियुक्तियों में कूटनीतिक हस्तक्षेप और आपसी गुटबाजी के आरोप लग रहे थे, जिससे स्कूलों का शैक्षणिक माहौल खराब हो रहा था।

इन्हीं सब कमियों को दूर करने और स्कूलों के बजट का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करने के लिए ममता सरकार ने यह सख्त रुख अपनाया है। जब कोई सरकारी अधिकारी (जैसे स्कूल एसआई) सीधे तौर पर 5 या 10 स्कूलों का एडमिनिस्ट्रेटर बनेगा, तो उसकी सीधी जवाबदेही सरकार के प्रति होगी। इससे भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी और मिड-डे मील से लेकर स्कूल के बुनियादी ढांचे के विकास तक के कामों में तेजी आएगी।

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