ममता बनर्जी पर ED का गंभीर आरोप – डेटा जब्त नहीं किया, फिर भी मुख्यमंत्री ने सबूत अपने कब्जे में लिए
ED का दावा - ममता बनर्जी ने छापेमारी में सबूत अपने साथ ले लिए, डेटा चोरी की FIR
West Bengal News: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया तूफान उठ खड़ा हुआ है, जहां प्रवर्तन निदेशालय (ED) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बीच कानूनी जंग तेज हो गई है। कलकत्ता हाई कोर्ट में आज ED और TMC की याचिकाओं पर सुनवाई हुई, जो राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म Indian Political Action Committee (I-PAC) के कोलकाता स्थित कार्यालय और उसके निदेशक प्रतीक जैन के आवास पर 8 जनवरी 2026 को की गई छापेमारी से जुड़ी है।
ED ने कोर्ट में दावा किया कि छापेमारी के दौरान कोई सामग्री जब्त नहीं की गई, क्योंकि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद मौके पर पहुंचकर महत्वपूर्ण दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और डिजिटल रिकॉर्ड्स को अपने कब्जे में ले लिया। एजेंसी ने इसे जांच में गंभीर बाधा और अपराध बताया है।
West Bengal News: छापेमारी का पूरा पृष्ठभूमि और घटनाक्रम

यह विवाद मूल रूप से कोयला तस्करी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के तहत शुरू हुआ। ED ने 8 जनवरी को सुबह करीब 6 बजे I-PAC के सॉल्ट लेक सेक्टर-5 स्थित कार्यालय और प्रतीक जैन के लाउडन स्ट्रीट स्थित आवास सहित कुल 10 स्थानों पर तलाशी ली। इनमें दिल्ली के चार और कोलकाता के छह ठिकाने शामिल थे।
एजेंसी का कहना है कि यह कार्रवाई Prevention of Money Laundering Act (PMLA) की धारा 17 के तहत की गई थी, जिसमें कोयला खनन से जुड़े अवैध धन के लेन-देन, हवाला और I-PAC को मिले लगभग 20 करोड़ रुपये की संदिग्ध राशि की जांच शामिल है। कुल घोटाले की राशि 2742 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
छापेमारी के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारियों और सहयोगियों के साथ मौके पर पहुंचीं। ED के अनुसार, उन्होंने जांच अधिकारियों को रोककर जब्त किए गए लैपटॉप, मोबाइल फोन, हार्ड डिस्क और महत्वपूर्ण फाइलों को जबरन अपने साथ ले लिया। एजेंसी ने कोर्ट को बताया कि “हमारे पास कुछ भी नहीं बचा, क्योंकि सब कुछ मुख्यमंत्री ने अपने साथ ले जाया।” ED ने इसे “अवैध कब्जा” और “जांच में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप” करार दिया।
हाई कोर्ट में ED की प्रमुख दलीलें और आरोप
आज की सुनवाई में ED की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने पेश होकर कई चौंकाने वाली बातें रखीं:
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डेटा जब्त नहीं हुआ: ED ने स्पष्ट किया कि तलाशी के दौरान कोई आधिकारिक जब्ती नहीं हुई, क्योंकि ममता बनर्जी ने सबूतों को हटा दिया। एजेंसी ने कहा, “जब डेटा जब्त ही नहीं किया गया, तो हम इसे कैसे सुरक्षित रखें?”
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TMC का दावा आधारहीन: ED ने TMC की याचिका को “रखरखाव योग्य नहीं” बताया। एजेंसी का तर्क था कि छापेमारी प्राइवेट व्यक्ति (प्रतीक जैन) के खिलाफ थी, TMC से इसका कोई सीधा संबंध नहीं।
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मुख्यमंत्री की मौजूदगी पर सवाल: ED ने पूछा कि प्राइवेट व्यक्ति के घर पर चल रही जांच में मुख्यमंत्री का व्यक्तिगत रूप से पहुंचना और सामग्री ले जाना क्यों जरूरी था? एजेंसी ने इसे “अपराध” और “संवैधानिक पद का दुरुपयोग” बताया।
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सुरक्षा की जिम्मेदारी: ED ने कहा कि अगर TMC को डेटा सुरक्षित रखने की चिंता है, तो एजेंसी इसका समर्थन करेगी, लेकिन जिम्मेदारी TMC पर है क्योंकि सामग्री मुख्यमंत्री ने ली थी।
ED ने सुनवाई टालने की मांग की क्योंकि मामला सुप्रीम कोर्ट में भी लंबित है, जहां एजेंसी ने ममता बनर्जी, डीजीपी राजीव कुमार और पुलिस कमिश्नर मनोज वर्मा के खिलाफ CBI जांच और FIR की मांग की है।
West Bengal News: TMC का पक्ष और राजनीतिक प्रतिक्रिया
TMC ने कोर्ट से अपनी पार्टी के गोपनीय चुनावी डेटा, रणनीति दस्तावेजों और 2026 विधानसभा चुनाव से जुड़ी संवेदनशील जानकारी को सुरक्षित रखने की मांग की। पार्टी का दावा है कि ED की कार्रवाई राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है और इसका उद्देश्य TMC की चुनावी तैयारी को बाधित करना है। TMC ने ED पर “असाधारण धमकी” और “बुलिंग” का आरोप लगाया। पार्टी के वकील ने कहा कि जब पार्टी को लगता है कि उसका डेटा राजनीतिक सलाहकार के पास है, तो उसे सुरक्षा का अधिकार है।
ममता बनर्जी ने पहले ही आरोप लगाया था कि ED TMC की गोपनीय जानकारी चुराने की कोशिश कर रही है। पार्टी ने राज्य सरकार के माध्यम से ED अधिकारियों के खिलाफ FIR भी दर्ज कराई है।
राजनीतिक संदर्भ और आगे की संभावनाएं
यह मामला 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से ठीक पहले उठा है, जब TMC I-PAC की मदद से अपनी रणनीति तैयार कर रही है। ED की कार्रवाई को BJP समर्थक “सबूत मिटाने” का प्रयास बता रहे हैं, जबकि TMC इसे केंद्र की “राजनीतिक साजिश” मान रही है।
सुप्रीम कोर्ट में ED की याचिका और हाई कोर्ट की अगली सुनवाई से स्थिति और स्पष्ट होगी। यह विवाद केंद्र-राज्य संबंधों में नया तनाव पैदा कर रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ED को यह साबित करना होगा कि छापेमारी वैध थी, जबकि TMC को डेटा की गोपनीयता साबित करनी होगी। फिलहाल, राजनीतिक गलियारों में बहस तेज है कि क्या यह जांच न्यायिक प्रक्रिया है या चुनावी हथियार?
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