West Asia Tension Flight Fare,- खाड़ी संकट की मार भारतीय यात्रियों पर! लंदन से मुंबई का हवाई किराया 9 लाख रुपये तक पहुंचा, सैकड़ों फ्लाइट्स रद्द; जानें पूरा हाल

मिडिल ईस्ट युद्ध से एयरस्पेस बंद, लंदन-मुंबई हवाई किराया 9 लाख तक, सैकड़ों फ्लाइट्स रद्द, वैकल्पिक रूट से किराया आसमान छुआ

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West Asia Tension: इजरायल और अमेरिका की संयुक्त सैन्य कार्रवाई भले ही ईरान की धरती पर हो रही हो लेकिन इसकी आंच अब भारत के आम यात्रियों की जेब तक पहुंच गई है। खाड़ी क्षेत्र के ऊपर से गुजरने वाले हवाई मार्गों में बाधा और अस्थायी एयरस्पेस बंद होने के कारण अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। लंदन से मुंबई जैसे प्रमुख रूट पर हवाई किराया सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना बढ़कर 9 लाख रुपये तक पहुंच गया है। सैकड़ों फ्लाइट्स रद्द हो गई हैं और जो उड़ानें चल रही हैं उनके रूट लंबे हो गए हैं।

West Asia Tension: क्यों बंद हुआ खाड़ी का एयरस्पेस

28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनई की मौत के बाद पूरे मध्य-पूर्व में युद्ध जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई। ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए मिडिल-ईस्ट में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और रणनीतिक स्थलों पर मिसाइल हमले शुरू कर दिए। दुबई, बहरीन, कुवैत और अबूधाबी जैसे देशों को भी ईरानी मिसाइलों का निशाना बनाया गया। इन हमलों के कारण खाड़ी देशों ने सुरक्षा कारणों से अपना-अपना एयरस्पेस या तो पूरी तरह बंद कर दिया या उड़ानों पर गंभीर प्रतिबंध लगा दिए। अबूधाबी इंटरनेशनल एयरपोर्ट को सोमवार तक बंद कर दिया गया और सभी उड़ानें रद्द कर दी गईं।

West Asia Tension: किराया 9 लाख रुपये तक कैसे पहुंचा

सामान्य परिस्थितियों में लंदन से मुंबई की उड़ान खाड़ी देशों के ऊपर से गुजरती है। यह सबसे छोटा और किफायती रूट है जो लगभग 9 से 10 घंटे में तय होता है। लेकिन जब खाड़ी का एयरस्पेस बंद हो जाता है तो एयरलाइंस को लंबे वैकल्पिक रूट अपनाने पड़ते हैं। इससे उड़ान की अवधि कई घंटे बढ़ जाती है और ईंधन की खपत में भारी वृद्धि होती है। उपलब्ध उड़ानों की संख्या अचानक घट गई जबकि यात्रियों की मांग बनी रही। इस मांग और आपूर्ति के असंतुलन के कारण एयरलाइंस ने किराए में भारी बढ़ोतरी कर दी। लंदन-मुंबई रूट पर जो टिकट सामान्यतः 50,000 से 80,000 रुपये में मिलता था वह अचानक 9 लाख रुपये तक पहुंच गया।

West Asia Tension: भारतीय एयरलाइंस और यात्रियों पर क्या असर

भारतीय एयरलाइंस जैसे Air India और IndiGo जो खाड़ी के रास्ते यूरोप और अमेरिका के लिए उड़ान भरती हैं उनके परिचालन पर गहरा असर पड़ा है। Air India, Emirates, Etihad और अन्य प्रमुख एयरलाइंस ने अपनी कई उड़ानें रद्द कर दी हैं या उनके रूट बदल दिए हैं। मध्य-पूर्व में काम करने वाले लाखों भारतीय प्रवासी कर्मचारी भी इस संकट से प्रभावित हैं। UAE, सऊदी अरब, कुवैत और बहरीन में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक रहते और काम करते हैं। उनमें से कई अपने परिवारों के पास भारत लौटना चाहते हैं लेकिन उड़ानों की कमी और आसमान छूते किराए के कारण यात्रा करना मुश्किल हो गया है।

West Asia Tension: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का बंद होना और तेल संकट

खाड़ी संकट का दूसरा बड़ा आयाम है ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद करने का ऐलान। यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है और दुनिया की कुल कच्चे तेल की आपूर्ति का करीब 20 प्रतिशत इसी रास्ते से गुजरता है। इस मार्ग के बंद होने की आशंका से कच्चे तेल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी से उछली हैं। तेल के महंगे होने से विमान ईंधन यानी ATF की कीमतें भी बढ़ेंगी जो एयरलाइंस की परिचालन लागत का सबसे बड़ा हिस्सा है। इससे हवाई किराए में आगे भी और बढ़ोतरी हो सकती है।

West Asia Tension: वैश्विक विमानन पर पड़ेगा दीर्घकालिक असर

यदि मध्य-पूर्व का यह संकट और लंबा खिंचता है तो वैश्विक विमानन उद्योग पर इसका दीर्घकालिक असर पड़ सकता है। खाड़ी क्षेत्र के ऊपर से गुजरने वाले हवाई मार्ग यूरोप-एशिया और अमेरिका-एशिया रूट के लिए सबसे छोटे और किफायती विकल्प हैं। इनके बंद होने से एयरलाइंस को लंबे और महंगे वैकल्पिक रूट अपनाने होंगे। Emirates, Etihad और Qatar Airways जैसी प्रमुख खाड़ी एयरलाइंस जो भारत और दुनिया के बीच हवाई यात्रा की रीढ़ हैं वे इस संकट से सबसे अधिक प्रभावित हैं। इन एयरलाइंस का परिचालन आधार ही खाड़ी देशों में है।

West Asia Tension: भारतीय अर्थव्यवस्था और व्यापार पर असर

हवाई किराए में उछाल और उड़ानों में व्यवधान का असर केवल यात्रियों पर नहीं बल्कि भारतीय व्यापार पर भी पड़ेगा। बहुत सी व्यावसायिक बैठकें, निर्यात-आयात गतिविधियां और कारोबारी यात्राएं प्रभावित होंगी। खाड़ी देशों के साथ भारत का व्यापार और प्रेषण यानी रेमिटेंस दोनों प्रभावित हो सकते हैं। इस संकट के दीर्घकालिक समाधान के लिए कूटनीतिक प्रयास जरूरी हैं और दुनिया के सभी देश स्थिति पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं।

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