ब्रज में होली का महाउत्सव शुरू, 40 दिनों तक गूंजेगी राधे-राधे की धुन, लड्डू मार से हुरंगा तक देखें पूरा शेड्यूल
24 फरवरी से शुरू लड्डू मार होली, लट्ठमार, फूलों की होली, छड़ी मार, हुरंगा तक; बसंत पंचमी से रंग पंचमी तक राधे-राधे की गूंज
Vrindavan ki Holi 2026: होली का नाम सुनते ही मन में रंगों की फुहार, गुलाल की खुशबू और ढोल-मंजीरों की थाप गूंजने लगती है। लेकिन अगर आप सच में होली का असली रंग देखना चाहते हैं तो आपको एक बार ब्रज की धरती पर जरूर आना चाहिए। जहां पूरे देश में होली सिर्फ दो दिन का त्योहार है, वहीं भगवान श्रीकृष्ण की लीलाभूमि मथुरा, वृंदावन, बरसाना और नंदगांव में यह रंगोत्सव पूरे 40 दिनों तक चलता है। बसंत पंचमी से शुरू होकर रंग पंचमी तक ब्रज की गलियां भक्ति, प्रेम और उल्लास के रंगों में डूबी रहती हैं। इस साल 23 जनवरी को बसंत पंचमी के साथ ही मंदिरों में होली का डंडा रोपण हो चुका है और बांके बिहारी मंदिर में लाडली जी को गुलाल अर्पित किया जा चुका है। अब 24 फरवरी से ब्रज की होली अपने चरम पर पहुंचने वाली है। आइए जानते हैं कि इस बार ब्रज में कब, कहां और कौन सी होली खेली जाएगी।
24-25 फरवरी को नंदगांव और बरसाना में लड्डू मार होली
ब्रज होली (Vrindavan ki Holi 2026) के औपचारिक उत्सव की शुरुआत 24 फरवरी 2026 को नंदगांव से होगी। इस दिन नंदगांव में फाग आमंत्रण महोत्सव का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बरसाना को होली खेलने का निमंत्रण दिया जाता है। श्री राधा रानी मंदिर में इस दिन लड्डू मार होली खेली जाती है, जहां भक्तजन एक-दूसरे पर लड्डू बरसाते हैं और इन लड्डुओं को प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। यह दृश्य अपने आप में अनोखा होता है। इसके अगले दिन 25 फरवरी 2026 को बरसाना के श्रीजी मंदिर में लड्डू मार होली का भव्य आयोजन होता है। नंदगांव से आए निमंत्रण की स्वीकृति के बाद बरसाना में खुशी का माहौल होता है और मंदिर परिसर में लड्डुओं की बारिश होती है। इसी के साथ पूरे ब्रज में होली का उत्साह अपने चरम पर पहुंचने लगता है।
26-27 फरवरी को बरसाना और नंदगांव में विश्व प्रसिद्ध लट्ठमार होली
ब्रज की सबसे प्रसिद्ध और दुनियाभर में चर्चित लट्ठमार होली 26 फरवरी 2026 (Vrindavan ki Holi 2026) को बरसाना में खेली जाएगी। इस दिन नंदगांव के हुरियारे पारंपरिक वेशभूषा धारण करके बरसाना पहुंचते हैं और राधारानी की सखियों के रूप में बरसाना की महिलाएं उन पर प्रतीकात्मक रूप से लाठियां बरसाती हैं। पुरुष चमड़े या लकड़ी की मजबूत ढालों से अपना बचाव करते हैं। यह परंपरा द्वापर युग से चली आ रही है जब भगवान श्रीकृष्ण अपने सखाओं के साथ नंदगांव से बरसाना जाकर राधा और गोपियों को सताते थे और गोपियां उन्हें लाठी लेकर खदेड़ती थीं। ढोल, मंजीरे और फाग गीतों की धुन के बीच बरसाना की रंगीली गली में यह नजारा देखने के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। अगले दिन 27 फरवरी 2026 को नंदगांव के नंद भवन में लट्ठमार होली खेली जाएगी, जहां यही परंपरा दोहराई जाती है और पूरा नंदगांव रंग, गुलाल और रसिया गायन में डूब जाता है।
28 फरवरी को वृंदावन में फूलों
28 फरवरी 2026 को वृंदावन में दो अनूठी होलियां एक साथ मनाई जाएंगी। पहली है बांके बिहारी मंदिर में रंगभरी एकादशी के अवसर पर फूलों की होली, (Vrindavan ki Holi 2026) जिसमें मंदिर परिसर में हजारों किलो फूलों की बारिश होती है। गुलाब, गेंदा और अन्य सुगंधित फूलों से पूरा मंदिर सुगंध से भर जाता है और भक्तगण भगवान के साथ फूलों की होली का आनंद लेते हैं। इसी दिन वृंदावन में विधवाओं की होली भी खेली जाती है जो सामाजिक समरसता और बदलाव का प्रतीक मानी जाती है। एक समय जिन विधवा महिलाओं को त्योहारों से दूर रखा जाता था, आज वे रंगों में सराबोर होकर होली खेलती हैं। यह दृश्य आंखों को नम और दिल को खुश कर देता है।
Vrindavan ki Holi 2026: 1-2 मार्च को गोकुल में छड़ी मार होली
1 मार्च 2026 को गोकुल में छड़ी मार होली का विशेष आयोजन होगा। यह बरसाना की लट्ठमार होली से थोड़ी अलग है क्योंकि यहां भारी लाठियों की बजाय हल्की छड़ियों का प्रयोग होता है। मान्यता है कि बाल गोपाल गोकुल में गोपियों को खूब सताते थे, इसलिए गोपियां छड़ी लेकर उनके पीछे दौड़ती थीं। यह होली भगवान कृष्ण के बचपन की मधुर स्मृतियों को ताजा करती है। इसके बाद 2 मार्च 2026 को गोकुल के रमण रेती क्षेत्र में भव्य होली उत्सव मनाया जाएगा, जहां श्रद्धालु और साधु-संत मिलकर भजन-कीर्तन के साथ रंगों और फूलों की होली खेलते हैं। यह आयोजन आध्यात्मिक शांति और उल्लास का अद्भुत संगम होता है।
3 मार्च को होलिका दहन और 4 मार्च को धुलंडी का पर्व
वैदिक पंचांग के अनुसार इस वर्ष होलिका दहन 3 मार्च 2026 को किया जाएगा। होलिका दहन का शुभ मुहूर्त शाम 6 बजकर 22 मिनट से रात 8 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। मथुरा के द्वारकाधीश मंदिर और वृंदावन के प्रमुख मंदिरों में इस दिन भव्य होलिका दहन का आयोजन होता है। हजारों श्रद्धालु होलिका की परिक्रमा करते हैं और बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न मनाते हैं। अगले दिन 4 मार्च 2026 को रंगवाली होली यानी धुलंडी का पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। इस दिन मथुरा, वृंदावन, बरसाना, नंदगांव और गोकुल सहित पूरा ब्रज क्षेत्र अबीर-गुलाल और रंगों से सराबोर हो जाता है। हर गली, हर चौराहे पर राधे-राधे की गूंज और ठंडाई का दौर चलता है।
Vrindavan ki Holi 2026: हुरंगा होली के साथ भव्य समापन
ब्रज की 40 दिवसीय होली का भव्य समापन 5 मार्च 2026 को बलदेव स्थित दाऊजी मंदिर में हुरंगा होली के साथ होगा। यह ब्रज की सबसे अनोखी और रोमांचक होलियों में से एक है। इस दिन महिलाएं पुरुषों के कपड़े फाड़कर उन पर कपड़े के कोड़े बरसाती हैं। यह परंपरा भगवान बलराम द्वारा गोपियों के साथ होली खेलने की स्मृति में मनाई जाती है। रंगों के बीच मस्ती और हंसी का यह अनोखा दृश्य देखने लायक होता है। हुरंगा के साथ ही ब्रज में होली के रंगोत्सव का औपचारिक समापन हो जाता है। ब्रज की होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह राधा-कृष्ण के शाश्वत प्रेम, भक्ति और सामाजिक समरसता का जीवंत उत्सव है, जहां अमीर-गरीब और ऊंच-नीच का भेद मिटकर सब एक ही रंग में रंग जाते हैं।
Read More Here
- मोहम्मद यूनुस ने दिया इस्तीफा, तारिक रहमान के शपथ ग्रहण से एक दिन पहले छोड़ा पद, विदाई भाषण में कहा- बांग्लादेश अब दबाव वाला देश नहीं
- सुनेत्रा पवार 26 फरवरी को बनेंगी NCP की राष्ट्रीय अध्यक्ष, पार्टी की बैठक में सभी ने दी सहमति, प्रफुल्ल पटेल ने पहले ही दिया था संकेत
- उत्तर भारत में कोहरे का असर जारी, दक्षिण में गर्मी बढ़ी, जानें अपने शहर का पूरा हाल और तापमान
- मंगलवार को इन राशियों की बदलेगी किस्मत, जानें मेष से मीन तक सभी का हाल, धन-करियर-प्रेम में क्या होगा खास