संसद में महिला आरक्षण और परिसीमन पर आज वोटिंग, डिंपल यादव बोलीं- ‘महिला आरक्षण मुखौटा है’, शशि थरूर ने कहा- ‘कांटेदार तार में लपेट दिया तोहफा

संसद विशेष सत्र: महिला आरक्षण और परिसीमन पर आज वोटिंग, डिंपल यादव-शशि थरूर का तीखा हमला, विपक्ष का सरकार पर आरोप, 2023 कानून लागू होने के बावजूद नया संशोधन और दक्षिण भारत की चिंता

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Parliament Session: संसद का विशेष सत्र आज भी जारी है और महिला आरक्षण तथा परिसीमन से जुड़े तीन महत्वपूर्ण बिलों पर वोटिंग का इंतजार है। लोकसभा में दोपहर तक चल रही चर्चा में विपक्षी दलों ने सरकार पर तीखे हमले किए। समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने महिला आरक्षण को एक ‘मुखौटा’ बताया, जबकि कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इसे ‘कांटेदार तार में लपेटकर दिया गया नारी शक्ति का तोहफा’ करार दिया।

आज की संसद कार्यवाही: वोटिंग से पहले विपक्ष का तीखा हमला

शुक्रवार 17 अप्रैल 2026 को संसद में महिला आरक्षण और परिसीमन पर चर्चा तेज हो गई। डिंपल यादव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह बिल महिला आरक्षण का मुखौटा है, जिसके जरिए सरकार परिसीमन कर अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करना चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन करना चाहती है, जबकि 2023 में सभी दलों ने बिना परिसीमन के आरक्षण का समर्थन किया था। डिंपल ने सवाल उठाया कि महिलाओं को आरक्षण देने में इतनी देरी क्यों हो रही है।

Parliament Session: प्रधानमंत्री मोदी का संदेश और सरकार का पक्ष

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में सभी दलों से अपील की कि महिला आरक्षण बिल को सर्वसम्मति से पास करें। उन्होंने कहा कि इस विषय को राजनीति के तराजू पर नहीं तौलना चाहिए और वह इसका क्रेडिट विपक्ष को देने को तैयार हैं। सरकार का कहना है कि तीन बिल—संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026, परिसीमन विधेयक 2026 और संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक 2026—पास होने के बाद महिला आरक्षण प्रभावी होगा और परिसीमन पारदर्शी तरीके से होगा।

Parliament Session: 2023 का कानून लागू, फिर क्यों नया संशोधन?

महिला आरक्षण अधिनियम 2023 गुरुवार 16 अप्रैल 2026 से लागू हो गया है। इसके बावजूद सरकार नए संशोधन बिल लाई है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार जानबूझकर परिसीमन से जोड़कर इसे लटका रही है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इसे ‘डिलिमिटेशन पॉलिटिकल डिमॉनिटाइजेशन’ करार दिया। विपक्ष का कहना है कि मौजूदा 543 सीटों पर ही आरक्षण तुरंत लागू किया जा सकता है, जबकि सरकार का तर्क है कि जनगणना और परिसीमन के बाद ही सही बंटवारा संभव होगा।

दक्षिण भारत और छोटे राज्यों की चिंता: परिसीमन से क्या प्रभाव

परिसीमन से सबसे ज्यादा चिंता दक्षिण भारत के राज्यों—तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक—में है। शशि थरूर और डीएमके सांसद कनिमोझी ने इसी मुद्दे पर जोर दिया। उनका तर्क है कि जिन राज्यों ने आबादी नियंत्रित कर आर्थिक मजबूती हासिल की, उन्हें सीटों के नुकसान के रूप में सजा मिलेगी। कनिमोझी ने सरकार पर महिलाओं को ‘ह्यूमन शील्ड’ की तरह इस्तेमाल करने का आरोप लगाया और रात 10 बजे बिल नोटिफाई करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए।

Parliament Session: संसद विशेष सत्र का उद्देश्य और आगे क्या

सरकार ने तीन दिन का विशेष सत्र इसलिए बुलाया है ताकि तीनों संशोधनों को पास कराया जा सके। इनको पास करने के लिए दो-तिहाई बहुमत जरूरी है। आज शाम 4 बजे वोटिंग होने की संभावना है। विपक्षी दलों के INDIA ब्लॉक ने अपने सभी सांसदों की सदन में मौजूदगी सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी है। झारखंड, बंगाल और अन्य राज्यों के विपक्षी नेता भी इस बात पर नजर रखे हुए हैं कि इससे ओबीसी और पिछड़े वर्गों की हिस्सेदारी पर क्या असर पड़ेगा।

Parliament Session: महिला आरक्षण का इतिहास और वर्तमान स्थिति

महिला आरक्षण की मांग लंबे समय से चल रही है। 2023 में कानून पास हुआ लेकिन लागू होने में देरी हुई। अब 2026 में नए संशोधन के साथ परिसीमन को जोड़ा गया है। यदि बिल पास हो जाता है, तो 2029 के बाद लोकसभा में एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो जाएंगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आज का फैसला आने वाले चुनावों और देश के संघीय ढांचे के राजनीतिक भविष्य को प्रभावित करेगा।

निष्कर्ष: महिलाओं की उम्मीदें और संसद की जिम्मेदारी

देश की महिलाएं लंबे समय से आरक्षण का इंतजार कर रही हैं। यह बहस सिर्फ आरक्षण की नहीं बल्कि देश के संघीय ढांचे और उत्तर-दक्षिण संतुलन की भी है। शाम 4 बजे की वोटिंग के बाद साफ हो जाएगा कि ये बिल पास होते हैं या विपक्ष की मांग पर सरकार को कोई अन्य रास्ता चुनना पड़ता है। देश की नजरें आज पूरी तरह संसद पर टिकी हुई हैं।

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