Vladimir Putin India Visit: दिल्ली पहुंचे पुतिन, PM मोदी से आज अहम मुलाकात

BRICS Summit से पहले व्यापार, ऊर्जा, रक्षा और परमाणु सहयोग पर दोनों नेताओं की नजर

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Vladimir Putin India Visit: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ता के लिए शुक्रवार सुबह राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली पहुंच गए हैं। नई दिल्ली के पालम वायुसेना हवाई अड्डे पर उनका औपचारिक स्वागत विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह द्वारा किया गया। पुतिन का यह तीन दिवसीय भारत दौरा ऐसे ऐतिहासिक मोड़ पर हो रहा है जब भारत वैश्विक महाशक्तियों के बीच कूटनीतिक संतुलन साधते हुए 18वें ब्रिक्स सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहा है।
वैश्विक प्रतिबंधों, अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच पुतिन की इस यात्रा पर वाशिंगटन से लेकर बीजिंग तक सभी वैश्विक ताकतों की नजरें टिकी हुई हैं। आज हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच होने वाली आमने-सामने की बैठक में द्विपक्षीय व्यापार असंतुलन, राष्ट्रीय मुद्राओं में भुगतान, असैन्य परमाणु सहयोग, रक्षा विनिर्माण और ऊर्जा सुरक्षा जैसे अहम रणनीतिक मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा।

Vladimir Putin India Visit: हवाई अड्डे पर भव्य स्वागत और चाणक्यपुरी में कड़ा सुरक्षा पहरा

पालम एयरबेस पर उतरने के बाद रूसी राष्ट्रपति के काफिले को कड़ी सुरक्षा के बीच उनके निर्धारित होटल पहुंचाया गया। विदेशी राष्ट्राध्यक्षों के आगमन को देखते हुए लुटियंस दिल्ली, चाणक्यपुरी और भारत मंडपम के आसपास बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था तैनात की गई है। दिल्ली पुलिस के साथ केंद्रीय अर्धसैनिक बलों और विशेष कमांडो दस्तों ने संवेदनशील मार्गों की निगरानी संभाल ली है।
सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा तथा ब्राजील, मिस्र, इथियोपिया और संयुक्त अरब अमीरात के शीर्ष प्रतिनिधिमंडल भी दिल्ली पहुंच रहे हैं। पुतिन के इस दौरे से यह स्पष्ट संदेश गया है कि पश्चिमी दबावों और प्रतिबंधों के बावजूद भारत और रूस के बीच ‘विशेष व विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी’ अटूट बनी हुई है।

मोदी-पुतिन वार्ता: व्यापार असंतुलन को पाटना और स्थानीय मुद्रा में भुगतान

आज होने वाली मोदी-पुतिन शिखर वार्ता के आर्थिक एजेंडे में सबसे बड़ा मुद्दा दोनों देशों के बीच बढ़ा व्यापार घाटा है। भारत द्वारा रूसी रियायती कच्चे तेल और उर्वरकों की भारी खरीद के चलते द्विपक्षीय व्यापार 65 अरब डॉलर के पार चला गया है, लेकिन इसका संतुलन पूरी तरह रूस के पक्ष में झुका हुआ है।
प्रधानमंत्री मोदी रूसी बाजार में भारतीय फार्मास्यूटिकल्स, कृषि उत्पादों, ऑटोमोबाइल पार्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और इंजीनियरिंग सामानों की सीधी पहुंच बढ़ाने पर जोर देंगे। इसके साथ ही डॉलर-आधारित प्रतिबंधों के प्रभाव को निष्प्रभावी करने के लिए रुपया-रूबल व्यापार निपटान प्रणाली को और अधिक सरल व सुरक्षित बनाने, भारत के यूपीआई नेटवर्क और रूस के वित्तीय संदेश तंत्र के आपसी समन्वय पर भी चर्चा अंतिम चरण में है।

ऊर्जा सुरक्षा और परमाणु ऊर्जा संयंत्रों का विस्तार

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड के $100 प्रति बैरल से ऊपर चले जाने के बाद भारत के लिए दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सबसे संवेदनशील विषय बन चुका है। बैठक में दोनों नेता रियायती दरों पर कच्चे तेल की निर्बाध आपूर्ति के नए दीर्घकालिक करारों पर हस्ताक्षर कर सकते हैं।
इसके साथ ही असैन्य परमाणु ऊर्जा सहयोग के तहत तमिलनाडु में कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र की प्रगति की समीक्षा की जाएगी। इसके अलावा भारत में एक नए स्थल पर 1200 मेगावाट क्षमता वाले छह नए रूसी डिजाइन के वीवीईआर (VVER) रिएक्टरों के निर्माण और स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (SMR) तकनीक के संयुक्त विकास पर द्विपक्षीय सहमति बनने के ठोस संकेत हैं।

रक्षा विनिर्माण और मेक इन इंडिया: पुर्जों के स्थानीय उत्पादन पर जोर

भारत और रूस के पारंपरिक रक्षा संबंध अब सीधे हथियारों की खरीद से आगे बढ़कर संयुक्त अनुसंधान और भारत में उत्पादन की दिशा में बढ़ रहे हैं। बैठक में भारतीय सेनाओं द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे रूसी मूल के सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमानों, टी-90 भीष्म टैंकों और नौसैनिक युद्धपोतों के स्पेयर पार्ट्स का भारत में ही स्थानीय विनिर्माण सुनिश्चित करने पर सहमति बनेगी।
इसके अतिरिक्त अमेठी स्थित आयुध कारखाने में भारत-रूस संयुक्त उपक्रम के तहत एके-203 असाल्ट राइफलों के पूर्ण स्वदेशी निर्माण की रफ्तार बढ़ाने और भविष्य की वायु रक्षा जरूरतों के लिए पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान सुखोई-57 (Su-57) की तकनीकी साझेदारी के प्रस्तावों की समीक्षा भी वार्ता का हिस्सा होगी।

रूस-यूक्रेन संघर्ष और शांति कूटनीति पर भारत का रुख

द्विपक्षीय वार्ता के दौरान यूक्रेन संकट का शांतिपूर्ण कूटनीतिक समाधान शीर्ष अंतरराष्ट्रीय एजेंडे में शामिल रहेगा। भारत ने हमेशा इस बात पर बल दिया है कि किसी भी विवाद का स्थायी समाधान युद्ध के मैदान से नहीं, बल्कि बातचीत और कूटनीति के जरिए ही संभव है।
प्रधानमंत्री मोदी पूर्व में स्पष्ट कर चुके हैं कि आज का युग युद्ध का नहीं है। हाल के महीनों में भारत द्वारा मॉस्को, कीव और पश्चिमी राजधानियों के बीच निष्पक्ष वार्ताकार की भूमिका निभाए जाने के बाद दोनों नेता युद्धविराम की व्यावहारिक संभावनाओं, मानवीय सहायता और ब्लैक सी अनाज गलियारे जैसे विषयों पर रणनीतिक दृष्टिकोण साझा करेंगे।

विस्तारित ब्रिक्स में कूटनीतिक संतुलन और पश्चिमी दुनिया की नजर

12 और 13 सितंबर को होने वाले 18वें ब्रिक्स सम्मेलन में ईरान और संयुक्त अरब अमीरात जैसे नए सदस्यों के साथ-साथ चीन और रूस की मौजूदगी पश्चिमी देशों के लिए भू-राजनीतिक चिंता का विषय बनी हुई है। वाशिंगटन और यूरोपीय देश इस बात पर बारीक नजर रख रहे हैं कि ब्रिक्स का मंच कहीं पश्चिमी-विरोधी रुख न अपनाए।
भारत की अध्यक्षता इस दृष्टि से निर्णायक है क्योंकि नई दिल्ली ब्रिक्स को ‘गैर-पश्चिमी’ (Non-Western) मंच के रूप में देखती है, न कि ‘पश्चिम-विरोधी’ (Anti-Western)। प्रधानमंत्री मोदी का प्रयास रहेगा कि समूह की ऊर्जा बहुपक्षीय वित्तीय संस्थाओं (आईएमएफ, विश्व बैंक) में सुधार, ग्लोबल साउथ के देशों के विकास, तकनीकी हस्तांतरण और नियम-आधारित बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के निर्माण पर केंद्रित रहे।

Vladimir Putin India Visit: निष्कर्ष

राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का नई दिल्ली आगमन भारत की रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) की सबसे बड़ी जीत माना जा रहा है। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ होने वाली बैठक न केवल ऊर्जा और रक्षा साझेदारी को नए मुकाम पर ले जाएगी, बल्कि आगामी दो दिनों के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के आर्थिक और राजनीतिक घोषणापत्र की रूपरेखा भी तय करेगी। दुनिया यह देखने को उत्सुक है कि नई दिल्ली का यह मंच युद्ध, प्रतिबंधों और ध्रुवीकरण के मौजूदा दौर में वैश्विक स्थिरता को क्या नया रास्ता दिखाता है।

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