Uttarakhand Raksha Bandhan: उत्तराखंड में रक्षाबंधन पर महिलाओं को बड़ा तोहफा, 28-29 अगस्त को रोडवेज बसों में मुफ्त यात्रा
उत्तराखंड में 28 और 29 अगस्त को महिलाओं को रोडवेज बसों में 100% किराया माफ
Uttarakhand Raksha Bandhan: रक्षाबंधन के पावन पर्व के अवसर पर उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने प्रदेश की महिलाओं को एक बड़ा और विशेष तोहफा दिया है। राज्य सरकार की नई घोषणा के अनुसार, 28 और 29 अगस्त 2026 को महिलाएं उत्तराखंड परिवहन निगम (रोडवेज) की बसों में संपूर्ण राज्य के भीतर पूर्णतः निशुल्क यात्रा कर सकेंगी। दो दिनों की इस अवधि में महिला यात्रियों से किसी भी श्रेणी की बसों में कोई किराया नहीं वसूला जाएगा। शासन ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिए हैं और उत्तराखंड परिवहन निगम को सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय रहते सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। यह सुविधा केवल उत्तराखंड की भौगोलिक सीमा के भीतर संचालित होने वाली बसों पर लागू होगी।
रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के पवित्र स्नेह और विश्वास का प्रतीक है। इस विशेष दिन पर प्रदेश भर से बड़ी संख्या में महिलाएं अपने भाइयों को राखी बांधने मायके या दूर-दराज के रिश्तेदारों के घर जाती हैं। उत्तराखंड की विषम भौगोलिक परिस्थितियों और पहाड़ी मार्गों के कारण कई क्षेत्रों में दूरी काफी अधिक होती है, जिससे महिलाओं के लिए एक ही दिन में जाकर लौटना संभव नहीं हो पाता। इसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने दो दिनों की छूट देने का संवेदनशील निर्णय लिया है, जिससे महिलाओं को बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी। शासन की अतिरिक्त सचिव रीना जोशी द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि महिलाओं को किराए में 100 प्रतिशत की छूट मिलेगी और इस व्यवस्था से परिवहन निगम पर आने वाले पूरे अतिरिक्त खर्च की भरपाई राज्य सरकार द्वारा की जाएगी।
Uttarakhand Raksha Bandhan: दो दिनों तक सभी श्रेणियों की रोडवेज बसों में निशुल्क सफर की सुविधा
उत्तराखंड परिवहन निगम द्वारा संचालित की जाने वाली सभी बसों में 28 और 29 अगस्त 2026 को महिला यात्री बिना कोई किराया दिए सुलभ सफर कर सकेंगी। यह छूट केवल साधारण और सीएनजी बसों तक सीमित नहीं होगी, बल्कि वोल्वो (Volvo) और एसी (AC) श्रेणी की आधुनिक और प्रीमियम बसों में भी लागू रहेगी। हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि यात्रा की शुरुआत और समाप्ति उत्तराखंड की राज्य सीमा के भीतर ही होनी चाहिए। यदि कोई महिला यात्री उत्तराखंड से बाहर किसी अन्य राज्य की सीमा में प्रवेश करती है, तो राज्य की सीमा पार करते ही सामान्य किराया लागू हो जाएगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पर्व के दौरान किसी भी महिला को आर्थिक तंगी के कारण अपने परिवार से दूर न रहना पड़े। राज्य के मैदानी और पहाड़ी क्षेत्रों जैसे देहरादून, हल्द्वानी, हरिद्वार, नैनीताल, ऋषिकेश, अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ के बीच प्रतिदिन हजारों महिलाएं सफर करती हैं। दो दिनों का समय मिलने से दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों में रहने वाली महिलाओं को आने और जाने के लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा, जिससे उन्हें हड़बड़ी में यात्रा करने की आवश्यकता नहीं होगी।
परिवहन निगम के वित्तीय बोझ की भरपाई करेगी राज्य सरकार
रक्षाबंधन पर दो दिनों की मुफ्त बस यात्रा की सुविधा देने से उत्तराखंड परिवहन निगम पर करोड़ों रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा। इस वित्तीय नुकसान की चिंता दूर करते हुए शासन ने आदेश में साफ लिखा है कि रोडवेज निगम को होने वाले शत-प्रतिशत राजस्व घाटे की प्रतिपूर्ति राज्य सरकार के खजाने से की जाएगी। इस कदम से परिवहन निगम की दैनिक व्यवस्थाओं पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा और उसकी नियमित सेवाएं सुचारू रूप से चलती रहेंगी।
निगम के शीर्ष अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं कि वे प्रदेश के सभी बस डिपो, बस स्टेशनों और कार्यरत कर्मचारियों को इस योजना की पूरी प्रक्रिया से अवगत कराएं। परिवहन निगम के जनरल मैनेजर (संचालन) ने बताया कि 28 और 29 अगस्त को किसी भी महिला से टिकट किराया नहीं लिया जाएगा। इसके लिए बस कंडक्टरों और चेकिंग स्टाफ को विशेष दिशा-निर्देश जारी किए जा रहे हैं। महिलाओं को यात्रा के दौरान अपनी पहचान साबित करने के लिए कोई विशेष कागजात या अतिरिक्त दस्तावेज दिखाने की जरूरत नहीं होगी, हालांकि बस की टिकट प्रणाली के तहत उन्हें शून्य रुपये का विशेष पास/टिकट जारी किया जा सकता है।
पहाड़ी राज्य में महिलाओं की सुगम यात्रा का बढ़ा महत्व
उत्तराखंड जैसे कठिन भौगोलिक बनावट वाले पहाड़ी राज्य में सार्वजनिक परिवहन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। दूरस्थ गांवों में निजी वाहनों का किराया काफी महंगा होता है, जिससे निम्न और मध्यम वर्ग के परिवारों पर आर्थिक दबाव बनता है। ऐसे में रोडवेज बसों में मुफ्त सफर की सुविधा मिलने से कामकाजी महिलाओं, छात्राओं और गृहिणियों को बहुत बड़ा संबल मिलेगा। कई महिलाएं जो रोजगार या उच्च शिक्षा के सिलसिले में देहरादून या मैदानी शहरों में रहती हैं, वे अब बिना किसी वित्तीय चिंता के अपने गांव जाकर त्यौहार मना सकेंगी।
यह पहली बार है जब उत्तराखंड सरकार ने रक्षाबंधन पर एक के बजाय पूरे दो दिनों के लिए महिलाओं को रोडवेज में मुफ्त यात्रा का लाभ दिया है। पूर्व के वर्षों में अक्सर केवल एक दिन (त्यौहार वाले दिन) ही यह छूट दी जाती थी। सरकार के इस दूरगामी फैसले का प्रदेश भर के महिला संगठनों और आम नागरिकों ने स्वागत किया है। इस घोषणा के बाद से ही महिलाएं त्यौहार पर अपने घर जाने और भाइयों को सरप्राइज देने की योजनाएं बनाने लगी हैं।
सुचारू संचालन के लिए बस स्टेशनों पर की जा रही हैं विशेष तैयारियां
त्यौहार के दिनों में रोडवेज बसों और बस अड्डों पर अप्रत्याशित भीड़ जुटने की पूरी संभावना है। इसे देखते हुए परिवहन विभाग ने अभी से तैयारियां तेज कर दी हैं। राज्य के प्रमुख बस स्टेशनों—जैसे देहरादून आईएसबीटी, हल्द्वानी बस टर्मिनल, हरिद्वार और ऋषिकेश—पर सूचना बोर्ड और हेल्पडेस्क स्थापित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही अतिरिक्त बसों को भी बैकअप के रूप में तैयार रखा जा रहा है ताकि भीड़ बढ़ने पर अतिरिक्त फेरे (Trips) लगाए जा सकें।
परिवहन निगम के अधिकारियों ने महिला यात्रियों को सलाह दी है कि वे अपनी यात्रा की योजना पहले से तय कर लें और अंतिम समय की भीड़भाड़ से बचने के लिए समय से थोड़ा पहले बस स्टेशन पहुंचें। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह मुफ्त यात्रा की सुविधा केवल महिला यात्रियों के लिए है। उनके साथ यात्रा कर रहे पुरुष सह-यात्रियों को नियमानुसार सामान्य किराया देना अनिवार्य होगा। इसके अलावा अंतरराज्यीय (Interstate) मार्गों पर राज्य की सीमा से बाहर का किराया देय होगा।
Uttarakhand Raksha Bandhan: प्रदेश भर की महिलाओं में खुशी की लहर और सीएम का जताया आभार
उत्तराखंड सरकार के इस जनहितैषी निर्णय से कुमाऊं और गढ़वाल दोनों मंडलों की महिलाओं में अपार उत्साह देखने को मिल रहा है। देहरादून, हरिद्वार, उधमसिंह नगर, नैनीताल, पौड़ी, अल्मोड़ा और चमोली जिलों से महिलाओं की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं, जिनमें उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार व्यक्त किया है। महिलाओं का कहना है कि दो दिनों की छूट मिलने से अब वे निश्चिंत होकर त्यौहार के एक दिन पहले जाकर त्यौहार के अगले दिन आराम से वापस लौट सकती हैं।
सामाजिक क्षेत्र में काम करने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे फैसले राज्य में महिलाओं के सम्मान और उनकी गतिशीलता को बढ़ावा देते हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संदेश में कहा है कि राज्य की माताओं और बहनों की सेवा और उनकी सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। रक्षाबंधन पर दिया गया यह उपहार बहनों के प्रति शासन के आदर और स्नेह का प्रतीक है।
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