US Iran War: अमेरिका-ईरान में सीधा युद्ध, IRGC ठिकानों पर हमले के बाद तेहरान का पलटवार
अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने एरबिल स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने को बनाया निशाना
US Iran War: पश्चिम एशिया (मध्य पूर्व) में लंबे समय से सुलग रहा भू-राजनीतिक तनाव अब एक प्रत्यक्ष और विनाशकारी सैन्य टकराव में बदल गया है। अमेरिकी सेना ने मंगलवार को ईरान की संप्रभु सीमा के भीतर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कई प्रमुख रणनीतिक ठिकानों पर व्यापक हवाई हमले किए हैं। इस अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के तत्काल जवाब में ईरान ने उत्तरी इराक के स्वायत्त कुर्द क्षेत्र स्थित एरबिल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के निकट बने अमेरिकी सैन्य अड्डे को बैलिस्टिक मिसाइलों और सुसाइड ड्रोनों के बड़े झुंड से निशाना बनाया है।
दोनों देशों के बीच सीधे सैन्य हमलों के इस नए दौर ने विश्व के सबसे संवेदनशील तेल परिवहन गलियारे ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) और समूचे खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा पर गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। इस समय मध्य पूर्व के विभिन्न देशों में पचास हजार से अधिक अमेरिकी सैनिक तैनात हैं, जिसके चलते इस संघर्ष के एक पूर्ण क्षेत्रीय युद्ध में बदलने की आशंका चरम पर पहुंच गई है।
US Iran War: एयर डिफेंस और रडार नेटवर्क किए गए तबाह
अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने एक आधिकारिक बयान जारी कर पुष्टि की है कि उसके युद्धक विमानों ने ईरान के अंदर आईआरजीसी के कई संवेदनशील सैन्य ढांचों पर सटीक निशाने साधे हैं। पेंटागन के अनुसार, इन हमलों का प्राथमिक लक्ष्य ईरानी वायु रक्षा प्रणालियां (Air Defense Systems), रडार नेटवर्क्स, मिसाइल व रॉकेट भंडारण सुविधाएं, नौसैनिक संपत्तियां, माइन-बिछाने वाली क्षमताएं और केंद्रीय संचार केंद्र थे।
अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई हाल के दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को बाधित करने और अमेरिकी सैनिकों पर आईआरजीसी द्वारा किए गए बार-बार के हमलों के जवाब में आत्मरक्षा के तहत की गई है। अमेरिका का आरोप है कि तेहरान अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का खुला उल्लंघन कर वैश्विक व्यापारिक नौवहन को पंगु बनाने का प्रयास कर रहा था, जिसे रोकने के लिए यह दंडात्मक कार्रवाई अनिवार्य हो गई थी।
ईरान का पलटवार: एरबिल बेस पर मिसाइल और ड्रोन से भीषण प्रहार
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने जवाबी कार्रवाई की जिम्मेदारी लेते हुए दावा किया है कि उसने उत्तरी इराक के एरबिल प्रांत में स्थित अमेरिकी हवाई अड्डे और सैन्य ठिकाने पर समन्वित मिसाइल और ड्रोन हमला किया है। आईआरजीसी ने अपने बयान में कहा कि यह कार्रवाई दक्षिणी ईरानी तटीय शहर सिरिक में एक शादी समारोह पर हुए अमेरिकी हमले के प्रतिशोध में की गई है, जिसमें एक निर्दोष बच्चे सहित चार आम नागरिकों की मौत हो गई थी।
ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, एरबिल बेस पर किए गए सटीक हमलों में अमेरिकी सेना का एक बड़ा रिपेयर सेंटर, संवेदनशील तकनीकी उपकरणों के गोदाम और एक उन्नत निगरानी गुब्बारे (Aerostat Surveillance Balloon) का कंट्रोल सिस्टम पूरी तरह नष्ट हो गया है। ईरान ने यह भी दावा किया है कि बेस के ईंधन टैंकों में भीषण आग लगी है और कई अमेरिकी सैनिक हताहत हुए हैं, हालांकि अमेरिकी रक्षा विभाग ने अभी तक अपने सैनिकों के हताहत होने के ईरानी दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर अभूतपूर्व संकट: वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति पर खतरा
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सीधे टकराव का सबसे घातक असर होर्मुज जलडमरूमध्य पर पड़ने की आशंका है। यह संकरा समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा की रीढ़ माना जाता है, जहां से होकर दुनिया के कुल पेट्रोलियम उपभोग का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल और भारी मात्रा में एलएनजी (LNG) दैनिक रूप से गुजरती है।
तनाव के चरम पर पहुंचने के बाद बीमा कंपनियों ने इस क्षेत्र से गुजरने वाले वाणिज्यिक तेल टैंकरों का ‘वॉर रिस्क प्रीमियम’ कई गुना बढ़ा दिया है। हालांकि, ईरान ने राजनयिक स्तर पर यह संकेत दिया है कि वह जहाजों की आवाजाही को पूरी तरह बंद करने के बजाय पड़ोसी देश ओमान के साथ मिलकर एक वैकल्पिक सुरक्षा योजना पर विचार कर रहा है। इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में भारी उछाल दर्ज किया गया है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था में महंगाई का नया चक्र शुरू होने का खतरा पैदा हो गया है।
जॉर्डन, यूएई और लराक द्वीप तक फैला टकराव का दायरा
मध्य पूर्व में सैन्य हलचल केवल इराक और ईरान की सीमाओं तक सीमित नहीं रही है, बल्कि यह कई क्षेत्रीय मोर्चों पर फैल चुकी है। इससे पहले अमेरिकी सेना ने फारस की खाड़ी में स्थित रणनीतिक लराक द्वीप पर तैनात ईरानी रॉकेट लॉन्चर्स को हवाई हमलों में नेस्तनाबूद कर दिया था। इसके प्रतिशोध में ईरान ने जॉर्डन में स्थित अमेरिकी ठिकानों की ओर लंबी दूरी की मिसाइलें दागी थीं, जिन्हें अमेरिकी पैट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम ने हवा में ही नष्ट कर दिया था।
इसके अलावा, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की सेना ने भी अपने संप्रभु हवाई क्षेत्र में घुसपैठ करने वाले एक ईरानी ड्रोन को मार गिराने का दावा किया है। इन बहुपक्षीय घटनाओं से साफ है कि क्षेत्र के अन्य अरब देश भी न चाहते हुए इस सैन्य संघर्ष की चपेट में आ रहे हैं, जिससे पूरे मध्य पूर्व का सुरक्षा संतुलन चरमरा गया है।
संयुक्त राष्ट्र की चिंताएं और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में गतिरोध
इस नए सैन्य संकट के बीच अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि वह पूर्व में जून माह के दौरान क्षतिग्रस्त हुए ईरानी परमाणु ठिकानों का भौतिक निरीक्षण करने में अभी तक असमर्थ रही है। परमाणु एजेंसी का मानना है कि यदि सैन्य हमलों का दायरा नतांज या फोर्डो जैसे भूमिगत संवर्धन संयंत्रों तक पहुंचता है, तो इसके गंभीर पर्यावरणीय और सुरक्षा परिणाम हो सकते हैं।
दूसरी ओर, गाजा में हमास के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों की गिरफ्तारी और यमन में इस्लामिक स्टेट तथा हूती विद्रोहियों की गतिविधियों ने सुरक्षा एजेंसियों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। वाशिंगटन ने अपने नागरिकों के लिए समूचे मध्य पूर्व क्षेत्र में तत्काल यात्रा प्रतिबंध और हाई-अलर्ट एडवाइजरी जारी कर दी है।
US Iran War: कूटनीतिक संयम या विनाशकारी महायुद्ध?
तेहरान और वाशिंगटन के बीच वर्तमान गतिरोध इस समय एक बेहद नाजुक मोड़ पर खड़ा है। जहां ईरान अमेरिकी हमलों को अपनी संप्रभुता का खुला उल्लंघन बताते हुए बड़े पैमाने पर जवाबी हमलों की चेतावनी दे रहा है, वहीं अमेरिका ने साफ कर दिया है कि उसके सैनिकों या जहाजों पर होने वाले किसी भी अगले हमले का जवाब और अधिक प्रचंड सैन्य ताकत से दिया जाएगा।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और वैश्विक शक्तियों ने दोनों देशों से तत्काल प्रभाव से सैन्य आक्रामकता रोकने और राजनयिक समाधान तलाशने की अपील की है। आने वाले कुछ घंटे और दिन यह तय करेंगे कि यह संकट कूटनीतिक मध्यस्थता के जरिए थमता है या फिर दुनिया एक और विनाशकारी खाड़ी युद्ध के मुहाने पर धकेल दी जाती है।
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