यूपी के किसानों के लिए खुशखबरी! गन्ने की नई किस्म Co.Sha.23232 की 5 मिनट में बुक हुईं 2 लाख कलिकाएं
यूपी की नई अगेती गन्ना किस्म Co.Sha.23232 बनी किसानों की पसंद, Co.0238 का विकल्प बनने की उम्मीद।
Sugarcane New Variety: उत्तर प्रदेश के लाखों गन्ना किसानों के लिए कृषि अनुसंधान के क्षेत्र से एक बड़ी और उत्साहवर्धक खबर सामने आई है। राज्य में गन्ने की पैदावार बढ़ाने और लाल सड़न (रेड रॉट) रोग की मार झेल रहे किसानों को राहत देने के लिए उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद, शाहजहांपुर द्वारा विकसित नई अगेती किस्म Co.Sha.23232 (को.शा. 23232) तेजी से लोकप्रिय हो रही है। इस नई किस्म के प्रति किसानों के जबरदस्त उत्साह का प्रमाण इसी से मिलता है कि ऑनलाइन पोर्टल पर बुकिंग शुरू होने के मात्र पांच मिनट के भीतर दो लाख गन्ना कलिकाएं पूरी तरह बुक हो गईं। कृषि वैज्ञानिक इस किस्म को प्रदेश में लंबे समय से छाई रही किस्म Co.0238 के सबसे मजबूत और टिकाऊ विकल्प के रूप में देख रहे हैं।
Sugarcane New Variety: महज पांच मिनट में पूरा स्टॉक समाप्त
उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद द्वारा 9 अक्टूबर 2026 को नई किस्म Co.Sha.23232 के सिंगल बड मिनी सीड किट वितरण के लिए आधिकारिक ऑनलाइन बुकिंग पोर्टल खोला गया था। परिषद ने पहले चरण में किसानों के परीक्षण और बीज संवर्धन के उद्देश्य से दो लाख सिंगल बड (एक आंख वाली कलिकाएं) का कोटा तय किया था।
जैसे ही बुकिंग विंडो खुली, प्रदेश भर के हजारों किसानों ने एक साथ आवेदन किया और रिकॉर्ड पांच मिनट में पूरा स्टॉक समाप्त हो गया। सर्वर पर अत्यधिक लोड और सीमित कोटे के कारण बड़ी संख्या में किसान बुकिंग से वंचित भी रह गए। परिषद के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह पहला वितरण चरण था और किसानों की इस अभूतपूर्व मांग को देखते हुए परिषद के सभी क्षेत्रीय केंद्रों पर इसके बीज गुणन कार्यक्रम को तेज कर दिया गया है ताकि आगामी बुवाई सीजन में व्यापक स्तर पर बीज उपलब्ध कराया जा सके।
दस वर्षों के गहन वैज्ञानिक अनुसंधान का परिणाम: उत्तर और दक्षिण का सफल संकरण
किसी भी गन्ने की नई प्रजाति को विकसित करना एक जटिल, धैर्यपूर्ण और बहु-चरणीय वैज्ञानिक प्रक्रिया होती है। गन्ना शोध परिषद, शाहजहांपुर के पादप प्रजनकों और वैज्ञानिकों की टीम ने लगभग एक दशक की कड़ी मेहनत और बहु-स्थानीय परीक्षणों के बाद Co.Sha.23232 को सफलता पूर्वक तैयार किया है।
इस किस्म को तैयार करने के लिए उत्तर भारत की जलवायु के अनुकूल मानी जाने वाली किस्म CoS.8119 और दक्षिण भारत की उच्च उपज व मिठास वाली मजबूत किस्म Co.775 के बीच सफल संकरण कराया गया। वैज्ञानिकों ने कई वर्षों तक अलग-अलग कृषि-जलवायु क्षेत्रों में इसके अंकुरण प्रतिशत, प्रति पौधा कल्लों (टिलर्स) की संख्या, तने की मोटाई, तौल और सबसे महत्वपूर्ण रेड रॉट रोग प्रतिरोधक क्षमता का गहन परीक्षण किया। जब यह किस्म सभी मानकों पर खरी उतरी, तब इसे राज्य स्तर पर विमोचित करने की संस्तुति की गई।
Co.Sha.23232 की प्रमुख विशेषताएं: उच्च उपज और बेहतर चीनी परता
Co.Sha.23232 को एक शीघ्र पकने वाली (अगेती) प्रजाति के रूप में वर्गीकृत किया गया है, जो मिलों और किसानों दोनों के लिए आर्थिक रूप से अत्यधिक लाभकारी है। इस किस्म में जमाव क्षमता सामान्य किस्मों से बेहतर है और इसके गन्नों की लंबाई व मोटाई तेजी से बढ़ती है।
आंकड़ों के अनुसार यह किस्म प्रचलित किस्मों की तुलना में प्रति क्विंटल लगभग 8 से 10 प्रतिशत अधिक ठोस वजन देने की क्षमता रखती है, जिससे प्रति एकड़ कुल टन भार में भारी वृद्धि होती है। वहीं चीनी मिलों के दृष्टिकोण से इसमें चीनी की रिकवरी (परता) का प्रतिशत काफी अधिक है, जिससे किसानों को मिलों से तौल और भुगतान में प्राथमिकता मिलने की संभावना बढ़ जाती है। इसका तना सीधा और ठोस रहता है, जिससे तेज हवा या बारिश में फसल के गिरने की आशंका भी अपेक्षाकृत कम रहती है।
Co.0238 के मजबूत विकल्प के रूप में उभरती नई प्रजाति
विगत एक दशक में उत्तर प्रदेश में Co.0238 किस्म ने रिकॉर्ड उत्पादन देकर चीनी उद्योग की तस्वीर बदल दी थी, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से इस किस्म में लाल सड़न (रेड रॉट) रोग का प्रकोप तेजी से बढ़ा है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ रही थी। किसान काफी समय से एक ऐसी नई अगेती किस्म की तलाश में थे जो 0238 जितनी ही पैदावार दे सके और उसमें फफूंदजनित बीमारियों से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता भी हो।
वैज्ञानिकों के अनुसार Co.Sha.23232 में लाल सड़न रोग के प्रति प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षमता पाई गई है। यह किस्म न केवल रोग के जोखिम को न्यूनतम करती है बल्कि मिट्टी से पोषक तत्वों को बेहतर तरीके से अवशोषित करने की क्षमता भी रखती है। हालांकि, कृषि विशेषज्ञों का यह भी सुझाव है कि किसानों को एकदम से पूरे रकबे में बदलाव करने के बजाय पहले थोड़ी जमीन पर बीज संवर्धन करना चाहिए और स्थानीय मिट्टी व पानी की स्थिति को देखते हुए क्षेत्र विस्तार करना चाहिए।
Sugarcane New Variety: टिश्यू कल्चर और सिंगल बड तकनीक से बड़े पैमाने पर बीज उत्पादन की तैयारी
किसानों के बीच मची होड़ को देखते हुए गन्ना शोध परिषद ने बड़े पैमाने पर बीज उत्पादन का रोडमैप तैयार किया है। परिषद अपने शाहजहांपुर मुख्यालय के साथ-साथ मुजफ्फरनगर, सेवरही, गोला गोकर्णनाथ और अन्य उप-केंद्रों पर आधुनिक टिश्यू कल्चर लैब और सिंगल बड नर्सरी तकनीक का उपयोग कर रही है।
सिंगल बड तकनीक के माध्यम से एक गन्ने के डंठल से पारंपरिक तरीकों की तुलना में चार से पांच गुना अधिक स्वस्थ पौधे तैयार किए जा सकते हैं। इस वैज्ञानिक विधि से तैयार किए गए बीज आनुवंशिक रूप से पूरी तरह शुद्ध और कीट-मुक्त होते हैं। परिषद का लक्ष्य है कि आने वाले शरदकालीन और बसंतकालीन बुवाई चक्रों तक लाखों किसानों तक प्रमाणित बीज सामग्री पहुंचाई जा सके ताकि प्रदेश का चीनी उत्पादन नए कीर्तिमान स्थापित कर सके।
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