मंगलवार पूजा विधि: हनुमान जी के मंत्र, प्रिय भोग और व्रत के नियम जानें

मंगलवार को हनुमान जी की पूजा, मंत्र जाप, प्रिय भोग और व्रत के जरूरी नियम जानें

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Mangalwar Puja Vidhi: सनातन परंपरा में सप्ताह के सातों दिनों का संबंध किसी न किसी विशिष्ट देवी-देवता और नवग्रहों से माना गया है। इनमें मंगलवार का दिन संकटमोचन, चिरंजीवी पवनपुत्र हनुमान जी और पराक्रम के कारक मंगल देव की उपासना के लिए परम फलदायी और श्रेष्ठ माना जाता है। मान्यता है कि मंगलवार के दिन जो साधक पूर्ण निष्ठा, शारीरिक-मानसिक शुद्धि और सही नियमों के साथ बजरंगबली की आराधना करते हैं, उनके जीवन से समस्त प्रकार के भय, संकट, रोग और गृह-क्लेश स्वतः दूर हो जाते हैं। इसके साथ ही, कुंडली में स्थित कमजोर या पीड़ित मंगल जनित दोषों का शमन करने के लिए भी मंगलवार की उपासना एक अचूक आध्यात्मिक उपाय मानी गई है।

Mangalwar Puja Vidhi: प्रातःकालीन शुद्धि, संकल्प और पूजा की आवश्यक तैयारी

मंगलवार के दिन हनुमान जी की पूजा का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए ब्रह्म मुहूर्त में उठने का विशेष विधान है। शौच और नित्यकर्म से निवृत्त होकर गंगाजल युक्त शुद्ध जल से स्नान करें। मंगलवार के दिन लाल, सिंदूरी या गहरे नारंगी रंग के स्वच्छ एवं बिना सिले अथवा धुले वस्त्र धारण करना अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि लाल रंग मंगल और हनुमान जी दोनों को अति प्रिय है। इस दिन काले या गहरे नीले रंग के वस्त्र पहनने से परहेज करना चाहिए।

स्नान के पश्चात घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) या पूजा स्थल को स्वच्छ कर एक लकड़ी की चौकी स्थापित करें। चौकी पर लाल रंग का नया वस्त्र बिछाकर उस पर श्रीराम दरबार अथवा हनुमान जी की ध्यानस्थ या आशीर्वाद मुद्रा वाली प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। इसके बाद हाथ में जल, अक्षत, लाल पुष्प और सुपारी लेकर अपनी मनोकामना का स्मरण करते हुए निष्ठापूर्वक व्रत और पूजा का संकल्प लें।

हनुमान जी की शास्त्रोक्त षोडशोपचार पूजा विधि

संकल्प के उपरांत पूजा स्थल पर गंगाजल छिड़ककर स्थान को पवित्र करें। सबसे पहले भगवान गणेश और मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम का ध्यान करें, क्योंकि मान्यता है कि जहां श्रीराम का नाम लिया जाता है, वहां हनुमान जी स्वयं उपस्थित रहते हैं। इसके बाद हनुमान जी की प्रतिमा को सिंदूर और चमेली के तेल का चोला अर्पित करें। हनुमान जी को चोला चढ़ाने से शनि और मंगल के अशुभ प्रभावों से तुरंत मुक्ति मिलती है।

चोला चढ़ाने के पश्चात प्रतिमा पर लाल गुलाब या गुड़हल के पुष्प, अक्षत, धूप और चमेली के तेल अथवा शुद्ध देशी घी का दीपक प्रज्वलित करें। इसके उपरांत कुश या ऊन के लाल आसन पर बैठकर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके श्रद्धापूर्वक ‘हनुमान चालीसा’ का पाठ करें। यदि समय अनुकूल हो तो ‘सुंदरकांड’ या ‘बजरंग बाण’ का पाठ करना अत्यंत प्रभावशाली सिद्ध होता है। पूजा के समापन पर कपूर जलाकर हनुमान जी और प्रभु श्रीराम की आरती उतारें और परिजनों में प्रसाद का वितरण करें।

हनुमान जी के प्रिय भोग और नैवेद्य अर्पण के नियम

हनुमान जी की पूजा में नैवेद्य और भोग का विशेष महत्व माना गया है। बजरंगबली को सबसे सरल और प्रिय भोग गुड़ और भुने हुए देसी चने का है। इसके अतिरिक्त बेसन के मोदक, मोतीचूर के लड्डू, बूंदी, और मौसमी फल में पके केले अर्पित करने की समृद्ध परंपरा है। विशेष मनोरथ की पूर्ति के लिए मंगलवार को लौंग, इलायची और गुलकंद से सुसज्जित मीठा पान (तांबूल) हनुमान जी को भेंट करना सर्वोत्तम माना जाता है।

हनुमान जी को भोग लगाते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि नैवेद्य के ऊपर तुलसी दल अवश्य रखा जाए, क्योंकि तुलसी दल के बिना पवनपुत्र भोग स्वीकार नहीं करते। भोग पूरी पवित्रता और सात्विक भाव से तैयार होना चाहिए। पूजा संपन्न होने के उपरांत यह प्रसाद सर्वप्रथम घर के बच्चों, बुजुर्गों, गाय और जरूरतमंदों में वितरित करें, उसके बाद ही स्वयं ग्रहण करें।

कल्याणकारी सिद्ध मंत्र और मंगल ग्रह शांति के उपाय

यदि जीवन में शत्रु बाधा, अदालती विवाद, ऋण (कर्ज) या आत्मविश्वास की कमी बनी रहती है, तो मंगलवार के दिन रुद्राक्ष अथवा मूंगे की माला से इन प्रभावशाली मंत्रों का 108 बार जप करना चाहिए:

  • मूल मंत्र: “ॐ हं हनुमते नमः”

  • कष्ट निवारण मंत्र: “ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय सर्वशत्रुसंहारणाय सर्वरोगहराय सर्ववशीकरणाय रामदूताय स्वाहा”

  • मंगल बीज मंत्र: “ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः”

कुंडली में मंगल दोष के प्रभाव को शांत करने के लिए मंगलवार के दिन लाल मसूर की दाल, तांबे के बर्तन, रक्तचंदन, लाल वस्त्र अथवा गुड़ का सामर्थ्यानुसार दान किसी योग्य ब्राह्मण या अभावग्रस्त व्यक्ति को करना चाहिए। इस दिन बंदरों या लाल गाय को गुड़-चना खिलाने से भी ग्रह पीड़ा शांत होती है।

Mangalwar Puja Vidhi: मंगलवार व्रत के कठोर नियम और जरूरी सावधानियां

मंगलवार का व्रत रखने वाले साधकों को दिनभर पूर्ण ब्रह्मचर्य और सात्विकता का पालन करना अनिवार्य है। इस दिन परिवार में किसी भी सदस्य को मांसाहार, मदिरा, लहसुन और प्याज जैसे तामसिक पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन घर में कलह, असत्य वचन और क्रोध से बचना चाहिए तथा अपने मन में सकारात्मक विचारों का वास रखना चाहिए।

व्रत रखने वाले श्रद्धालु दिन के समय केवल फलाहार और जल ग्रहण करें। शाम को आरती के बाद केवल एक समय सात्विक भोजन ग्रहण करें, जिसमें सेंधा नमक का उपयोग किया जा सकता है; हालांकि नमक से पूरी तरह परहेज करना सर्वाधिक फलदायी माना गया है। इसके अलावा मंगलवार के दिन दाढ़ी-बाल कटवाना, नाखून काटना और धारदार वस्तुएं या काले कपड़े खरीदना वर्जित माना जाता है।

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